ट्रांसफर सीजन के बीच प्रभार सूची ने बढ़ाई हलचल, वरिष्ठता-चयन प्रक्रिया पर सवाल
Ramanand Tiwari | Jun 16, 2026, 16:00 IST
ट्रांसफर सीजन के बीच प्रभार सूची ने बढ़ाई हलचल
लोक निर्माण विभाग में प्रभार आदेशों और ट्रांसफर-रिन्यूअल को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। वरिष्ठता सूची की अनदेखी कर जूनियर अफसरों को बड़ी जिम्मेदारी देने और रिटायर्ड इंजीनियर के कथित दखल से पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।
लोक निर्माण विभाग (PWD) में इन दिनों प्रभार आदेश चर्चा का विषय बना हुआ है। इसके अलावा ट्रांसफर, रिन्यूअल और कथित सामंजस्य की समानांतर व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
हाल में जारी प्रभार सूची के बाद विभागीय गलियारों में यह चर्चा तेज है कि, जिम्मेदारियों के बंटवारे में वरिष्ठता से ज्यादा अन्य कारक प्रभावी रहे। ऐसे में यह मामला महज प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि पारदर्शिता और जवाबदेही की कसौटी पर भी खड़ा नजर आ रहा है।
विभाग में हाल ही में हुए बड़े पैमाने के प्रभार आदेशों ने कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं। असिस्टेंट इंजीनियर से लेकर कार्यपालन यंत्री और अधीक्षण यंत्री स्तर तक, जिम्मेदारियों के पुनर्वितरण के दौरान वरिष्ठता सूची के पालन को लेकर आपत्तियां सामने आई हैं।
विभागीय सूत्रों का दावा है कि पूरी प्रक्रिया को केवल नियमित प्रशासनिक कवायद मानना जल्दबाजी होगी। वहीं चयन के मानदंडों को लेकर भी अंदरखाने चर्चाएं तेज हैं।
सूत्रों के अनुसार अधीक्षण यंत्री स्तर के प्रभार में वर्ष 2007 और 2010 बैच के कुछ अधिकारियों को अपेक्षित प्राथमिकता नहीं मिली। इसके विपरीत वर्ष 2011 बैच के अधिकारियों को महत्वपूर्ण दायित्व दिए जाने की चर्चा है।
यदि ऐसा हुआ है तो सवाल यह उठता है कि वरिष्ठता सूची का महत्व आखिर कितना बचा है? क्योंकि यही सूची भविष्य की पदोन्नति व्यवस्था की आधारशिला मानी जाती है।
प्रमुख अभियंता (ENC) स्तर पर लिए गए निर्णयों को लेकर भी विभाग के भीतर सवाल उठ रहे हैं। चर्चा है कि वरिष्ठता सूची में आगे मौजूद अधिकारियों को दरकिनार कर आर.एल. वर्मा को प्रभारी प्रमुख अभियंता की जिम्मेदारी दी गई। वहीं चयन प्रक्रिया को लेकर विभागीय हलकों में असहमति दिखाई दे रही है।
सूत्रों का दावा है कि कुछ अधिकारियों के खिलाफ आर्थिक अनियमितताओं और प्रशासनिक निर्णयों से जुड़ी जांच प्रक्रियाएं लंबित हैं। इसके बावजूद उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपे जाने की चर्चा विभाग में बनी हुई है।
हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। साथ ही विभाग की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया भी सामने नहीं आई है।
बताया जाता है कि वित्तीय स्वीकृतियों से जुड़े कुछ मामलों पर पहले भी सवाल उठ चुके हैं। इनकी गूंज विधानसभा तक सुनाई दी थी।
इसके बावजूद सार्वजनिक स्तर पर किसी ठोस कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है। यदि आरोप सही हैं तो जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
पीडब्ल्यूडी में इन दिनों खूब चल रही है कि एक रिटायर्ड इंजीनियर अब भी विभाग के कामकाज में सक्रिय दखल रखे हुए है।
विभाग के लोगों के बीच ऐसी बातें हो रही हैं कि प्रभार और पदस्थापना से जुड़े कुछ फैसलों में उसका प्रभाव नजर आता है। हालांकि इन चर्चाओं और दावों की किसी भी स्तर पर आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
विभाग के भीतर सबसे ज्यादा चर्चा ट्रांसफर और रिन्यूअल प्रक्रिया को लेकर है। सूत्रों का कहना है कि जो इंजीनियर अपने वर्तमान जिलों में बने रहना चाहते हैं, उनके बीच सामंजस्य स्थापित कराने की कोशिशें कुछ प्रभावशाली व्यक्तियों के जरिए की जा रही हैं।
यदि इन चर्चाओं में सच्चाई है, तो यह केवल पदस्थापन का मामला नहीं रहेगा, बल्कि प्रशासनिक निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्नचिह्न भी खड़े करेगा।
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हाल में जारी प्रभार सूची के बाद विभागीय गलियारों में यह चर्चा तेज है कि, जिम्मेदारियों के बंटवारे में वरिष्ठता से ज्यादा अन्य कारक प्रभावी रहे। ऐसे में यह मामला महज प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि पारदर्शिता और जवाबदेही की कसौटी पर भी खड़ा नजर आ रहा है।
क्या केवल प्रशासनिक जरूरत थी या कुछ और?
विभागीय सूत्रों का दावा है कि पूरी प्रक्रिया को केवल नियमित प्रशासनिक कवायद मानना जल्दबाजी होगी। वहीं चयन के मानदंडों को लेकर भी अंदरखाने चर्चाएं तेज हैं।
वरिष्ठता सूची पर क्यों उठ रहे सवाल?
यदि ऐसा हुआ है तो सवाल यह उठता है कि वरिष्ठता सूची का महत्व आखिर कितना बचा है? क्योंकि यही सूची भविष्य की पदोन्नति व्यवस्था की आधारशिला मानी जाती है।
प्रमुख अभियंता स्तर पर भी असंतोष
जांच के साए में जिम्मेदारियां?
हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। साथ ही विभाग की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया भी सामने नहीं आई है।
विधानसभा तक पहुंचे मामले, फिर भी कार्रवाई का इंतजार
इसके बावजूद सार्वजनिक स्तर पर किसी ठोस कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है। यदि आरोप सही हैं तो जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
रिटायर्ड इंजीनियर की कथित भूमिका चर्चा में
विभाग के लोगों के बीच ऐसी बातें हो रही हैं कि प्रभार और पदस्थापना से जुड़े कुछ फैसलों में उसका प्रभाव नजर आता है। हालांकि इन चर्चाओं और दावों की किसी भी स्तर पर आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
ट्रांसफर और रिन्यूअल में सामंजस्य की चर्चाएं
यदि इन चर्चाओं में सच्चाई है, तो यह केवल पदस्थापन का मामला नहीं रहेगा, बल्कि प्रशासनिक निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्नचिह्न भी खड़े करेगा।
- प्रभार आदेशों के बाद विभाग में नई चर्चाओं का दौर।
- वरिष्ठता सूची के पालन पर उठ रहे सवाल।
- 2007 और 2010 बैच की अनदेखी के दावे।
- जांच झेल रहे अधिकारियों को जिम्मेदारी मिलने की चर्चा।
- प्रमुख अभियंता स्तर के चयन पर भी असंतोष।
- ट्रांसफर और रिन्यूअल में सामंजस्य के आरोप।
- रिटायर्ड इंजीनियर की कथित भूमिका चर्चा में।
जवाब मांगते सवाल
- यदि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी है तो चयन के मानदंड सार्वजनिक क्यों नहीं किए जाते?
- यदि वरिष्ठता सूची मौजूद है तो उससे अलग निर्णयों का आधार क्या है?
- यदि ट्रांसफर तथा रिन्यूअल प्रक्रिया में किसी तरह का बाहरी प्रभाव नहीं है, तो विभाग को इन चर्चाओं पर स्पष्ट स्थिति सामने रखनी चाहिए।
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