सोम डिस्टिलरीज का आबकारी लाइसेंस रद्द, द सूत्र की खबर के बाद एक्शन में सरकार
समझें क्या है पूरा मामला
- सरकार ने लाइसेंस नवीनीकरण आवेदन खारिज किया।
- सोम डिस्टिलरीज समूह पर गंभीर आरोप हैं।
- अवैध शराब और राजस्व मामलों की जांच चल रही है।
- फैसला जीरो टॉलरेंस नीति के तहत लिया गया।
- 'द सूत्र' ने चलाई थी लगातार खबरें, अब हुआ एक्शन।
सोम डिस्टिलरीज पर क्यों गिरी गाज?
मध्यप्रदेश सरकार ने 18 जून 2026 को एक बड़ा फैसला लिया। सोम डिस्टिलरीज समूह की इकाइयों के वर्ष 2026-27 के लिए दायर आबकारी लाइसेंस नवीनीकरण आवेदन निरस्त कर दिए गए। यह फैसला मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत आया है। सरकार ने साफ किया कि भ्रष्टाचार, अवैध कारोबार और नियमों के उल्लंघन पर कोई समझौता नहीं होगा। आपको बता दें कि 'द सूत्र' ने सोम डिस्टिलरीज की खबर लगातार चलाई थी, जिसके बाद सरकार ने एक्शन लिया है।
क्या था सोम डिस्टिलरीज पर आरोप?
सोम डिस्टिलरीज समूह के खिलाफ गंभीर आरोप रहे हैं। इनमें अवैध शराब परिवहन शामिल है। साथ ही कूटरचित यानी फर्जी परमिटों के इस्तेमाल का मामला भी रहा है। इसके अलावा सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने और आबकारी कानूनों के गंभीर उल्लंघन के मामले न्यायालयों में विचारित हो चुके हैं।
आबकारी आयुक्त ने अपने आदेश में इन सभी पहलुओं का विस्तृत परीक्षण किया। दस्तावेज, साक्ष्य, जांच रिपोर्ट और न्यायिक अभिलेखों की समीक्षा के बाद आवेदन रद्द करने का निर्णय लिया गया।
लाइसेंस नवीनीकरण कोई अधिकार नहीं
आबकारी आयुक्त ने अपने आदेश में एक अहम बात कही। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी लाइसेंस का नवीनीकरण अपने आप नहीं होता। यह कोई स्वचालित प्रक्रिया भी नहीं है। इसके लिए संबंधित संस्था के समग्र आचरण की जांच होती है। विधिक अनुपालन यानी कानूनों का पालन, लाइसेंस की शर्तें, नियामकीय पात्रता और सार्वजनिक हित से जुड़े पहलू देखे जाते हैं। इसी आधार पर मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम 1915 और हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुसार मामले की जांच हुई।
हाईकोर्ट ने भी यही कहा था
मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने भी पहले स्पष्ट किया था कि लाइसेंस नवीनीकरण का कोई स्वचालित अधिकार नहीं दिया जा रहा। न्यायालय ने कहा था कि परीक्षण उपलब्ध तथ्यों, कानूनी प्रावधानों और संबंधित पक्ष के आचरण के आधार पर स्वतंत्र और कारणयुक्त तरीके से होना चाहिए। सरकार ने इसी दृष्टिकोण के अनुरूप निर्णय लिया।
CM यादव की जीरो टॉलरेंस नीति क्या है?
सीएम मोहन यादव ने प्रदेश में "जीरो टॉलरेंस अगेंस्ट इल्लीगल एक्टिविटीज" की नीति अपनाई है। इसके तहत भ्रष्टाचार, अवैध कारोबार और जनहित के विरुद्ध किसी भी गतिविधि पर कठोर कार्रवाई का प्रावधान है।
सरकार का मानना है कि निवेश और उद्योग को बढ़ावा देना जरूरी है। लेकिन इसके साथ कानून का कठोर और निष्पक्ष पालन भी उतना ही जरूरी है। सोम डिस्टिलरीज मामले में लिया गया निर्णय इसी नीति का एक सशक्त उदाहरण है।
सरकार का क्या है इरादा?
सरकार ऐसा माहौल बनाना चाहती है जहां ईमानदार उद्यमों को बढ़ावा मिले। जो उद्योग नियमों का पालन करते हैं उन्हें प्रोत्साहन मिले। और जो कानून तोड़ें उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई हो। यह संदेश प्रदेश के हर व्यापारी और उद्यमी के लिए है कि मध्यप्रदेश में कोई भी कानून से ऊपर नहीं है।
FAQ
- सोम डिस्टिलरीज का लाइसेंस क्यों रद्द किया गया?
सोम डिस्टिलरीज समूह पर अवैध शराब परिवहन, और राजस्व अपवंचन के मामले रहे हैं। इन्हीं आधारों पर MP सरकार ने 2026-27 के आबकारी लाइसेंस नवीनीकरण आवेदन निरस्त किए। - क्या लाइसेंस नवीनीकरण कानूनी अधिकार है?
आबकारी आयुक्त के आदेश और MP हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुसार लाइसेंस नवीनीकरण कोई स्वचालित अधिकार नहीं है। संबंधित संस्था के आचरण, कानूनी अनुपालन और सार्वजनिक हित की जांच के बाद ही नवीनीकरण होता है।
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