पूर्व विधायक आरडी प्रजापति ने संतों को लेकर दिया विवादित बयान

एमपी में नेताओं की विवादित टिप्पणी लगातार बढ़ रही है। महिलाओं, संतों और धर्म पर अभद्र बयानबाजी की जा रही हैं। रविवार को पूर्व विधायक आरडी प्रजापति ने विवादित बयान दिया।

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Sandeep Kumar
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News in Short

  • भोपाल में ओबीसी-एससी-एसटी संयुक्त संघर्ष मोर्चा का महासम्मेलन हुआ।
  • सम्मेलन के दौरान पूर्व विधायक आरडी प्रजापति ने विवादित बयान दिया। 
  • प्रजापति ने कथावाचकों और महिलाओं को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां की।
  • पूर्व विधायक ने कहा कि कथावाचकों को जूतों की माला पहनाकर नंगा घुमाया जाए।

News in Detail

भोपाल में सामाजिक न्याय, आरक्षण और प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर बड़ा टकराव हुआ। रविवार को भोपाल के भेल दशहरा मैदान में महासम्मेलन और प्रदर्शन हुआ। यह आयोजन ओबीसी-एससी-एसटी संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने किया।

इस महासम्मेलन में पूर्व विधायक आरडी प्रजापति ने कथावाचकों और महिलाओं पर विवादित बयान दिया। उन्होंने बहन-बेटियों को प्लॉट बताया। प्रजापति ने एक संत के बयान पर विवादित टिप्पणी करते हुए सवाल किया कि क्या वह अपनी एंजॉय वाली मां से पैदा हुए हैं? 

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जूतों की माला पहनाकर नंगा घुमाया जाए

आरडी प्रजापति के बयान ने विवाद खड़ा किया। उन्होंने कथावाचकों पर आपत्तिजनक टिप्पणी की। प्रजापति ने कहा, बहन-बेटियां अब प्लॉट हो गई हैं। उन्होंने कथावाचकों के खिलाफ विवादित शब्दों का इस्तेमाल किया। प्रजापति ने यह भी कहा कि कथावाचकों को जूतों की माला पहनाकर नंगा घुमाया जाए। उनका आरोप था कि कथावाचक अशोभनीय बातें बोलते हैं।

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संतोष वर्मा के समर्थन में मोर्चा खोला

आईएएस संतोष वर्मा के ब्राह्मण समाज की बच्ची पर दिए बयान का सवर्ण संगठनों ने विरोध किया। इसके बाद प्रशासन ने कार्रवाई की। अब तस्वीर बदल रही है। एससी-एसटी-ओबीसी संगठनों ने संतोष वर्मा के समर्थन में मोर्चा खोला है।

आंदोलनकारियों ने वर्मा पर की गई कार्रवाई को वापस लेने की मांग की। संयुक्त संघर्ष मोर्चा का आरोप है कि यह कार्रवाई दबाव में की गई। उनका कहना है कि यह दलित, आदिवासी और पिछड़ा वर्ग की आवाज दबाने का प्रयास है। इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताया गया।

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पदोन्नति में आरक्षण लागू नहीं हो रहा

महासम्मेलन में नेताओं ने कहा कि एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग को शिक्षा, रोजगार और प्रशासनिक नियुक्तियों में उपेक्षा झेलनी पड़ रही है। हजारों पद वर्षों से खाली हैं। पदोन्नति में आरक्षण लागू नहीं हो रहा है। संवैधानिक अधिकार केवल कागजों तक सीमित हैं। नेताओं ने कहा कि यह आंदोलन सामाजिक न्याय और प्रशासनिक निष्पक्षता की लड़ाई है।

ओबीसी-एससी-एसटी संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने की ये मांग

  • ओबीसी वर्ग को जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण।
  • सभी रिक्त और बैकलॉग पदों पर शीघ्र भर्ती।
  • पदोन्नति में ओबीसी वर्ग को आरक्षण।
  • निजी और संविदा क्षेत्र में आरक्षण लागू करना।
  • पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली।
  • संवैधानिक संस्थाओं में जनसंख्या अनुपात में प्रतिनिधित्व।
  • IAS संतोष वर्मा पर की गई कार्रवाई को तत्काल वापस लेना।

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