SBI के पूर्व AGM की 3 करोड़ संपत्ति जब्त: हवाला और शेल कंपनी का खुलासा
समझें क्या है पूरा मामला...
- SBI अफसर की आय से 481 फीसदी ज्यादा संपत्ति, ED ने कसा शिकंजा।
- हवाला, फर्जी कंपनी, डमी डायरेक्टर को लेकर भोपाल ED की कार्रवाई।
- बैंक अफसर ने खुद बनाई शेल कंपनी, अब 3 करोड़ जब्त।
- 2.35 करोड़ नकद जमा, सबूत मांगा तो अफसर के पास कुछ नहीं।
- भोपाल में ED का बड़ा एक्शन, SBI के पूर्व AGM का पर्दाफाश।
भोपाल में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के पूर्व सहायक महाप्रबंधक अनिल कुमार जैन की 3.01 करोड़ रुपये की चल संपत्तियां अस्थायी रूप से अटैच कर दी हैं।
जांच में पाया गया कि उनकी कमाई वैध आय से 481 प्रतिशत ज्यादा थी। उन्होंने एक शेल कंपनी बनाई, उसमें डमी डायरेक्टर बिठाया और हवाला ऑपरेटरों तथा एक चार्टर्ड अकाउंटेंट की मदद से काली कमाई को वैध दिखाने की कोशिश की। 2.35 करोड़ रुपए नकद जमा के समर्थन में वे कोई सबूत नहीं दे सके। यह कार्रवाई बुधवार को PMLA 2002 के तहत की गई।
बैंक की नौकरी करते हुए करोड़ों की काली कमाई। फिर उसे छिपाने के लिए फर्जी कंपनी, हवाला और डमी डायरेक्टर का जाल। भोपाल में यह कहानी SBI के एक पूर्व अफसर की है। अब ED ने पूरा खेल बेनकाब कर दिया है।
CBI की FIR से शुरू हुई कहानी
ED ने इस मामले में जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI – Central Bureau of Investigation) की एंटी करप्शन ब्रांच, भोपाल द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। आरोप था कि अनिल कुमार जैन ने अपनी वैध आय के ज्ञात स्रोतों से बहुत ज्यादा संपत्ति अर्जित की।
जांच में पाया गया कि 1 अप्रैल 2017 से 31 दिसंबर 2018 के बीच जैन ने लगभग 3.01 करोड़ रुपये की संपत्ति बनाई। यह उनकी वैध आय से करीब 481 प्रतिशत ज्यादा थी। यानी जितना कमाना चाहिए था, उससे करीब पांच गुना ज्यादा उनके पास था।
2.35 करोड़ नकद, पर सबूत एक भी नहीं
जांच के दौरान पता चला कि अनिल कुमार जैन ने अपने और परिवार के सदस्यों के बैंक खातों में करीब 2.35 करोड़ रुपये नकद जमा कराए। जब पूछताछ हुई तो उन्होंने दावा किया कि यह पैसा अचल संपत्तियों की बिक्री से मिला था।
लेकिन इस दावे के समर्थन में वे एक भी दस्तावेज पेश नहीं कर सके। बाद में इस नकद रकम को फिक्स्ड डिपॉजिट (FDR – Fixed Deposit Receipt) में बदल दिया गया। इसके अलावा करीब 66 लाख रुपए की एफडीआर भी अनुपातहीन संपत्ति के रूप में पाई गई।
शेल कंपनी, हवाला और CA का जाल
यह मामला सिर्फ संपत्ति तक सीमित नहीं रहा। ED की जांच में सामने आया कि अनिल कुमार जैन ने कथित तौर पर हवाला ऑपरेटरों और एक चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA – Chartered Accountant) की मदद से अवैध कमाई को वैध दिखाने की कोशिश की।
इसके लिए एक्सीलेंट इन्फ्राबिल्ड प्राइवेट लिमिटेड नाम की शेल कंपनी का सहारा लिया गया। इस कंपनी के जरिये अचल संपत्तियों की बिक्री का झूठा दावा किया गया।
डमी डायरेक्टर बैठाया, कारोबार था ही नहीं
ED के अनुसार एक्सीलेंट इन्फ्राबिल्ड प्राइवेट लिमिटेड का कोई वास्तविक कारोबार नहीं था। यह महज कागजी कंपनी थी। इसके निदेशकों में शामिल अखिलेश चौधरी कथित तौर पर डमी डायरेक्टर के रूप में काम कर रहे थे। यानी उनका नाम था, काम कुछ नहीं।
ED ने स्पष्ट किया कि अटैच की गई 3.01 करोड़ रुपए की FDR राशि अपराध से अर्जित आय है। इसे प्रोसीड्स ऑफ क्राइम (Proceeds of Crime) माना गया है। आगे की जब्ती और कुर्की की कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए इसे अटैच किया गया है।
बैंक अधिकारी के लिए और बड़ी मुसीबत आ सकती है
यह कार्रवाई अभी शुरुआती कदम है। PMLA के तहत अटैचमेंट के बाद मामला विशेष PMLA कोर्ट में जाएगा। जैन को अपनी संपत्ति और आय का हिसाब देना होगा। जांच अभी जारी है और नए खुलासे होने की संभावना बनी हुई है।
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