सागर जहरीली शराब कांड की जांच करेंगे रिटायर्ड जज, मौतों का आंकड़ा 31 पहुंचा
समझें क्या है पूरा मामला...
- सागर के बंडा क्षेत्र में जहरीली शराब से मौतें बढ़ती जा रही हैं।
- अब तक मरने वालों की संख्या 31 पहुंच गई है।
- 11 मरीज अभी भी आईसीयू में भर्ती हैं।
- खुलासा हुआ कि खेत में 50 पेटी नकली शराब बनी थी।
- हाईकोर्ट के रिटायर जस्टिस इस पूरे मामले की जांच करेंगे।
मौतों का आंकड़ा बढ़ा
सागर के बंडा क्षेत्र में जहरीली शराब पीने से जान गंवाने वालों की संख्या 31 हो गई है। बुधवार, 09 सितंबर को हिनौती गांव के धनसिंह आदिवासी ने बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। यहां अभी भी 11 मरीज आईसीयू में भर्ती हैं। इनमें से चार मरीजों की हालत गंभीर बताई जा रही है।
हालांकि सरकारी आंकड़ों में अभी सिर्फ 15 मौतें ही दर्ज की गई हैं। यह घटना बंडा और शाहगढ़ तहसील के गांवों से जुड़ी है, जिनमें नौराज, गूगरा खुर्द और बमूरा शामिल हैं। शनिवार, 05 सितंबर की रात के बाद 100 से ज्यादा लोगों की तबीयत अचानक बिगड़ गई थी।
हाईकोर्ट जज करेंगे जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव खुद सागर पहुंचे। उन्होंने पूरे शराबकांड की न्यायिक जांच के आदेश दिए। यह जांच मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के रिटायर जस्टिस विष्णु प्रताप सिंह चौहान की अध्यक्षता में होगी।
मुख्यमंत्री ने दोषियों के खिलाफ फांसी तक की सजा वाली धाराओं में केस दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। जिला प्रशासन ने पहले ही मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए थे। बंडा थाने में भारतीय न्याय संहिता (Bharatiya Nyaya Sanhita) और मध्य प्रदेश आबकारी अधिनियम, 1915 की विभिन्न धाराओं में 30 आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
प्रशासन में बड़ा बदलाव
इस मामले के बाद सागर संभाग के प्रशासन और पुलिस दोनों महकमों में तेजी से बदलाव किए गए हैं। दिलीप कुमार को सागर का नया संभागायुक्त बनाया गया है। उनका नाम 5 सितंबर को जारी तबादला सूची में ही शामिल था। बुधवार को उन्होंने पदभार संभाल लिया।
इसी बीच सागर का आईजी (Inspector General) पद भी खाली था। बुधवार को यह जिम्मा आईजी एसएसएफ इरशाद वली को दिया गया। मुख्यमंत्री ने साफ निर्देश दिए हैं कि जांच में जिस भी अफसर या कर्मचारी की लापरवाही सामने आए, उसकी जवाबदेही तय करके कार्रवाई की जाए।
कैसे बनी नकली शराब
जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। आरोपियों ने एक खेत में ही नकली शराब बनाने का पूरा सेटअप लगा रखा था। जन्माष्टमी से दो दिन पहले मकई के खेत में 50 पेटी जहरीली शराब तैयार की गई थी। इसे 'सागर गोल्ड' नाम से पैक किया गया। यह शराब असली ब्रांड की तरह दिखने के लिए बनाई गई थी, ताकि लोगों को शक न हो। इसमें मिलावट के कारण कई लोगों की जान चली गई।
मुख्य आरोपी कौन हैं
इस पूरे रैकेट में तीन नाम सामने आए हैं। रवि लखेरा को अंतरराज्यीय तस्कर बताया जा रहा है। उसने ही मनीष को शराब बनाने का फॉर्मूला दिया था। रवि पर पहले से 25 मामले दर्ज हैं। मनीष लोधी शराब दुकान का लाइसेंसी था। उसने स्पिरिट, बोतल और लेबल जैसा सामान उपलब्ध कराया। मनीष पर पहले से 11 मामले दर्ज हैं। चंदू राजा नाम का आरोपी खेत में शराब बनाने का काम करता था। उस पर भी पहले 5 मामले दर्ज हो चुके हैं।
यशवंत बनकर लिया लाइसेंस
जांच में एक और चौंकाने वाली बात सामने आई है। बरेठी की शराब दुकान का लाइसेंस यशवंत सिंह के नाम पर था। पुलिस के मुताबिक मनीष लोधी और यशवंत सिंह असल में एक ही व्यक्ति हैं। मनीष पर पहले से आबकारी अधिनियम (Excise Act) की गैर-जमानती धाराओं में केस दर्ज थे।
लाइसेंस के लिए होने वाले पुलिस सत्यापन में आपराधिक रिकॉर्ड सामने आने के डर से उसने यशवंत नाम से नई पहचान बना ली। इस पहचान को छिपाने के लिए मनीष ने अलग-अलग जगह अलग-अलग कहानी बताई। बरेठी और बंडा में वह खुद को यशवंत सिंह कहता था। सागर में वह यशवंत को अपना भाई बताता था। शराबकांड सामने आने तक आबकारी विभाग और स्थानीय ठेकेदार भी दोनों को अलग-अलग व्यक्ति ही समझते रहे।
घटना कहां से शुरू हुई
यह पूरा मामला सागर जिले की बंडा और शाहगढ़ तहसील से जुड़ा है। यहां के कुछ गांवों में शनिवार रात लोगों ने नकली शराब पी थी। इसके बाद रविवार तड़के से ही लोगों की तबीयत बिगड़ने लगी। सागर की जिलाधिकारी प्रतिभा पाल ने बताया कि यह मामला तड़के चार बजे संज्ञान में आया था। शुरुआत में मौतों की संख्या 10 के आसपास थी, लेकिन अगले कुछ दिनों में यह आंकड़ा तेजी से बढ़ता गया। कांग्रेस पार्टी ने भी शुरुआती दौर में ही इस मामले की न्यायिक जांच की मांग उठाई थी।
आगे क्या कार्रवाई होगी
प्रशासन अब इस पूरे नेटवर्क की जड़ तक पहुंचने की कोशिश कर रहा है। पुलिस यह पता लगा रही है कि नकली शराब कहां-कहां तक पहुंचाई गई थी। सभी आरोपियों से पूछताछ जारी है। जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट सरकार को सौंपी जाएगी। इसके आधार पर लापरवाह अधिकारियों पर भी कार्रवाई हो सकती है। स्थानीय लोगों में प्रशासन और आबकारी विभाग के खिलाफ गुस्सा भी बना हुआ है।
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