सतना मॉर्चुरी में दो घंटे रही दो छात्राएं, उनके सामने ही कंकाल का हुआ पोस्टमॉर्टम

Manya Jain | Aug 08, 2026, 17:25 IST
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सतना जिला अस्पताल की मॉर्चुरी में दो स्कूली छात्राएं पोस्टमॉर्टम के दौरान करीब पौने दो घंटे मौजूद रहीं। स्कूल ने अनुमति देने से इनकार किया है। अफसरों ने इसे नियमों का उल्लंघन बताया है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • सतना जिला अस्पताल की मॉर्चुरी में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है।
  • शुक्रवार को दो स्कूली छात्राएं पोस्टमॉर्टम के दौरान मॉर्चुरी में मौजूद रहीं।
  • दोनों छात्राएं स्कूल यूनिफॉर्म में करीब पौने दो घंटे तक वहां रहीं।
  • स्कूल प्रबंधन ने अनुमति देने से साफ इनकार किया है।
  • अस्पताल और मेडिकल कॉलेज के अफसरों ने इसे नियमों के खिलाफ बताया है।

यह मामला शुक्रवार दोपहर का है, जब जिला अस्पताल की मॉर्चुरी में एक पोस्टमॉर्टम प्रक्रिया चल रही थी। इस दौरान दो छात्राएं वहां मौजूद पाई गईं। इस घटना ने अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।



स्कूल यूनिफॉर्म में बैग लिए मॉर्चुरी में प्रवेश करती छात्रा।


कब और कैसे हुई घटना

जानकारी के मुताबिक शुक्रवार दोपहर करीब 1 बजकर 45 मिनट पर जिला अस्पताल की मॉर्चुरी में एक कंकाल का परीक्षण शुरू हुआ। यह कंकाल पन्ना जिले के नरदहा निवासी दुर्गेश का बताया जा रहा है, जो बेटू सिंह के पुत्र थे।



दोनों बच्चियों के सामने ही डॉक्टरों ने पोस्टमॉर्टम किया।


करीब 3 बजकर 35 मिनट पर परीक्षण टीम मॉर्चुरी से बाहर निकली। इस दौरान मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर प्रतीक शुक्ला समेत कुल चार लोग वहां मौजूद थे। दोनों छात्राएं भी इसी दौरान मॉर्चुरी में रहीं और करीब पौने दो घंटे बाद बाहर निकलीं।



स्कूल प्रबंधन ने क्या कहा

एमएलबी स्कूल की प्राचार्य शीला सिंह ने इस मामले पर सफाई दी है। उनके मुताबिक शनिवार को पीएससी (Public Service Commission) परीक्षा होने की वजह से शुक्रवार को स्कूल में हाफ डे था।



प्राचार्य के अनुसार स्कूल प्रबंधन ने किसी भी छात्रा को मॉर्चुरी जाने की अनुमति नहीं दी थी। उन्होंने कहा कि अगर छात्राएं बिना अनुमति वहां गई हैं, तो नियमानुसार कार्रवाई कर उनके परिजन को सूचित किया जाएगा।



अफसरों ने बताया नियमों का उल्लंघन

पुलिस के वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. महेंद्र सिंह ने कहा कि पोस्टमॉर्टम रूम एक प्रतिबंधित क्षेत्र होता है। उनके मुताबिक बिना अनुमति किसी को भी वहां प्रवेश नहीं दिया जा सकता। उन्होंने साफ कहा कि अगर छात्राएं पोस्टमॉर्टम के दौरान डॉक्टरों के साथ वहां मौजूद थीं, तो यह पूरी तरह अनुचित है।



सीएमएचओ (Chief Medical and Health Officer) डॉ. मनोज शुक्ला ने बताया कि मॉर्चुरी में किसी प्रशिक्षण का कोई शेड्यूल उनके यहां तय नहीं है। उनके मुताबिक फोरेंसिक प्रशिक्षण से जुड़े नियम मेडिकल कॉलेज ही बता सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि ड्यूटी स्टाफ के अलावा पोस्टमॉर्टम के दौरान कोई बाहरी व्यक्ति मौजूद नहीं रह सकता। विशेष परिस्थितियों में सिर्फ मृतक के परिजन को अनुमति के आधार पर बुलाया जाता है।



डीन बोले, ऐसा कोई नियम नहीं

मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. एसपी गर्ग ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया दी। उनके मुताबिक ऐसा कोई नियम नहीं है, जिसके तहत स्कूली बच्चों को पोस्टमॉर्टम के दौरान प्रशिक्षण दिया जाए।



उन्होंने बताया कि एमबीबीएस (Bachelor of Medicine, Bachelor of Surgery) के छात्र-छात्राओं को भी अनुमति मिलने के बाद ही मॉर्चुरी में भेजा जाता है। उन्होंने कहा कि अगर स्कूली बच्चे वहां मौजूद रहे हैं, तो इसकी पूरी जानकारी जुटाई जाएगी।



मॉर्चुरी में प्रवेश के नियम क्या कहते हैं

मेडिको-लीगल पोस्टमॉर्टम के दौरान किसी भी अनधिकृत व्यक्ति को मॉर्चुरी या पोस्टमॉर्टम कक्ष में मौजूद रहने की अनुमति नहीं होती। उपलब्ध केंद्रीय गाइडलाइन में स्कूली बच्चों को पोस्टमॉर्टम देखने या प्रशिक्षण के लिए प्रवेश देने की कोई सामान्य अनुमति नहीं है।



MORTUARY RULES


मेडिकल कॉलेज के छात्र-छात्राओं की स्थिति अलग होती है। उन्हें शैक्षणिक प्रशिक्षण के तहत और संस्थागत व्यवस्था के अंतर्गत ही पोस्टमॉर्टम देखने की अनुमति दी जा सकती है। किसी भी व्यक्ति को सिर्फ प्रक्रिया दिखाने के लिए प्रवेश नहीं दिया जा सकता, जब तक वह नियमों के तहत अधिकृत न हो। कुछ विशेष परिस्थितियों में मृतक के परिजन को अनुमति के आधार पर बुलाया जा सकता है, लेकिन यह सामान्य प्रवेश की अनुमति नहीं है। पोस्टमॉर्टम के दौरान केवल अधिकृत स्टाफ, संबंधित डॉक्टर, विशेषज्ञ और नियमों के तहत अनुमत व्यक्ति ही मौजूद रह सकते हैं।



एक्सपर्ट कोट्स

डॉ. महेंद्र सिंह, वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी, पुलिस उन्होंने कहा कि पोस्टमॉर्टम रूम प्रतिबंधित क्षेत्र होता है और बिना अनुमति किसी को प्रवेश नहीं दिया जा सकता। उनके मुताबिक अगर छात्राएं पोस्टमॉर्टम के दौरान वहां मौजूद थीं तो यह अनुचित है।



डॉ. मनोज शुक्ला, सीएमएचओ उन्होंने बताया कि पोस्टमॉर्टम के दौरान ड्यूटी स्टाफ के अलावा कोई बाहरी व्यक्ति मौजूद नहीं रह सकता। उनके अनुसार विशेष परिस्थितियों में सिर्फ मृतक के परिजन को अनुमति के आधार पर बुलाया जाता है।



डॉ. एसपी गर्ग, डीन, मेडिकल कॉलेज उन्होंने कहा कि स्कूली बच्चों को पोस्टमॉर्टम के दौरान प्रशिक्षण देने का कोई नियम नहीं है। उनके मुताबिक इस मामले की पूरी जानकारी जुटाई जाएगी।



FAQ

  1. सतना मॉर्चुरी मामले में क्या हुआ था?
    पोस्टमॉर्टम के दौरान दो स्कूली छात्राएं करीब पौने दो घंटे मॉर्चुरी में मौजूद रहीं। स्कूल प्रबंधन ने इसकी अनुमति देने से इनकार किया है।
  2. मॉर्चुरी में प्रवेश को लेकर क्या नियम हैं?
    मेडिको-लीगल पोस्टमॉर्टम के दौरान किसी भी अनधिकृत व्यक्ति को प्रवेश की अनुमति नहीं होती। सिर्फ अधिकृत स्टाफ, संबंधित डॉक्टर और विशेष अनुमति प्राप्त व्यक्ति ही मौजूद रह सकते हैं।
  3. इस मामले में अब आगे क्या होगा?
    मेडिकल कॉलेज के डीन के मुताबिक इस मामले की पूरी जानकारी जुटाई जाएगी। स्कूल प्रबंधन ने भी नियमानुसार कार्रवाई की बात कही है।

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