खनन मंजूरी में लाशों के लगवाए अंगूठे, सिंगरौली कोल ब्लॉक में कांग्रेस का आरोप
समझें क्या है पूरा मामला...
- सिंगरौली में मृत लोगों के अंगूठों से खनन को मंजूरी का आरोप।
- कांग्रेस का दावा, फर्जी ग्राम सभा दिखाकर कोल ब्लॉक पास कराया।
- वोट चोरी के बाद अब अंगूठा चोरी, जयराम रमेश का तीखा वार।
- धीरौली कोल ब्लॉक में खनन रोकने और सीबीआई जांच की मांग।
- मृत्यु के बाद भी रजिस्टर में दर्ज हुए ग्रामीणों के अंगूठे।
कांग्रेस ने सिंगरौली के धीरौली कोल ब्लॉक को लेकर बड़ा आरोप लगाया है। पार्टी का दावा है कि मृत लोगों के अंगूठों के निशान से खनन मंजूरी ली गई।
फर्जी ग्राम सभाएं दिखाने का भी आरोप लगाया गया है। कांग्रेस ने सीबीआई जांच और खनन पर रोक की मांग की है। अभी तक कंपनी या प्रशासन की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
सिंगरौली में अंगूठा चोरी का आरोप
भोपाल से बड़ी खबर आई है। कांग्रेस ने मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले के धीरौली कोल ब्लॉक को लेकर केंद्र सरकार और अडानी समूह से जुड़ी कंपनी पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
गुरुवार को दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई। पार्टी नेताओं ने दावा किया कि खनन परियोजना को मंजूरी दिलाने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए। फर्जी ग्राम सभाओं का आयोजन दिखाया गया।
अंगूठा चोरी का आरोप क्या है
कांग्रेस का कहना है कि मृत लोगों के अंगूठों के निशान का इस्तेमाल कर सहमति हासिल की गई। आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. विक्रांत भूरिया और नेता के. राजू ने सिंगरौली फाइल्स नाम से दस्तावेज जारी किए।
आरटीआई से मिले दस्तावेजों का हवाला देते हुए पार्टी ने दावा किया कि बृजभान सिंह और फुलेश्वरी सिंह नाम के दो ग्रामीणों के अंगूठे रजिस्टर में मिले। दोनों की मौत पहले ही हो चुकी थी। कांग्रेस के मुताबिक कई अन्य मृत लोगों के निशान भी इसी तरह लगाए गए।
साक्षर आदिवासियों के भी अंगूठे
पार्टी ने यह भी दावा किया कि परियोजना का विरोध कर रहे पढ़े-लिखे आदिवासी नेताओं के भी अंगूठे रजिस्टर में दिखाए गए। कांग्रेस के मुताबिक ये लोग आमतौर पर हस्ताक्षर करते हैं, अंगूठा नहीं लगाते।
डॉ. भूरिया ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि भाजपा सरकार में हर तरह का फ्रॉड मुमकिन है। उन्होंने कहा, वोट चोरी, सीट चोरी और चंदा चोरी के बाद अब अंगूठा चोरी की गई है।
वन अधिकार और पेसा एक्ट का हवाला
कांग्रेस ने कहा कि अनुसूचित क्षेत्रों में किसी भी खनन परियोजना से पहले ग्राम सभा की अनुमति जरूरी होती है। यह वन अधिकार कानून के तहत अनिवार्य है।
पार्टी का आरोप है कि इस प्रक्रिया का पालन करने के बजाय फर्जी ग्राम सभाओं के जरिए मंजूरी दिखाकर काम आगे बढ़ाया गया। कांग्रेस ने इसे पेसा कानून का भी उल्लंघन बताया है।
जयराम रमेश ने भी साधा निशाना
इस मुद्दे पर कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा कि वोट चोरी, सीट चोरी, चंदा चोरी के बाद अब अंगूठा चोरी।
उन्होंने आरोप लगाया कि धीरौली कोल ब्लॉक में मृत लोगों के फर्जी अंगूठों के निशान दिखाकर फर्जी ग्राम सभाओं की मंजूरी ली गई। उनके मुताबिक इससे आदिवासियों के अधिकार कुचले जा रहे हैं।
कांग्रेस की मांग क्या है
कांग्रेस ने पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग की है। पार्टी चाहती है कि जांच पूरी होने तक धीरौली कोल ब्लॉक में खनन गतिविधियां रोकी जाएं।
पार्टी ने यह भी मांग की है कि कथित धोखाधड़ी में शामिल कंपनियों और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हो। के. राजू ने कहा कि पिछले 12 साल में विकास के नाम पर आदिवासियों के साथ अन्याय हुआ है।
विधानसभा में उठ चुका है मामला
यह पहला मौका नहीं है जब धीरौली कोल ब्लॉक विवादों में आया है। इससे पहले मध्य प्रदेश विधानसभा में भी यह मुद्दा जोरशोर से उठ चुका है।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सदन में प्रभावित परिवारों को मुआवजा न मिलने का आरोप लगाया था। सरकार की तरफ से मंत्री ने तब कहा था कि अभी सिर्फ पेड़ काटे गए हैं, खनन शुरू नहीं हुआ है।
FAQ
- धीरौली कोल ब्लॉक विवाद क्या है?
कांग्रेस का आरोप है कि इस कोल ब्लॉक को मंजूरी दिलाने के लिए फर्जी ग्राम सभाएं दिखाई गईं। मृत लोगों के अंगूठों के निशान का इस्तेमाल किया गया। यह अभी तक सिर्फ आरोप है, जांच नहीं हुई है। - कांग्रेस ने क्या मांग की है?
कांग्रेस ने पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग की है। साथ ही जांच पूरी होने तक खनन पर रोक लगाने की मांग की गई है। दोषी अधिकारियों और कंपनी पर कार्रवाई की मांग भी की गई है। - इस मामले पर कंपनी और सरकार का क्या कहना है?
अभी तक अडाणी समूह से जुड़ी कंपनी की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। पहले विधानसभा में सरकार ने कहा था कि अभी सिर्फ पेड़ काटे गए हैं, खनन शुरू नहीं हुआ है।
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