अनुपूरक बजट से पहले विभागों को झटका! नई गाड़ियों पर रोक, सरकार की सख्ती
समझें क्या है पूरा मामला...
- अनुपूरक बजट 20 जुलाई से शुरू होने वाले मानसून सत्र में पेश होगा।
- नए वाहनों की खरीद के लिए अतिरिक्त राशि नहीं मिलेगी।
- अतिरिक्त वित्तीय बोझ वाली नई योजनाओं पर रोक के संकेत।
- विभागों को 22 जून तक प्रस्ताव भेजने होंगे।
- अतिरिक्त मांगों के लिए ठोस औचित्य बताना जरूरी होगा।
- 80 वर्ष पूर्ण करने वाले पेंशनरों को अगले माह से 20 प्रतिशत अतिरिक्त पेंशन मिलेगी।
मध्यप्रदेशविधानसभा के मानसून सत्र में पेश होने वाले वर्ष 2026-27 के पहले अनुपूरक बजट से पहले ही सरकार ने अपने इरादे साफ कर दिए हैं। वित्त विभाग ने संकेत दिए हैं कि न तो नए वाहनों की खरीद के लिए अतिरिक्त राशि मिलेगी और न ही ऐसी नई योजनाओं को हरी झंडी दी जाएगी, जिनसे राज्य के खजाने पर अतिरिक्त बोझ बढ़े। ऐसे में अतिरिक्त बजट की आस लगाए बैठे कई विभागों को निराशा हाथ लग सकती है।
22 जून तक मांगे गए प्रस्ताव, लेकिन शर्तों के साथ
वित्त विभाग ने सभी विभागों से 22 जून तक अनुपूरक बजट के प्रस्ताव भेजने को कहा है। हालांकि, इस बार प्रस्ताव भेजना आसान नहीं होगा, क्योंकि हर मांग के पीछे ठोस औचित्य साबित करना पड़ेगा।
मूल बजट तैयार करते समय योजनाओं की समीक्षा किए जाने का हवाला देते हुए विभागों को यह संदेश भी दिया गया है कि अतिरिक्त राशि की मांग अपवाद की स्थिति में ही की जाए।
इन मदों पर लगभग बंद हो गए दरवाजे
सरकार के निर्देशों के मुताबिक...
- नए वाहन खरीदने के लिए अतिरिक्त बजट नहीं मिलेगा।
- राज्य के संसाधनों पर नया वित्तीय बोझ डालने वाली योजनाओं को मंजूरी नहीं दी जाएगी।
- पहले से संचालित योजनाओं के लिए अतिरिक्त राशि की मांगों की भी कड़ी जांच होगी।
- किन प्रस्तावों को मिल सकती है राहत?
हालांकि, सरकार ने सख्ती दिखाई है, लेकिन कुछ मामलों में अतिरिक्त प्रावधान की संभावना बनी हुई है।
इनमें शामिल हैं...
- आकस्मिकता निधि से पहले स्वीकृत प्रस्ताव,
- केंद्र प्रायोजित योजनाओं के लिए आवश्यक अतिरिक्त राशि,
- विशेष पूंजीगत सहायता योजना से जुड़े प्रस्ताव,
- वित्त विभाग की पूर्व सहमति प्राप्त प्रकरण।
आखिर इतनी सख्ती क्यों?
वित्त विभाग का कहना है कि वर्ष 2026-27 का मूल बजट शून्य आधारित बजट प्रणाली और रोलिंग बजट अनुमान के आधार पर तैयार किया गया था।
यानी प्रत्येक योजना की अलग-अलग समीक्षा कर जरूरत के अनुसार राशि तय की गई थी। ऐसे में अब अतिरिक्त बजट मांगने वाले विभागों को यह साबित करना होगा कि उनकी आवश्यकता वास्तव में अपरिहार्य है।
क्या सीमित संसाधनों का दबाव है वजह?
सरकारी स्तर पर इसे वित्तीय अनुशासन का हिस्सा बताया जा रहा है, लेकिन प्रशासनिक हलकों में इस फैसले को संसाधनों के सीमित दायरे में खर्चों को नियंत्रित करने की रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है। अब निगाहें इस बात पर होंगी कि सरकार आखिर किन क्षेत्रों को प्राथमिकता देती है और किन मांगों को ठंडे बस्ते में डाल देती है।
पेंशन को लेकर भी सरकार ने साफ किया रुख
वित्त विभाग ने 80 वर्ष की आयु पूरी करने वाले पेंशनरों को मिलने वाली 20 प्रतिशत अतिरिक्त पेंशन के संबंध में भी स्थिति स्पष्ट कर दी है।
विभागों के बीच इस बात को लेकर भ्रम था कि लाभ 80वें वर्ष में प्रवेश करते ही मिलेगा या 80 वर्ष पूर्ण होने के बाद।
अब यही होगा नियम...
हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ के फैसले के अनुरूप-
- 80 वर्ष की आयु पूर्ण होने के बाद,
- अगले माह से, संबंधित पेंशनर को 20 प्रतिशत अतिरिक्त पेंशन का लाभ दिया जाएगा।
- विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि इस प्रावधान का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए।
अब सबसे बड़ा सवाल
क्या यह केवल वित्तीय अनुशासन है या फिर सीमित संसाधनों के बीच सरकार की मजबूरी? अनुपूरक बजट के सामने आने के बाद ही साफ हो पाएगा कि आखिर राहत किसे मिली और इंतजार किसके हिस्से आया।
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