क्या है डिमेंशिया बीमारी, जिससे पीड़ित थे मशहूर शायर बशीर बद्र

Anjali Dwivedi | May 28, 2026, 15:58 IST
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उर्दू के मशहूर शायर डॉ. बशीर बद्र का 91 वर्ष की उम्र में भोपाल में निधन हो गया। वे लंबे समय से डिमेंशिया (भूलने की बीमारी) से पीड़ित थे। उनके जाने से साहित्य जगत में गहरा शोक है।

उर्दू अदब की दुनिया से एक बेहद खूबसूरत और प्यारी आवाज हमेशा के लिए खामोश हो गई है। मशहूर और लोकप्रिय शायर डॉ. बशीर बद्र का 91 साल की उम्र में निधन हो गया है। उन्होंने मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में स्थित अपने घर पर अंतिम सांस ली। उनके जाने की खबर मिलते ही पूरी दुनिया के प्रशंसकों में शोक की लहर दौड़ गई।



लंबे समय से डिमेंशिया बीमारी से थे पीड़ित

डॉ. बशीर बद्र साहब काफी लंबे समय से डिमेंशिया यानी भूलने की बीमारी से पीड़ित चल रहे थे। इस गंभीर बीमारी की वजह से वह अपने करीबियों को भी नहीं पहचान पाते थे। बढ़ती उम्र और बीमारी के कारण वह पिछले कई सालों से सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूर थे। डॉक्टरों की देखरेख में भोपाल के घर पर ही उनका इलाज लगातार चल रहा था।



डिमेंशिया क्या है?

डिमेंशिया कोई अकेली बीमारी नहीं है, बल्कि दिमागी कमजोरी से जुड़े कई लक्षणों का एक ग्रुप है। इसमें इंसान की याददाश्त कमजोर होने लगती है और उसे सोचने-समझने, फैसला लेने या ध्यान लगाने में काफी परेशानी आती है। यह समस्या ज्यादातर 65 साल से अधिक उम्र के बुजुर्गों में देखने को मिलती है।



डिमेंशिया के मुख्य लक्षण

इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति के बर्ताव और काम करने के तरीके में धीरे-धीरे बदलाव आने लगता है। इसके कुछ बड़े लक्षण नीचे दिए गए हैं:



  • याददाश्त कमजोर होना: हाल ही में हुई बातें या घटनाएं बहुत जल्दी भूल जाना, लेकिन पुरानी बातें याद रहना।
  • भ्रम या उलझन होना: जानी-पहचानी जगहों पर भी रास्ता भूल जाना या दिन, तारीख और समय को न समझ पाना।
  • बातचीत में दिक्कत: बोलते समय सही शब्द न ढूंढ पाना या अपनी बात कहते-कहते अचानक अटक जाना।
  • रोजमर्रा के काम न कर पाना: नहाना, कपड़े पहनना या खाना बनाने जैसे आसान और खुद के काम करने में भी परेशानी होना।
  • स्वभाव बदलना: बिना बात के अचानक गुस्सा आ जाना, चिड़चिड़ापन होना या अपना भरोसा खो देना।

डिमेंशिया के प्रकार

दिमाग में होने वाली अलग-अलग दिक्कतों की वजह से डिमेंशिया कई तरह का हो सकता है-



  • अल्जाइमर रोग: डिमेंशिया के 60 से 80 प्रतिशत मामले इसी बीमारी के होते हैं। इसमें समय के साथ याददाश्त धीरे-धीरे पूरी तरह खत्म हो जाती है।
  • वैस्कुलर डिमेंशिया: यह तब होता है जब दिमाग तक खून पहुंचाने वाली नसें ब्लॉक हो जाती हैं या मरीज को कभी ब्रेन स्ट्रोक आया हो।
  • लेवी बॉडी डिमेंशिया: इसमें सोचने-समझने में दिक्कत होने के साथ-साथ शरीर की मांसपेशियां अकड़ जाती हैं और इंसान को ऐसी चीजें दिखने लगती हैं जो असल में होती ही नहीं (मतिभ्रम)।

कारण और बचाव

बढ़ती उम्र इसका सबसे बड़ा कारण है, लेकिन इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं कि यह हर बुजुर्ग को होगा। विटामिन बी-12 की कमी, बहुत ज्यादा शराब पीना, सिर में गंभीर चोट लगना या दिमाग में कोई इन्फेक्शन होना भी इसके कारण हो सकते हैं, जिनका इलाज मुमकिन है।



साहित्य जगत की अमूल्य धरोहर हैं उनकी किताबें

डॉ. बशीर बद्र ने हिंदी और उर्दू भाषा में कई प्रसिद्ध किताबें लिखी हैं। हिंदी भाषा में उनके एक दर्जन से ज्यादा गजल संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। इसके अलावा उर्दू भाषा में भी उनके सात बड़े गजल संग्रह बाजार में मौजूद हैं। उनकी लिखी किताबें आज भी साहित्य जगत की एक अमूल्य धरोहर मानी जाती हैं।



शायरी का एक सुनहरा और यादगार दौर खत्म

शायर बशीर बद्र के परिवार में उनकी पत्नी डॉ. राहत और बेटा तैयब शामिल हैं। उनके निधन के साथ ही उर्दू शायरी का एक सुनहरा और यादगार दौर खत्म हो गया। भले ही वह हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी शायरी हमेशा जिंदा रहेगी। आने वाली पीढ़ियां भी उनके लिखे शेरों से मोहब्बत का हुनर सीखती रहेंगी।



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