आखिर क्या है 113 करोड़ के शिवपुरी सीवर प्रोजेक्ट की इनसाइड स्टोरी, जिस पर उखड़ गए सिंधिया?
समझें क्या है पूरा मामला...
- शिवपुरी सीवर प्रोजेक्ट पर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया नाराज हुए हैं।
- 69 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट पर अब तक 113 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं।
- 14 साल बाद भी सीवर प्रोजेक्ट का काम पूरा नहीं हो पाया है।
- सिंधिया ने निर्माण कार्यों में गड़बड़ी और भ्रष्टाचार का सीधा आरोप लगाया है।
- अब प्रोजेक्ट की कमान एमपी अर्बन डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन को सौंपी जाएगी।
शिवपुरी शहर के सीवर प्रोजेक्ट को लेकर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया खुलकर नाराज हुए हैं। यह प्रोजेक्ट शहर में साफ सफाई और गंदे पानी की निकासी के लिए मंजूर हुआ था। शुरुआत में इसकी लागत सिर्फ 69 करोड़ रुपए तय की गई थी। वहीं, 14 साल बीत जाने के बाद भी यह काम पूरा नहीं हो पाया है।
अब तक इस प्रोजेक्ट पर 113 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं, फिर भी शहर को पूरी सुविधा नहीं मिल पाई है। सिंधिया ने मीडिया से बातचीत में इस पूरे मामले में हुई अनियमितताओं और भ्रष्टाचार पर सीधा सवाल उठाया है।
कब शुरू हुई थी यह योजना
शिवपुरी शहर के लिए सीवर प्रोजेक्ट की योजना साल 2011-12 में (करीब 14 साल पहले) बनी थी। उस समय इसे शहर की बड़ी जरूरत माना गया था। शहर में गंदे पानी की सही निकासी नहीं हो रही थी। इसी समस्या को दूर करने के लिए सीवर लाइन बिछाने का काम शुरू हुआ था।
उस वक्त इसका बजट करीब 69 करोड़ रुपए रखा गया था और इसे पौने दो साल (21 महीने) में पूरा करना था। वहीं, हद तो यह है कि लगभग 14 साल बीत जाने के बाद भी यह काम अधूरा ही पड़ा है।
वहीं, समय बीतने के साथ यह खर्च लगातार बढ़ता चला गया। 13 साल में ही यह राशि बढ़कर 111 करोड़ रुपए तक पहुंच गई थी। वहीं, अब यह खर्च राशि 113 करोड़ हो गई है। इसके बाद भी काम पूरी तरह से खत्म नहीं हो सका।
कहां अटका हुआ है काम
अब तक कुल 113 करोड़ रुपए इस प्रोजेक्ट पर खर्च हो चुके हैं। इतनी बड़ी रकम खर्च होने के बावजूद शहर के हर हिस्से में सीवर लाइन नहीं पहुंच पाई है। कई इलाकों में अभी भी सीवर कनेक्टिविटी अधूरी है। इससे शहर के लोगों को पुरानी समस्या से अब भी जूझना पड़ रहा है। लंबे समय से चल रहे इस प्रोजेक्ट की धीमी रफ्तार पर सवाल उठते रहे हैं। सिंधिया ने साफ कहा है कि इतने पैसे खर्च होने के बाद भी काम अधूरा रहना गंभीर लापरवाही है।
सिंधिया ने क्यों जताई नाराजगी
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इस मुद्दे पर सीधे तौर पर निर्माण एजेंसियों को घेरा है। उन्होंने कहा कि सीवर प्रोजेक्ट में साफ तौर पर अनियमितता हुई है। उनका कहना है कि इतनी बड़ी रकम खर्च होने के बाद भी नतीजा जनता के सामने नहीं है। सिंधिया ने इसे सीधे भ्रष्टाचार से जोड़ा है।
उन्होंने मीडिया से बातचीत में इस पूरे मामले पर खुलकर अपनी बात रखी। उनका कहना है कि जनता के पैसों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। इससे साफ है कि आने वाले समय में जांच और सख्ती दोनों बढ़ सकती हैं।
दादा के जमाने की याद आई सिंधिया को
बातचीत के दौरान सिंधिया ने अपने दादा माधव महाराज प्रथम के दौर का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि उनके दादा के समय शिवपुरी में 15 किलोमीटर सीवर लाइन बिछाई गई थी। खास बात यह है कि उस पुरानी लाइन का सात किलोमीटर हिस्सा आज भी चालू है।
सिंधिया ने इस तुलना के जरिए मौजूदा प्रोजेक्ट की खामियों को उजागर किया है। उनका इशारा साफ था कि पुराने समय में हुआ काम आज भी टिकाऊ है। जबकि नया प्रोजेक्ट दोगुने से ज्यादा पैसा खर्च होने पर भी अधूरा है। इस तुलना ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है।
पीएचई और नगर पालिका पर सवाल
इस पूरे प्रोजेक्ट में पीएचई (Public Health Engineering) विभाग और नगर पालिका की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। दोनों एजेंसियां मिलकर इस प्रोजेक्ट पर काम कर रही थीं। वहीं 113 करोड़ रुपए खर्च होने के बाद भी सीवर प्रोजेक्ट पूरा नहीं हो पाया।
इससे साफ है कि निगरानी और तालमेल में कहीं न कहीं कमी रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि काम की गुणवत्ता पर भी ध्यान नहीं दिया गया। बार-बार पैसा खर्च होने के बावजूद स्थाई समाधान नहीं मिल सका।
अब किसे मिलेगी प्रोजेक्ट की कमान
अब इस प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी बदलने की तैयारी है। सरकार ने तय किया है कि अब इसकी कमान एमपी अर्बन डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (Madhya Pradesh Urban Development Corporation) को सौंपी जाएगी। उम्मीद जताई जा रही है कि नई एजेंसी के आने से काम में तेजी आएगी।
साथ ही निगरानी व्यवस्था भी पहले से बेहतर होगी। शहर के लोग लंबे समय से इस बदलाव का इंतजार कर रहे थे। उनका कहना है कि अब तक की देरी से आम जनता को ही सबसे ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ी है।
जनता झेल रही है लंबे समय से परेशानी
शिवपुरी के लोग इस अधूरे सीवर प्रोजेक्ट से काफी समय से परेशान हैं। गंदे पानी की निकासी सही तरीके से न होने से कई इलाकों में दिक्कत बनी रहती है। सड़कों पर बार बार खुदाई होने से भी लोगों को असुविधा झेलनी पड़ी है। लंबे समय तक अधूरा काम शहर की बुनियादी सुविधाओं पर सीधा असर डालता है।
अब केंद्रीय मंत्री के हस्तक्षेप के बाद उम्मीद जगी है कि यह मामला जल्दी सुलझेगा। स्थानीय लोगों की मांग है कि जिम्मेदार अफसरों और ठेकेदारों पर सख्त कार्रवाई हो। साथ ही बचा हुआ काम जल्द से जल्द पूरा किया जाए।
ये खबरें भी पढ़िए...
जिन छात्रों को व्यापमं घोटाला में बर्खास्त किया, उन्हें ही चुपचाप बांट दी डिग्री
मध्य प्रदेश व्यापमं घोटाला, 122 आरोपियों पर 10 साल बाद होंगे आरोप तय, जानें क्या है पूरा मामला...
व्यापमं, जमीन और अब चावल घोटाला: मल्लिकार्जुन खड़गे ने MP को बताया भ्रष्टाचार का केंद्र