सोम डिस्टिलरीज की 80 करोड़ की जब्त बियर बेचने की तैयारी, एक्सपायरी से पहले बाजार में उतारेगा विभाग
शॉर्ट में समझें क्या है पूरा मामला...
- मध्यप्रदेश में सोम डिस्टिलरीज को 04 फरवरी 2026 को आबकारी विभाग ने सील किया था।
- फैक्ट्री और वेयरहाउस में रखी करीब 80 करोड़ रुपए की बियर एक्सपायरी की कगार पर है।
- विभाग अब इस बियर को रिटेलर्स और ठेकों तक पहुंचाने की अनुमति देने की तैयारी में है।
- रिटायर आबकारी अधिकारी इस कदम को नियमों के खिलाफ और गैरकानूनी बता रहे हैं।
- मामला हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है और 193 करोड़ के राजस्व का सवाल है।
सील फैक्ट्री की बियर बाजार में कैसे?
मध्य प्रदेश में बियर की कमी के बीच एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। आबकारी विभाग ने सोम डिस्टिलरीजज को रायसेन जिले में 04 फरवरी 2026 को सील किया था। इसी मामले में विभाग के तीन कर्मचारियों की पेंशन भी रोकी जा चुकी है। एक कर्मचारी को बर्खास्त भी किया जा चुका है।
मामला हाईकोर्ट से होते हुए सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। अब उसी फैक्ट्री के जब्त स्टॉक को रिलीज करने की तैयारी पर सवाल उठ रहे हैं।
11 लाख से ज्यादा पेटियां, कीमत 80 करोड़
एमपी आबकारी विभाग ने चार अधिकारियों की गोपनीय रिपोर्ट के आधार पर फैक्ट्री और वेयरहाउस में रखे स्टॉक को रिटेल ठेकों तक भेजने की अनुमति दी है। विभाग के मुताबिक फैक्ट्री में कुल 11 लाख 66 हजार बियर पेटियां जब्त स्थिति में थीं। इनमें से करीब 4 लाख पेटियां एक्सपायर हो चुकी हैं, इसलिए उन्हें बाजार में नहीं भेजा जाएगा।
अब करीब 7.66 लाख बियर पेटियों को शराब ठेकों तक पहुंचाने की तैयारी है। इनकी कीमत लगभग 80 करोड़ रुपए है।
विभाग का तर्क है कि स्टॉक नष्ट होने पर सरकार को कुल 193 करोड़ रुपए का बकाया राजस्व नहीं मिल पाता। इसीलिए एक्सपायरी से पहले इसे रिलीज करना जरूरी था।
रिटायर अफसरों ने उठाए सवाल
रिटायर आबकारी अधिकारियों ने इस पूरी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। मध्यप्रदेश विदेशी मदिरा नियम-1996 के नियम 18(6) के तहत लाइसेंस निलंबित या निरस्त होने के 30 दिन के भीतर स्टॉक का निपटारा करना होता है। आरोप है कि तय समय सीमा खत्म होने के बाद भी स्टॉक लाइसेंसी के पास रखा रहा। अब उसे रिलीज करने की तैयारी है।
रिटायर अधिकारियों का कहना था कि ऐसी स्थिति में मध्यप्रदेश सरकार से अनुमति जरूरी थी, लेकिन इसका पालन नहीं किया गया है।
डिप्टी कमिश्नर का पक्ष
रिटायर डिप्टी कमिश्नर दीपक सक्सेना का कहना है कि 04 फरवरी को सील हुई फैक्ट्री का पुराना स्टॉक वेयरहाउस से बाजार भेजना नियमों के खिलाफ है। उनके मुताबिक एक्सपायर हो चुकी चार लाख बियर पेटियां बाजार में नहीं भेजी जानी चाहिए।
नियमों के तहत ही रिलीज का दावा
विभाग की तरफ से यह भी सफाई दी गई है कि जिस नियम के तहत स्टॉक रिलीज किया जा रहा है। इसका उल्लेख आबकारी आयुक्त के आदेश में किया गया है। विभाग का दावा है कि पूरी प्रक्रिया नियमानुसार है।
वहीं, रिटायर अधिकारियों और विपक्ष का कहना है कि सील की गई फैक्ट्री का माल बाजार में उतारना जनता के स्वास्थ्य और कानून दोनों के लिए खतरनाक मिसाल है।
193 करोड़ के राजस्व की दलील
सरकार का पूरा जोर इस बात पर है कि यदि यह स्टॉक नष्ट हो जाता है, तो 193 करोड़ रुपए का राजस्व डूब जाएगा। इसीलिए एक्सपायरी से पहले इसे बाजार में उतारना जरूरी बताया जा रहा है। वहीं, सवाल यह है कि लाइसेंस निरस्त होने के इतने महीनों बाद यह निर्णय क्यों लिया जा रहा है।
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