सिंधिया संपत्ति विवाद: प्रतिमा देवी पहली बार कोर्ट पहुंचीं, वसीयत न दिखाने पर सवाल
समझें क्या है पूरा मामला
- सिंधिया परिवार की पैतृक संपत्ति का विवाद लंबे समय से कोर्ट में है।
- ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी तीन बुआओं के बीच मामला चला है।
- बड़ी बुआ पद्मावती राजे की बेटी प्रतिमा देवी भी मामले से जुड़ी हैं।
- प्रतिमा देवी ने समझौते और अपने अधिकारों पर सवाल उठाए हैं।
- अब कोर्ट में उनके दावे पर आगे सुनवाई होनी है।
सिंधिया परिवार की संपत्ति के बंटवारे में मंगलवार को नया मोड़ आया है। इस बार खुद प्रतिमा देवी राणा कोर्ट में पेश हुईं। वह ग्वालियर जिला अदालत पहुंचीं। उनके साथ बेटी शिवांगनी और दामाद भी मौजूद थे। प्रतिमा देवी करीब डेढ़ घंटे तक अदालत में रहीं। उनकी मौजूदगी ने पूरे मामले को नई दिशा दे दी। प्रतिमा देवी केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की बड़ी बुआ हैं। वह स्वर्गीय पद्मावती राजे सिंधिया की बेटी हैं। पद्मावती राजे जीवाजीराव सिंधिया और विजयाराजे सिंधिया की बेटी थीं।
तीन बहनों के वकील कोर्ट पहुंचे
सुनवाई के दौरान एक और अहम घटनाक्रम सामने आया। वसुंधरा राजे, यशोधरा राजे और ऊषा राजे के वकील अदालत पहुंचे। वकील प्रशांत शर्मा ने कोर्ट में अपना पक्ष रखा। अदालत ने उनसे तुरंत बहस शुरू करने को कहा। वकील ने इसके लिए कुछ समय मांगा। उन्होंने कहा कि वे अभी बहस के लिए तैयार नहीं हैं। इसके बाद अदालत ने प्रतिमा देवी का पक्ष सुना। यहीं उन्होंने अपने दावे की मुख्य वजह बताई।
प्रतिमा देवी ने जज से कहा- वसीयत नहीं दिखाई गई
प्रतिमा देवी ने कोर्ट के सामने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि उन्हें वसीयत की जानकारी नहीं दी गई। उनके मुताबिक, राजमाता विजयाराजे की वसीयत भी उनके पास नहीं है। उन्होंने मुंबई कोर्ट में मौजूद एक कॉपी का जिक्र किया। उनका कहना है कि उस कॉपी से उन्हें कुछ जानकारी मिली। प्रतिमा देवी का कहना है कि उन्हें बराबर अधिकार मिलना चाहिए। उन्होंने अपनी तीन छोटी बहनों का भी नाम लिया। इनमें ऊषा राजे, वसुंधरा राजे और यशोधरा राजे शामिल हैं। प्रतिमा देवी ने अपने हिस्से पर भी दावा जताया।
पुराने पते पर भेजा नोटिस
प्रतिमा देवी ने कोर्ट में नोटिस का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि नोटिस नेपाल के नेपालगंज पते पर भेजे गए। उनका कहना है कि वह वहां नहीं रहती हैं। उन्होंने बताया कि वह करीब 20 साल से काठमांडू में रह रही हैं। उनका निवास पशुपतिनाथ मंदिर के पास बताया गया है। प्रतिमा देवी के मुताबिक, नोटिस उन्हें कभी मिले ही नहीं। उन्होंने कहा कि जरूरी कागजात भी उन्हें नहीं मिले। इसी आधार पर उन्होंने खुद को एक्स पार्टी बनाए जाने पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि उन्हें अपनी बात रखने का मौका ही नहीं मिला।
परिवार ने नहीं दी जानकारी
प्रतिमा देवी ने कहा कि उन्हें मामले की जानकारी बाद में मिली। उनके मुताबिक, यह जानकारी उन्हें दूसरे स्रोतों से मिली। उन्होंने कहा कि परिवार की ओर से कोई सूचना नहीं दी गई। उन्होंने इसमें ज्योतिरादित्य सिंधिया का भी नाम लिया। साथ ही उन्होंने अपनी तीनों छोटी बहनों का जिक्र किया। उनका कहना है कि वह लंबे समय तक अनजान रहीं। अब वह अदालत में अपना अधिकार रखना चाहती हैं।
मां के हिस्से पर दावा
प्रतिमा देवी ने अपनी मां के अधिकार का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पद्मावती राजे जीवाजीराव सिंधिया की बेटी थीं। इसी वजह से वह अपनी मां का हिस्सा चाहती हैं। अदालत अब सभी पक्षों की बात सुनकर आगे बढ़ेगी।
पुराना है यह विवाद
सिंधिया परिवार की संपत्ति को लेकर विवाद काफी पुराना है। यह मामला कई साल से अदालत में चल रहा है। वसुंधरा राजे, यशोधरा राजे और ऊषा राजे भी इसमें पक्षकार हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया भी इस विवाद में प्रमुख पक्ष हैं। हाल में परिवार के बीच समझौते की कोशिश हुई थी। यह समझौता कोर्ट के सामने भी रखा गया। इसी दौरान प्रतिमा देवी की आपत्ति सामने आई। इसके बाद मामले की कानूनी तस्वीर फिर बदल गई। जुलाई की सुनवाई में बड़ी संख्या में दस्तावेज कोर्ट पहुंचे थे। मामले से जुड़े करीब 1000 पन्नों के रिकॉर्ड भी पेश हुए थे। अदालत ने रिकॉर्ड की जांच आगे भी जारी रखने को कहा था।
17 अगस्त को भी बढ़ा विवाद
17 अगस्त को प्रतिमा देवी की आपत्ति पर सुनवाई हुई थी। उस दिन ज्योतिरादित्य सिंधिया की ओर से जवाब पेश हुआ। वसुंधरा राजे और यशोधरा राजे की ओर से भी जवाब आए। जवाब में प्रतिमा देवी के दावे पर सवाल उठाए गए। उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग भी सामने आई थी। इसके बाद अदालत ने 25 अगस्त की तारीख तय की थी। मंगलवार की सुनवाई इसी अगली कड़ी में हुई।
दस सितंबर को अगली सुनवाई
मंगलवार की सुनवाई के बाद अगली तारीख 10 सितंबर तय हुई है। इस दिन तीनों बहनों की ओर से बहस होगी। वसुंधरा राजे, यशोधरा राजे और ऊषा राजे अपना पक्ष रखेंगी। इसके बाद अदालत प्रतिमा देवी की आपत्ति पर आगे बढ़ेगी। फिलहाल संपत्ति के बंटवारे पर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। प्रतिमा देवी की दलीलों ने मामले को फिर चर्चा में ला दिया है। अब सवाल उनके अधिकार और पुराने नोटिस पर टिका है। साथ ही वसीयत को लेकर भी स्थिति अहम रहेगी। आने वाली सुनवाई में इन मुद्दों पर तस्वीर साफ होगी।
सबसे बड़ा सवाल क्या
सबसे बड़ा सवाल प्रतिमा देवी के कानूनी अधिकार से जुड़ा है। दूसरा सवाल उन्हें भेजे गए नोटिस के पते से जुड़ा है। तीसरा सवाल वसीयत की जानकारी मिलने या न मिलने का है। चौथा सवाल समझौते में उनके हिस्से को लेकर है। इन सभी सवालों का जवाब अदालत की आगे की कार्रवाई से मिलेगा। फिलहाल दोनों पक्ष अपने-अपने दावे कोर्ट में रख रहे हैं। यह पूरा मामला अभी अदालत में विचाराधीन है और अंतिम फैसला आना बाकी है।
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