सागर ग्रीन हिल्स अवैध निर्माण विवाद: बिल्डर संजीव अग्रवाल को फिर नोटिस
News In Short
- भोपाल के कोलार में सागर ग्रीन हिल्स कॉलोनी अवैध घोषित होने की प्रक्रिया में है।
- बिल्डर संजीव अग्रवाल को नगरीय विकास विभाग ने दोबारा नोटिस जारी किया है।
- कॉलोनी में बने पेंट हाउस 2013 की विवादित नगरपालिका अनुमति पर बने हैं।
- एक सीनियर आईएएस अफसर ने भी यहां बड़ा निवेश किया है।
- 10 जून को शासन स्तर पर सभी पक्षकारों को सुनवाई के लिए बुलाया गया है।
News In Detail
भोपाल में सागर ग्रीन हिल्स पर विवाद
भोपाल के कोलार इलाके में सेज ग्रुप के जरिए बनाई गई सागर ग्रीन हिल्स कॉलोनी इन दिनों बड़े विवाद में है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने सेज ग्रुप के मालिक संजीव अग्रवाल को एक बार फिर नोटिस थमाया है। उन्हें 10 जून को सचिव कार्यालय में हाजिर होकर जवाब देना है।
यह मामला सिर्फ एक बिल्डर का नहीं है। इसमें सैकड़ों निवेशक और घर खरीदार भी उलझे हैं। यहां तक कि एक सीनियर आईएएस अफसर ने भी इस प्रोजेक्ट में बड़ी रकम लगाई है। उनकी परेशानी अब जाहिर हो रही है।
2013 की अनुमति ही विवाद की जड़
दरअसल, अग्रवाल ने सागर ग्रीन हिल्स प्रोजेक्ट के लिए 2013 में तत्कालीन कोलार नगरपालिका से अनुमति ली थी। बाद में कोलार नगरपालिका को भोपाल नगर निगम में मिला दिया गया था। तब पुराने नियम, जो कि नगर पालिका स्तर पर लागू थे, नगर निगम के नियमों से मेल नहीं खाते थे। इसी वजह से कॉलोनी के निर्माण को बाद में अवैध माना जाने लगा।
सागर ग्रीन हिल्स कालियासोत नदी के कैचमेंट (Catchment - जलग्रहण क्षेत्र) एरिया में बनी है। यह पूरा क्षेत्र नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT - National Green Tribunal) के जरिए प्रतिबंधित घोषित है। यानी यहां किसी भी तरह के निर्माण की अनुमति नहीं होनी चाहिए थी।
नियमों का उल्लंघन हर कदम पर
जानकारी के अनुसार, बिल्डर संजीव अग्रवाल को 2013 की अनुमति में अधिकतम 18 मीटर ऊंची इमारत बनाने की छूट थी। वहीं, उन्होंने 21 मीटर ऊंचे टावर खड़े कर दिए। टावर की छत पर 16 से ज्यादा पेंट हाउस बनाकर करोड़ों रुपए में बेच दिए गए।
नगर पालिका की उस अनुमति के आधार पर बड़े पैमाने पर नियमों का उल्लंघन हुआ। नगरीय प्रशासन ने पहले भी नोटिस जारी किए थे। अब 2013 से मिली अनुमतियां एक-एक कर खारिज हो रही हैं या प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
खरीदार और निवेशक तनाव में
सरकार की इस कार्रवाई से सागर ग्रीन हिल्स में प्रॉपर्टी खरीदने वाले बुरी तरह परेशान हैं। पिछली सुनवाई में कई निवेशक पेंट हाउस खरीदने के लिए बिल्डर के पास पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि उन्हें पहले यह सब बताया जाना चाहिए था। उन्होंने लिखित में अपनी बात रखने की बात कही।
एक निवासी अभिषेक ने कहा कि जीवन भर की कमाई लगाकर घर खरीदना अब सबसे बड़ी मुसीबत बन गई है। रहवासी नरेंद्र सिंह ने बताया कि जिला प्रशासनिक अमले द्वारा ब्लॉक की जमीन की जांच में यह सामने आया कि यह ब्लॉक बिल्डर का नहीं बल्कि किसी और की निजी जमीन पर बना है। रहवासी सुषमा ने कहा कि बेदखली का डर अब उन्हें गहरे तनाव में डाल रहा है।
300 परिवारों पर बेघर होने का खतरा
सागर ग्रीन हिल्स के चारों ब्लॉक्स में पेंट हाउस अवैध घोषित होने से करीब 300 परिवारों पर बेघर होने का खतरा मंडरा रहा है। सरकार के नोटिस के बाद से कई रातों की नींद उड़ गई है। लोग कह रहे हैं कि बिल्डर ने उन्हें कभी नहीं बताया कि कॉलोनी की अनुमति विवादित है।
विधिक सलाह लेने का फैसला कई निवेशकों ने किया है। बिल्डर संजीव अग्रवाल के खिलाफ आधिकारिक हस्तक्षेप के लिए भी पत्र लिखा गया है।
जून में होगी अहम सुनवाई
10 जून को सचिव स्तर पर सुनवाई होनी है। सभी पक्षकारों को तलब किया गया है। संजीव अग्रवाल को भी रिकॉर्ड के साथ जवाब देना होगा। अगली सुनवाई में निवेशकों की भी हाजिरी तय की गई है।
नगर निगम और नगरीय विकास विभाग दोनों इस मामले की निगरानी कर रहे हैं। सुनवाई के बाद ही यह तय होगा कि पेंट हाउस तोड़े जाएंगे या नियमित किए जाएंगे।
ये खबर भी पढ़िए...
सेज ग्रुप के ग्रीन हिल्स विवाद में घिरा नगरीय विकास विभाग: अब नोटिस से ‘एक्शन’ का दावा
MP News: सेज ग्रुप के मालिक संजीव अग्रवाल की पत्नी किरण को तीन साल की सश्रम सजा
भोपाल में कमिश्नर पर भारी सेज ग्रुप का रसूख, BMC के नोटिस पर भी यूनिकार्प ने बोर्ड से नहीं हटाया सेज
मध्यप्रदेश में आगरा-मुंबई NH पर कांग्रेस का चक्काजाम, 15 से ज्यादा जिलों में असर