कौन हैं प्रतिमा देवी, जिन्होंने सिंधिया परिवार की संपत्ति सेटलमेंट में फंसाया नया पेच
समझें क्या है पूरा मामला...
- सिंधिया राजपरिवार की संपत्ति विवाद में नया कानूनी पेच फंसा है।
- प्रतिमा देवी ने कोर्ट में अपना हक मांगते हुए आवेदन दिया है।
- उनका दावा है कि उन्हें वैधानिक हिस्सा नहीं मिला है।
- पावर ऑफ अटॉर्नी की वैधता पर भी सवाल उठाया गया है।
- अगली सुनवाई अब 28 जुलाई को तय हुई है।
ग्वालियर के सिंधिया राजपरिवार की संपत्तियों से जुड़े पुराने विवाद को खत्म करने की कोशिश चल रही है। इसी बीच एक नया कानूनी पेच सामने आ गया है। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के परिवार से जुड़ी प्रतिमा देवी ने जिला कोर्ट में आवेदन दिया है। उनका दावा है कि संपत्ति में उन्हें उनका वैधानिक हिस्सा नहीं मिला है।
कौन हैं प्रतिमा देवी
प्रतिमा देवी ज्योतिरादित्य सिंधिया की बड़ी बुआ पद्मावती राजे की बेटी हैं। पद्मावती राजे का विवाह त्रिपुरा राजपरिवार में हुआ था। प्रतिमा देवी अकेली नहीं हैं, उनकी बहन कनिका देवी भी इस विवाद की पक्षकार हैं। सोमवार को प्रतिमा देवी की ओर से उनके परिजन जिला कोर्ट पहुंचे। उन्होंने वहां जरूरी आवेदन पेश किया।
क्या है पूरा विवाद
सिंधिया परिवार की संपत्तियों को लेकर कई अदालतों में डेढ़ दर्जन से ज्यादा मुकदमे लंबित हैं। इन विवादों को खत्म करने के लिए कई पक्षकारों ने पहल की है। इनमें ज्योतिरादित्य सिंधिया, पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और पूर्व मंत्री यशोधरा राजे शामिल हैं। इन सभी ने अदालत में समझौते से जुड़े आवेदन दाखिल किए थे। इसी बीच प्रतिमा देवी के आवेदन ने पूरी प्रक्रिया पर नया सवाल खड़ा कर दिया।
आवेदन में क्या दावा किया गया
प्रतिमा देवी ने अदालत से आग्रह किया है कि किसी भी समझौते पर फैसला लेने से पहले उनकी आपत्तियां भी सुनी जाएं। उनका कहना है कि उन्हें अब तक उनका कानूनी हिस्सा नहीं दिया गया। इसी वजह से उन्होंने कोर्ट का रुख किया है। उनका मानना है कि बिना उनकी बात सुने कोई समझौता नहीं होना चाहिए।
पावर ऑफ अटॉर्नी पर उठा सवाल
आवेदन में एक अहम आरोप भी लगाया गया है। प्रतिमा देवी का कहना है कि उनके नाम से जारी पावर ऑफ अटॉर्नी केवल 24 जून तक ही मान्य थी। इसके बावजूद बाद की प्रक्रिया में उसका इस्तेमाल किया गया है। यह आरोप पूरी सेटलमेंट प्रक्रिया की वैधता पर सवाल खड़े करता है। यदि यह आरोप सही साबित होता है तो समझौते की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
तथ्य छिपाने का भी आरोप
प्रतिमा देवी ने एक और गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि अदालत में पेश आवेदन में कुछ जरूरी तथ्य सही तरीके से नहीं बताए गए। उनके मुताबिक फैमिली सेटलमेंट से जुड़ी पूरी जानकारी भी कोर्ट के सामने नहीं रखी गई। यह आरोप मामले को और पेचीदा बना सकता है। अब कोर्ट को यह तय करना होगा कि यह दावा कितना सही है।
अब आगे क्या होगा
मामले की अगली सुनवाई अब 28 जुलाई को होगी। उस दिन कोर्ट यह तय करेगा कि प्रतिमा देवी की आपत्तियों पर किस तरह विचार किया जाए। सिंधिया राजपरिवार से जुड़े ये मामले सालों से अलग-अलग अदालतों में चल रहे हैं। ऐसे में प्रतिमा देवी का यह नया आवेदन समझौते की पूरी प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है। सभी पक्षों की नजर अब कोर्ट के अगले कदम पर टिकी है।
बड़े परिवारों के संपत्ति विवाद अक्सर लंबे समय तक चलते हैं। सिंधिया परिवार का यह मामला भी इसी की मिसाल है। कानूनी पेचीदगियां हर बार कुछ नया मोड़ ले आती हैं। फिलहाल सबकी निगाहें 28 जुलाई की सुनवाई पर हैं।
FAQ
- प्रतिमा देवी कौन हैं?
प्रतिमा देवी केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की बड़ी बुआ पद्मावती राजे की बेटी हैं। पद्मावती राजे का विवाह त्रिपुरा राजपरिवार में हुआ था। उनकी बहन कनिका देवी भी इस संपत्ति विवाद में पक्षकार हैं।
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