भरे मंच पर मंत्री सीताराम आदिवासी से भिड़ी लेडी TI यास्मीन खान, इस बात पर दिया करारा जवाब
News In Short
- मध्यप्रदेश के श्योपुर में अन्नपूर्णा माता मेले का समापन कार्यक्रम हुआ।
- दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री सीताराम आदिवासी ने मंच से लेडी टीआई को फटकारा।
- उन्होंने मेले में अव्यवस्था और जातिवाद का आरोप टीआई पर लगाया।
- कराहल थाने की महिला टीआई यास्मीन खान ने माइक थामकर जवाब दिया।
- उन्होंने कहा, पर्सनल दुश्मनी के लिए पूरे पुलिस प्रशासन को दोषी कहना उचित नहीं।
News In Detail
मेले के मंच पर हुई तकरार
मध्यप्रदेश के श्योपुर जिले में पनवाड़ा गांव स्थित प्राचीन अन्नपूर्णा माता मंदिर पर हर साल एक बड़ा मेला लगता है। इस बार मेले के समापन कार्यक्रम में जो हुआ, वह सबको हैरान कर गया।
दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री और भाजपा (BJP - Bharatiya Janata Party) के पूर्व विधायक सीताराम आदिवासी मंच पर मौजूद थे। उनके साथ कराहल थाने की महिला टीआई यास्मीन खान भी मंच पर बैठी थीं।
मंत्री ने मंच से ही टीआई को घेरा
मंत्री सीताराम आदिवासी मेले में सुरक्षा और व्यवस्थाओं की कमी को लेकर नाराज थे। उन्होंने मंच से ही टीआई यास्मीन खान पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मेले में श्रद्धालुओं को असुविधा हुई और सुरक्षा व्यवस्था ठीक नहीं रही।
बात यहीं नहीं रुकी। मंत्री ने टीआई की ओर इशारा करते हुए कहा कि फालतू नाटक नहीं करें। ऐसे टीआई कई चले गए। जातिवाद कर रहे हैं आप। जब से ये टीआई साहब आए हैं, तब से घटनाएं हो रही हैं। इतने बड़े मंच पर इस तरह की बात सुनकर वहां बैठे लोग सकते में आ गए।
टीआई यास्मीन खान ने थाम लिया माइक
मंत्री के आरोपों का जवाब देने के लिए टीआई यास्मीन खान भी चुप नहीं रहीं। उन्होंने मंच से ही माइक अपने हाथ में लिया और सीधे जवाब दिया। उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि यहां बैठे एक या दो लोगों को छोड़ दें तो हमसे किसी को कोई शिकायत नहीं होगी। यदि किसी को शिकायत है तो अपना हाथ ऊपर करें।
यह सुनकर मंच पर मौजूद लोग हैरान रह गए। किसी को उम्मीद नहीं थी कि एक पुलिस अधिकारी इस तरह सीधे जवाब देंगी।
पर्सनल दुश्मनी के लिए पुलिस को दोष मत दो
यास्मीन खान ने आगे कहा कि उनके स्टाफ ने सुबह से शाम तक धूप में भूखे रहकर ड्यूटी की है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अपने पर्सनल हित के लिए, पर्सनल दुश्मनी के लिए पूरे स्टाफ और पूरे पुलिस प्रशासन को दोषी कहना कहीं से भी उचित नहीं है।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई पर्सनल हित के लिए मंत्री के कान भरता है तो यह बात ठीक नहीं है। टीआई के इस साफ और कड़े जवाब ने मंच पर बैठे सभी लोगों का ध्यान खींच लिया।
अपनी ही पार्टी में उपेक्षित हैं सीताराम आदिवासी
खास बात यह भी है कि राज्यमंत्री का दर्जा प्राप्त सीताराम आदिवासी अपनी ही पार्टी में कई बार उपेक्षित महसूस कर चुके हैं। वे पहले भी पार्टी में अनदेखी और अधिकारियों की उपेक्षा की शिकायत कर चुके हैं। इस बार भी उन्हें शायद उम्मीद नहीं थी कि टीआई इस तरह मंच पर ही पलटवार करेंगी।
यह मामला अब राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।
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