सरकार को घेरने भोपाल आ रहे 5 हजार से ज्यादा आदिवासी बीच रास्ते से लौटे, शिवराज की CM से बैठक के बाद बनी बात
मुख्यमंत्री से मिले 16 आदिवासी प्रतिनिधि
सीहोर जिले के कोसमी गांव में वन विभाग की कार्रवाई से आदिवासी नाराज थे। इसके विरोध में वे पैदल भोपाल आ रहे थे। गुरुवार रात सरकार से बातचीत के बाद उन्होंने अपना आंदोलन रोक दिया है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 16 आदिवासी प्रतिनिधियों से मुलाकात की है। यह बैठक मुख्यमंत्री निवास पर हुई है। इसमें केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान भी मौजूद थे। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और निर्मला बरेला भी बैठक में शामिल हुईं थी।
मुख्यमंत्री ने प्रभावित परिवारों को सिंहपुर गांव में जमीन के पट्टे देने का आश्वासन दिया है। साथ ही अधिकारियों की कार्रवाई की जांच कराने की बात कही है।
CM और शिवराज की बंद कमरे में बैठक
आदिवासी प्रतिनिधियों से मिलने से पहले तीन बड़े नेताओं की बैठक हुई थी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, शिवराज सिंह चौहान और हेमंत खंडेलवाल ने करीब एक घंटे बातचीत की थी।
इसके बाद आदिवासियों के 16 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को बुलाया गया था। प्रतिनिधियों से करीब 15 मिनट चर्चा हुई। इसमें भिलाला, बरेला, कोरकू और गोंड समाज के लोग शामिल थे।
प्रतिनिधियों ने वन विकास निगम के अधिकारियों की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है।
अधिकारियों की होगी उच्चस्तरीय जांच
बुधनी विधायक रमाकांत भार्गव ने बैठक की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने High Level Inquiry के आदेश दिए हैं।
यह जांच वन विकास निगम के अधिकारियों के व्यवहार और कार्रवाई को लेकर होगी। आदिवासियों ने कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री को मांग पत्र भेजा था।
इसके बाद सरकार और प्रशासन ने मामले पर चर्चा की है। विधायक के मुताबिक, बातचीत से प्रतिनिधिमंडल संतुष्ट हुआ है। इसके बाद पदयात्रा स्थगित करने का फैसला लिया गया।
बसों से वापस लौटे आदिवासी
बैठक के बाद विधायक रमाकांत भार्गव को बड़ी जिम्मेदारी मिली। उनके साथ सीहोर भाजपा जिला अध्यक्ष रवि मालवीय भी थे। दोनों को पैदल आ रहे आदिवासियों को समझाने के लिए भेजा गया।
कलेक्टर बालागुरु ने भी प्रदर्शनकारियों से बातचीत की। भाजपा सूत्रों के मुताबिक, सरकार ने आदिवासियों की सभी मांगें मान ली हैं।
इसके बाद आदिवासियों ने अपना प्रदर्शन मार्च रोक दिया है। प्रशासन ने उनकी वापसी के लिए बसों की व्यवस्था की है। गुरुवार रात प्रदर्शनकारी बसों से कोसमी के लिए रवाना हुए।
12 परिवारों के मकान तोड़े गए थे
यह विवाद 11 अक्टूबर से शुरू हुआ था। कोसमी गांव में वन विभाग ने कार्रवाई की थी। इस दौरान 12 आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े गए थे।
आदिवासियों का आरोप था कि उनकी फसलों को भी नुकसान पहुंचाया गया है। इसके विरोध में प्रभावित परिवार पांच दिन तक धरने पर बैठे रहे।
इसके बाद आदिवासियों ने भोपाल तक पैदल मार्च शुरू किया। आंदोलन में 5 हजार से ज्यादा लोग शामिल हुए। गुरुवार रात प्रदर्शनकारियों का जत्था कोनाझिर में रुका था।
35 से ज्यादा गांवों के लोग शामिल
इस आंदोलन में खेओनी अभयारण्य क्षेत्र के आदिवासी शामिल थे। आंदोलन से जुड़े लोगों के मुताबिक, 35 से ज्यादा गांवों से लोग पहुंचे थे।
आदिवासियों की प्रमुख मांग जमीन के पट्टे देने की थी। वे टूटे मकानों और खराब फसलों का मुआवजा भी चाहते थे। साथ ही जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे थे।
सरकार ने जमीन के पट्टे देने का भरोसा दिया है। अधिकारियों की कार्रवाई की जांच कराने का भी आश्वासन मिला है।
शिवराज ने जताई थी नाराजगी
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान पहले भी प्रभावित परिवारों से मिले थे। उन्होंने वन विभाग की कार्रवाई पर नाराजगी जताई थी।
शिवराज ने कहा था, 'मेरे क्षेत्र में जुल्म की इंतिहा हुई है। बच्चों की चीखें और महिलाओं की कराह सुनी है। मासूमों को बिलखते देखा है।'
इसके बाद यह मामला सरकार तक पहुंचा। मुख्यमंत्री निवास पर बैठक हुई और आंदोलन रोकने पर सहमति बनी।
जांच रिपोर्ट में क्या सामने आया?
इस मामले में वन विकास निगम और सीहोर कलेक्टर की जांच रिपोर्ट भी सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2021 में वन विकास निगम ने सागौन के पौधे लगाए थे। करीब 135 हेक्टेयर जमीन पर 3.37 लाख से ज्यादा पौधे लगाए गए थे।
रिपोर्ट में दावा है कि इनमें से 78 हजार 700 पौधे काट दिए गए। आरक्षित वन क्षेत्र के कंपार्टमेंट नंबर 426 में अतिक्रमण का भी दावा किया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, करीब 31.48 हेक्टेयर जमीन पर कब्जा किया गया। जांच में गूगल अर्थ की पुरानी तस्वीरों और Drone Footage का सहारा लिया गया।
रिपोर्ट में कहा गया कि 2021 तक यह जमीन खाली थी। साल 2022 से यहां झोपड़ियां बनना और खेती शुरू हुई।
फिलहाल आदिवासियों ने अपना आंदोलन स्थगित कर दिया है। अब जमीन के पट्टे देने और जांच के फैसले पर आगे की कार्रवाई होनी है।
FAQ
- सीहोर के आदिवासी भोपाल क्यों आ रहे थे?
कोसमी गांव में 12 परिवारों के मकान तोड़े जाने और फसलों को नुकसान पहुंचने के विरोध में आदिवासी भोपाल आ रहे थे। - आदिवासियों को जमीन के पट्टे कहां मिलेंगे?
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रभावित परिवारों को सिंहपुर गांव में जमीन के पट्टे देने का आश्वासन दिया है। - आदिवासियों के आंदोलन में कितने लोग शामिल थे?
आंदोलन में 35 से ज्यादा गांवों के 5 हजार से अधिक आदिवासी शामिल हुए थे। - मुख्यमंत्री और शिवराज सिंह चौहान के बीच कितनी देर बैठक हुई?
मुख्यमंत्री मोहन यादव, शिवराज सिंह चौहान और हेमंत खंडेलवाल के बीच करीब एक घंटे बंद कमरे में चर्चा हुई।