सागर शराब कांड: यूपी पुलिस ने खोली MP पुलिस की पोल, ललितपुर ASP के बयान से उठे सवाल
Amresh Kushwaha | Sept 08, 2026, 09:03 IST
सागर जहरीली शराब कांड
सागर के बंडा में जहरीली शराब से 20 से ज्यादा मौतों के बाद MP पुलिस ने मामला ललितपुर से जोड़ा था। वहीं, ललितपुर एएसपी ने इस दावे पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सागर जहरीली शराब कांड में अब दो राज्यों की पुलिस आमने-सामने है। सागर में 20 से ज्यादा मौतों के बाद मध्य प्रदेश पुलिस ने जांच के तार उत्तर प्रदेश के ललितपुर से जुड़ने का दावा किया था। वहीं ललितपुर एएसपी के बयान ने इस दावे की पोल खोल दी।
अब सवाल उठ रहा है कि क्या अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए मामले को दूसरे राज्य से जोड़ने की कोशिश की गई? खास बात यह है कि जिस वक्त मध्य प्रदेश पुलिस नशे से दूरी जरूरी अभियान चला रही है, उसी दौरान जहरीली शराब से हुई मौतों ने सिस्टम की निगरानी और कार्रवाई पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
सागर एसपी अनुराग सुजानिया ने पहले मीडिया को जानकारी दी थी। उनके अनुसार शुरुआती जांच में शराब सागर की नहीं निकली। उनका दावा था कि शराब उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले से आई थी। ललितपुर सागर जिले के बिल्कुल पास बताया गया है। एसपी के मुताबिक वहां शराब माफियाओं का एक बड़ा गिरोहसक्रिय था।
यह गिरोह कथित तौर परनकली शराब बनाकर सागरभेजता था। मई 2026 कीएक एफआईआर (FirstInformation Report)की कॉपी भी सामने आई है।इस एफआईआर में ललितपुरपुलिस ने गिरोह काखुलासा किया था। पुलिसके अनुसार यह गिरोहमध्य प्रदेश में अवैधशराब सप्लाई करता था।
ललितपुर के अपर पुलिसअधीक्षक कालू सिंह नेइस दावे पर सीधा जवाबदिया। उन्होंने कहा किसागर पुलिस मीडिया कोभ्रामक जानकारी दे रहीहै। उनके मुताबिक शराबकांड का सीधा संबंध ललितपुर से जोड़ना सही नहीं है। उन्होंने साफ कहा कि ललितपुर में अवैध शराब का निर्माण नहीं हो रहा। कालू सिंह ने कहा कि सागर पुलिस को तथ्य ललितपुर पुलिस से साझा करने चाहिए।
इस पूरे विवाद ने मध्य प्रदेश पुलिस के अभियान पर भी सवाल खड़े किए हैं। पुलिस उसी दौरान नशे से दूरी जरूरी नाम से अभियान चला रही थी। इसी बीच जहरीली शराब से इतनी मौतें होना गंभीर सवाल बन गया है। लोग पूछ रहे हैं कि निगरानी में कहां चूक हुई। सवाल यह भी है कि जिम्मेदारी दूसरे राज्य पर डालने की जरूरत क्यों पड़ी।
एएसपी जयवीर भदौरिया ने बताया कि मुख्य आरोपी चंदू राजा और राघवेंद्र सिंह समेत कुल 30 नामजद आरोपियों में से 14 को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस के मुताबिक, ततरवारा गांव में चल रही एक अवैध फैक्ट्री में ड्रमों से केमिकल लाकर अलग-अलग ब्रांड की नकली शराब बनाई और पैक की जाती थी। इस नेटवर्क के तार मुरैना जिले से जुड़े होने का शक है।
सागर के बंडा और शाहगढ़ इलाके में जहरीली शराब पीने से 22 लोगों की जान चली गई है और 120 से ज्यादा लोग अस्पतालों में भर्ती हैं।
जांच में बंबइया व्हिस्की और सागर गोल्ड नाम के दो ब्रांड्स की शराब का नाम सामने आया है। पुलिस ने अलग-अलग एफआईआर दर्ज करके शराब के दो ठेकेदारों समेत कुल 30 लोगों पर केस दर्ज किया है।
बंडा थाने में ठेकेदार यशवंत सिंह ठाकुर के खिलाफ बंबइया व्हिस्की को लेकर केस दर्ज हुआ है। वहीं, विनायका थाने में ठेकेदार सिद्धार्थ कुशवाहा पर सागर गोल्ड नाम की शराब बेचने का मामला दर्ज किया गया है।
अस्पताल में भर्ती मरीजों का कहना है कि उन्होंने इन्हीं दोनों ब्रांड्स की शराब पी थी। बताया जा रहा है कि यह जहरीली शराब दुकानों, ढाबों और सरकारी ठेकों तक पर धड़ल्ले से बिक रही थी। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क और जहरीली शराब बनाने वालों का पता लगा रही है।
मामला बढ़ने पर देर रात सरकार ने बंडा के एसडीओपी प्रदीप वाल्मीकि को हटाकर भोपाल पुलिस मुख्यालय भेज दिया, वहीं शाहगढ़ की प्रभारी एसडीएम आरती यादव को हटाकर सागर कलेक्टर दफ्तर अटैच कर दिया है।
ललितपुर एएसपी कालू सिंह के अनुसार 4 मई 2026 को ही एक गिरोह पकड़ा गया था। यह गिरफ्तारी ललितपुर पुलिस और आबकारी विभाग (Excise Department) की संयुक्त टीम ने की। गिरोह का सरगना रवि लखेरा बताया गया है। वह छतरपुर जिले के ओरछा रोड थाना क्षेत्र का निवासी है। दूसरा आरोपी चंद्रेश लोधी सागर जिले के मालथौन थाना क्षेत्र का रहने वाला है। इनके साथ 5 और आरोपियों को भी गिरफ्तार किया गया था।
सभी सातों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है। इन पर गैंगस्टर एक्ट (Gangster Act) की कार्रवाई भी चल रही है। आरोपी रवि लखेरा के पास मध्य प्रदेश में शराब ठेके का लाइसेंस भी है। उस पर प्रदेश के कई थानों में शराब के मामले पहले से दर्ज हैं।
थाना बंडा में 6 सितंबर 2026 को एक नई एफआईआर दर्ज हुई है। इस एफआईआर में कुल 20 आरोपियों के नाम शामिल किए गए हैं। कालू सिंह के अनुसार इनमें से लगभग सभी मध्य प्रदेश के निवासी हैं। सिर्फ एक आरोपी आकाश राय को मड़ावरा निवासी दिखाया गया है। हालांकि वह बीते 10 साल से बंडा थाना क्षेत्र में ही रह रहा है। इससे ललितपुर पुलिस के दावे को और मजबूती मिलती है।
सागर पुलिस और ललितपुर पुलिस के दावे अब अलग अलग दिख रहे हैं। सागर पुलिस का कहना है कि शराब ललितपुर से मंगाई गई थी। वहीं ललितपुर पुलिस का कहना है कि यह जिम्मेदारी मध्य प्रदेश की ही है। दोनों पक्षों के तर्क और तथ्य अब जांच एजेंसियों के सामने हैं। आने वाले दिनों में सच्चाई स्पष्ट होने की उम्मीद है।
इस मामले में अब तक 20 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। ऐसे में हर तथ्य की गहराई से जांच जरूरी हो जाती है। यदि जिम्मेदारी तय करने में देरी हुई तो और नुकसान हो सकता है। पीड़ित परिवारों को भी सही जानकारी और न्याय की उम्मीद है। प्रशासन से लोग साफ और पारदर्शी जांच की मांग कर रहे हैं।
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अब सवाल उठ रहा है कि क्या अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए मामले को दूसरे राज्य से जोड़ने की कोशिश की गई? खास बात यह है कि जिस वक्त मध्य प्रदेश पुलिस नशे से दूरी जरूरी अभियान चला रही है, उसी दौरान जहरीली शराब से हुई मौतों ने सिस्टम की निगरानी और कार्रवाई पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
सागर एसपी का दावा क्या था
यह गिरोह कथित तौर परनकली शराब बनाकर सागरभेजता था। मई 2026 कीएक एफआईआर (FirstInformation Report)की कॉपी भी सामने आई है।इस एफआईआर में ललितपुरपुलिस ने गिरोह काखुलासा किया था। पुलिसके अनुसार यह गिरोहमध्य प्रदेश में अवैधशराब सप्लाई करता था।
ललितपुर एएसपी का जवाब
मध्य प्रदेश के सागर जिले के बण्डा थाना क्षेत्र में जहरीली शराब पीने से कई लोगो की मौत के मामले में सागर पुलिस द्वारा मीडिया को भ्रांमक तथ्य पेश किये जा रहे हैं कि इसका सम्बन्ध ललितपुर से है, इसके सम्बन्ध में स्पष्ट करना है कि ललितपुर पुलिस व आबकारी विभाग ललितपुर की संयुक्त टीम… pic.twitter.com/zV6o4glKCu
— LALITPUR POLICE (@lalitpurpolice) September 7, 2026
नशा मुक्ति अभियान पर सवाल
पहले यूपी और अब एमपी के मुरैना से जुड़े तार
सागर जहरीली शराब कांड में अब तक क्या हुआ?
जांच में बंबइया व्हिस्की और सागर गोल्ड नाम के दो ब्रांड्स की शराब का नाम सामने आया है। पुलिस ने अलग-अलग एफआईआर दर्ज करके शराब के दो ठेकेदारों समेत कुल 30 लोगों पर केस दर्ज किया है।
बंडा थाने में ठेकेदार यशवंत सिंह ठाकुर के खिलाफ बंबइया व्हिस्की को लेकर केस दर्ज हुआ है। वहीं, विनायका थाने में ठेकेदार सिद्धार्थ कुशवाहा पर सागर गोल्ड नाम की शराब बेचने का मामला दर्ज किया गया है।
अस्पताल में भर्ती मरीजों का कहना है कि उन्होंने इन्हीं दोनों ब्रांड्स की शराब पी थी। बताया जा रहा है कि यह जहरीली शराब दुकानों, ढाबों और सरकारी ठेकों तक पर धड़ल्ले से बिक रही थी। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क और जहरीली शराब बनाने वालों का पता लगा रही है।
मामला बढ़ने पर देर रात सरकार ने बंडा के एसडीओपी प्रदीप वाल्मीकि को हटाकर भोपाल पुलिस मुख्यालय भेज दिया, वहीं शाहगढ़ की प्रभारी एसडीएम आरती यादव को हटाकर सागर कलेक्टर दफ्तर अटैच कर दिया है।
कौन हैं गिरफ्तार आरोपी
सभी सातों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है। इन पर गैंगस्टर एक्ट (Gangster Act) की कार्रवाई भी चल रही है। आरोपी रवि लखेरा के पास मध्य प्रदेश में शराब ठेके का लाइसेंस भी है। उस पर प्रदेश के कई थानों में शराब के मामले पहले से दर्ज हैं।
FIR में किसके नाम शामिल
दो राज्यों की पुलिस में मतभेद
क्यों जरूरी है निष्पक्ष जांच
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