संविदा कर्मचारियों की जानकारी दबाए बैठे हैं कई विभाग, GAD के 5 पत्र बेअसर
समझें क्या है पूरा मामला...
- कई विभाग संविदा कर्मचारियों की जानकारी नहीं दे रहे।
- GAD ने चार महीने में 5 पत्र लिखे हैं।
- मुख्यमंत्री ने भी इस मामले की समीक्षा के निर्देश दिए थे।
- अब फिर से सभी विभागों को जानकारी देने को कहा गया है।
- संविदा नीति-2023 के प्रावधानों पर बिंदुवार जानकारी मांगी गई है।
मध्यप्रदेश में कई सरकारी विभागों के निगम, मंडल और योजनाओं में संविदा कर्मचारी काम कर रहे हैं। इन कर्मचारियों और अधिकारियों की सही जानकारी विभाग प्रमुख नहीं दे रहे हैं। यह जानकारी सामान्य प्रशासन विभाग यानी जीएडी को बार-बार मांगनी पड़ रही है। बावजूद इसके अधिकारी अब तक बेपरवाह बने हुए हैं।
यह मामला संविदा नीति 2023 के क्रियान्वयन से जुड़ा है। सीएम मोहन यादव ने पहले ही इस मामले की समीक्षा करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद भी विभागों की तरफ से गंभीरता नहीं दिखाई गई।
पांच बार लिखे गए पत्र
सामान्य प्रशासन विभाग इस मामले में लगातार पत्र लिख रहा है। बीते चार महीने में विभाग पांच बार पत्र भेज चुका है। पहला पत्र 18 मार्च को भेजा गया था। इसके बाद 13 अप्रैल और 4 मई को भी पत्र लिखे गए। वहीं, 8 जून को भी एक पत्र भेजा गया था। इतने पत्र भेजने के बाद भी कई विभागों ने जानकारी नहीं दी है। इसी वजह से 29 जून को एक बार फिर पत्र लिखा गया है। यह पत्र अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव और सचिव स्तर के अधिकारियों को भेजा गया है। पत्र में साफ कहा गया है कि पुरानी जानकारी अब तक नहीं मिली है।
किन बिंदुओं पर मांगी जानकारी
सामान्य प्रशासन विभाग ने कुल सात बिंदुओं पर जानकारी मांगी है।
पहला बिंदु सीधी भर्ती के नियमित पदों को संविदा नियुक्तियों के लिए आरक्षित रखने से जुड़ा है।
दूसरा बिंदु सेवा के दौरान किसी संविदा कर्मचारी की मृत्यु होने पर अनुकंपा नियुक्ति के प्रावधान से जुड़ा है। विभागों को बताना होगा कि यह प्रावधान लागू हुआ है या नहीं।
तीसरा बिंदु संविदा पदों की नियमित पदों के साथ समकक्षता तय करने से जुड़ा है।
चौथे बिंदु में संविदा अधिकारियों और कर्मचारियों को मिलने वाली अवकाश की सुविधा शामिल है।
पांचवां बिंदु संविदा कर्मियों के साथ अनुबंध यानी कॉन्ट्रैक्ट पूरा करने की स्थिति से जुड़ा है।
छठे बिंदु में संविदा कर्मियों और उनके परिवार को मिलने वाली उपादान यानी ग्रेच्युटी राशि की व्यवस्था शामिल है।
सातवां बिंदु सेवा शर्तों में नीति के अनुसार जरूरी बदलाव जोड़ने से जुड़ा है।
विभागों को क्या करना होगा
पत्र में विभागों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। हर बिंदु के सामने बताना होगा कि प्रावधान लागू हुआ है या नहीं। यदि कोई प्रावधान लागू नहीं हुआ, तो उसका कारण भी लिखना होगा। यह जानकारी बिंदुवार और प्राथमिकता के आधार पर देनी होगी। इसका मकसद मुख्यमंत्री की घोषणाओं की सही समीक्षा करना है। बिना सही जानकारी के यह समीक्षा पूरी नहीं हो सकती। इसलिए विभागों पर जल्दी जवाब देने का दबाव बढ़ गया है।
आगे क्या हो सकता है असर
यदि विभाग अब भी जानकारी नहीं देते हैं, तो मामला और आगे बढ़ सकता है। इससे संविदा कर्मचारी को मिलने वाली सुविधाओं में देरी हो सकती है। मुख्यमंत्री की घोषणाओं का असली फायदा तभी मिलेगा जब सही डाटा सामने आएगा। सामान्य प्रशासन विभाग की सख्ती से आगे कुछ बड़े फैसले हो सकते हैं। इस पूरे मामले पर आने वाले दिनों में और स्पष्टता आने की उम्मीद है।
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