सागर के वेयरहाउस में गेहूं घोटाला: DSO को हटाया, सहायक अधिकारी निलंबित
समझें क्या है पूरा मामला...
- सागर के वेयरहाउस में गेहूं की बोरियों में मिट्टी मिलाई गई थी।
- जिला आपूर्ति अधिकारी ज्योति बघेल को पद से हटा दिया गया है।
- सहायक आपूर्ति अधिकारी निशांत पांडे को तत्काल निलंबित किया गया है।
- हर्षिका स्व-सहायता समूह को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है।
- समूह अध्यक्ष, उनके पति और सचिव पर FIR दर्ज हुई है।
सागर वेयरहाउस में गेहूं घोटाला
मध्यप्रदेश के सागर जिले में एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। जिले के गंभीरिया क्षेत्र में लक्ष्मी नगर स्थित श्रीदेव प्रभाकर वेयरहाउस में गेहूं खरीदी के दौरान बोरियों में भारी मात्रा में मिट्टी मिली है। जब प्रशासन ने जांच की तो हकीकत सामने आई। कई बोरियों में गेहूं की जगह मिट्टी भरी मिली। यह मामला सामने आते ही जिला प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी है।
बड़ी कार्रवाई: DSO हटाए, अधिकारी निलंबित
इस घोटाले में शासन ने तेज कदम उठाए हैं। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के सख्त निर्देश पर सहायक आपूर्ति अधिकारी निशांत पांडे को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। इसके साथ ही जिला आपूर्ति अधिकारी (DSO) ज्योति बघेल को पद से हटा दिया गया है। उन्हें भोपाल मुख्यालय में हाजिर होने के आदेश दिए गए हैं।
मंत्री ने कहा: गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं
खाद्य मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया है। उन्होंने कलेक्टर को विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं। मंत्री ने कहा कि सिर्फ खाद्य विभाग ही नहीं, बल्कि गेहूं उपार्जन (खरीदी) प्रक्रिया से जुड़े दूसरे विभागों के कर्मचारियों की भूमिका भी जांची जाएगी। जो भी दोषी मिलेगा, उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
मंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि किसानों की मेहनत और उनके अधिकारों से खिलवाड़ किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं होगा। उन्होंने चेताया कि चाहे अधिकारी हो, कर्मचारी हो, संस्था हो या कोई समूह, लापरवाही या भ्रष्टाचार में लिप्त पाए जाने पर कठोर कार्रवाई तय है।
समूह पर गिरी गाज, FIR दर्ज
इस फर्जीवाड़े में सबसे बड़ी कार्रवाई हर्षिका स्व-सहायता समूह के खिलाफ हुई है। यह वही समूह था जिसने यहां गेहूं की खरीदी की थी। कलेक्टर के आदेश पर इस समूह को तत्काल ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है।
इसके अलावा समूह की अध्यक्ष, उनके पति और सचिव के खिलाफ पुलिस में मामला भी दर्ज कराया गया है। तीनों पर FIR हो चुकी है।
इस कार्रवाई से जिले के दूसरे उपार्जन केंद्रों पर भी हड़कंप मच गया है। जानकारों का मानना है कि इस सख्त एक्शन से आगे इस तरह की गड़बड़ियों पर लगाम लग सकती है।
जांच का दायरा बढ़ा
कलेक्टर ने शुरुआती जांच में ही कुछ बोरियों में गड़बड़ी पकड़ी थी। उसके बाद मामला आगे बढ़ा और अब पूरी उपार्जन प्रक्रिया की जांच की जा रही है। सरकार चाहती है कि यह पता चले कि इस घोटाले में कितने लोग शामिल हैं और यह कितने समय से चल रहा था। जांच एजेंसियां अब सभी संबंधित रिकॉर्ड खंगाल रही हैं।
किसानों को होता है सीधा नुकसान
सरकारी गेहूं खरीदी की प्रक्रिया किसानों के लिए बेहद अहम होती है। जब बोरियों में मिट्टी मिलाई जाती है, तो इससे सरकारी खजाने को नुकसान होता है। साथ ही यह पूरी व्यवस्था पर सवाल उठाता है। किसानों की फसल का सही दाम मिले और खरीदी पारदर्शी हो, इसी के लिए यह तंत्र बना है। वहीं, इस तरह की मिलावट से पूरी व्यवस्था की साख को ठेस पहुंचती है।
ये खबरें भी पढ़िए...
लाड़ली बहना योजना की 37वीं किस्त, सीएम मोहन यादव आज सागर से करेंगे जारी
कृषि मंत्री के क्षेत्र में 150 करोड़ का गेहूं घोटाला: दिग्विजय सिंह का बड़ा आरोप, जांच की मांग
रायसेन गेहूं घोटाले की फाइल दबी धूल में, एसडीएम ने कलेक्टर के आदेश को ठेंगा दिखाया
MP News. 93 लाख का गेहूं घोटाला : दो दिन में दो अफसर सस्पेंड, 6 पर मामला दर्ज