कीमत-किराया बताए बिना 5 नंबर मार्केट की दुकान खाली कराने के दबाव से नाराज व्यापारी
Sanjay Sharma | Jun 11, 2026, 22:52 IST
Photograph: (thesootr)
BHOPAL. भोपाल के पांच नंबर मार्केट में रीडेवलपमेंट को लेकर विवाद है। हाउसिंग बोर्ड नई दुकान की कीमत बताए बिना दुकान खाली करवा रहा है। व्यापारी नाराज हैं। रजिस्ट्री खर्च भी देना होगा। 10-40 लाख बकाया है।
ऐसे समझें क्या है पूरा मामला...
नई दुकानों की साइज, किराया और रजिस्ट्री शुल्क पर विरोधाभास।
दुकानों की स्थिति स्पष्ट किए बिना खाली कराने का दबाव बनाने का आरोप।
पुरानी दुकानों के बकाया किराया जमा कराने को लेकर भी नाराजगी।
बोर्ड द्वारा तैयार नई अस्थायी दुकानों में शिफ्ट होने तैयार नहीं व्यापारी।
भोपाल के पांच नंबर मार्केट में रीडेवलपमेंट को लेकर दुकानदारों में नाराजगी है। दुकानदार मध्य प्रदेश हाउसिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट बोर्ड पर जबरदस्ती दुकानें खाली कराने का आरोप लगा रहे हैं।
दुकानदारों का कहना है बोर्ड ने रिडेवलपमेंट प्रोजेक्ट के तहत बनने वाली नई दुकानों का रेट तय नहीं किया है। दुकान लेने के लिए रजिस्ट्री और स्टाम्प ड्यूटी पर व्यापारियों को लाखों रुपए खर्च करने होंगे।
वहीं उन पर पूर्व से बकाया किराया एक साथ जमा करने का दबाव भी बनाया जा रहा है। वहीं बोर्ड के अधिकारी जमीन की कीमत, दुकान के आकार और लागत के आधार पर ही कीमत स्पष्ट करने की दलील दे रहे हैं।
डेढ़ साल पिछड़ा प्रोजेक्ट
इसके लिए करीब 50 साल पुराने मार्केट और आसपास के आवासों को तोड़कर बहुमंजिला इमारतें और कॉम्पलेक्स बनाए जाएंगे। इस पर हाउसिंग बोर्ड करीब 700 करोड़ रुपए खर्च करेगा।
रिडेवलपमेंट प्लान के तहत बोर्ड द्वारा नीचे दुकान और ऊपर बहुमंजिला इमारतों में आवास होंगे। इसके लिए करीब डेढ़ साल से बोर्ड के अधिकारी आवासों को खाली करा रहे हैं।
अब तक 80 फीसदी से ज्यादा आवास खाली हो चुके हैं। जबकि दुकानों को खाली कराना अब भी शेष है। इस वजह से प्रोजेक्ट डेढ़ साल से भी ज्यादा पिछड़ गया है।
दुकान खाली कराने में नाकाम
दुकानदारों का कहना है वे 50 साल से यहां दुकानें चला रहे हैं। बोर्ड के अधिकारी स्थिति स्पष्ट किए बिना ही उन पर दुकान खाली कराने का दबाव बना रहे हैं।
अधिकांश दुकानदारों के छोटे कारोबार हैं। इसी वजह से कई दुकानदार तो पुराना किराया ही जमा नहीं करा पाए हैं। बोर्ड ने नोटिस जारी किया है, लेकिन उसमें नई दुकानों की कीमत का उल्लेख नहीं है। ऐसे में नई दुकानों की कीमत कई गुना मंहगी होने पर वे उन्हें कैसे खरीद पाएंगे।
आकार नहीं बता रहे अफसर
बिना किसी जानकारी, किराया और कीमत निर्धारण किए एग्रीमेंट करने का दबाव बनाया जा रहा है। इससे पहले दुकानदारों को बिजली कंपनी, नगर निगम के बिलों के भुगतान और बैंक ऋण पूरा करने के निर्देश भी दिए गए हैं। यह सब लाखों रुपए में है और एक साथ जमा कर पाना उनके लिए मुश्किल है।
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