सुप्रीम कोर्ट तक दौड़ी सोम डिस्टिलरी, हाईकोर्ट ने दिखाया कानून का आईना
News in Short
- सोम डिस्टिलरी सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची, लेकिन राहत नहीं मिली।
- मामला फिर हाईकोर्ट की सिंगल बेंच में सुना गया।
- कंपनी ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देकर तत्काल फैसला मांगा।
- कोर्ट ने कहा, सरकार का पक्ष सुने बिना आदेश संभव नहीं।
- अगली सुनवाई टॉप ऑफ द लिस्ट, लेकिन रोस्टर बदलाव पर निर्भर।
News in detail
सोम डिस्टिलरी ने सिंगल बेंच के आदेश के खिलाफ पहले डिविजन बेंच और फिर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। लेकिन वहां से भी उसे कोई राहत नहीं मिली। सुप्रीम कोर्ट ने मामला वापस हाईकोर्ट में ही सुनने के लिए छोड़ दिया। इसके बाद जब मामला दोबारा हाईकोर्ट की सिंगल बेंच में आया, तो कंपनी की ओर से तेजी से आदेश पाने की कोशिश की गई।
सोम डिस्टलरीज: अवैध शराब पकड़ाई, लाइसेंस अब तक क्यों नहीं रद्द हुआ? एक साल से अटका मामला
जज ने समझाया न्याय का सिद्धांत
सुनवाई के दौरान सोम डिस्टिलरी के अधिवक्ता ने बार-बार कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार, यदि सरकार अपना पक्ष नहीं रखती तो भी अदालत को उसी दिन आदेश देना चाहिए।
जस्टिस विवेक अग्रवाल ने कहा कि सरकारी पक्ष अपनी बहस पूरी नहीं कर पाया। समय की कमी के कारण बिना उन्हें सुने फैसला देना न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ होगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि न्यायिक प्रक्रिया को नजरअंदाज कर कोई आदेश पारित नहीं किया जा सकता।
सोम डिस्टलरीज को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, करोड़ों के रिफंड पर ब्रेक, एमपी सरकार को मिली राहत
टेंडर की जल्दबाजी ने खोला पूरा मामला
सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि कंपनी की असली चिंता नए टेंडर में भाग लेना है। लाइसेंस निलंबन के कारण वह टेंडर प्रक्रिया से बाहर हो रही है। इसी वजह से वह लगातार अदालतों में राहत पाने की कोशिश कर रही है। कंपनी ने एक ही समय में हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर कीं, ताकि तत्काल राहत मिल सके।
सोम डिस्टलरीज के 350 करोड़ के बेनामी शेयर नहीं होंगे रिलीज, SC ने लगाई लगाम
कोर्ट ने दिया मौका, पर नियमों के साथ
जस्टिस विवेक अग्रवाल की सिंगल बेंच ने कंपनी को लंबा समय देते हुए उसकी दलीलें सुनीं, लेकिन यह भी स्पष्ट कर दिया कि केवल एक पक्ष को सुनकर फैसला नहीं दिया जा सकता। सरकारी पक्ष की बहस पूरी न हो पाने के कारण अदालत ने मामले को आगे की सुनवाई के लिए स्थगित कर दिया।
लेकिन रोस्टर पर टिकी सुनवाई
अदालत ने इस मामले को अगली सुनवाई में “टॉप ऑफ द लिस्ट” में रखने का निर्देश दिया है। यह तभी संभव होगा जब चीफ जस्टिस रोस्टर में बदलाव करें। मौजूदा व्यवस्था के अनुसार, पहले डिविजन बेंच बैठती है, फिर सिंगल बेंच। रोस्टर में बदलाव न होने पर प्राथमिक सुनवाई संभव नहीं होगी।
नकली परमिट कांड में आबकारी विभाग का एक्शन, सोम डिस्टलरीज ग्रुप रायसेन का लाइसेंस सस्पेंड
अब अगली सुनवाई पर नजर
सभी अदालतों में दौड़ लगाने के बावजूद सोम डिस्टिलरी को राहत नहीं मिली। अब मामला जबलपुर हाईकोर्ट की प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ेगा। अगली सुनवाई में सरकार का पक्ष पूरी तरह सामने आएगा। इसके बाद ही अदालत इस मामले में आगे का फैसला करेगी। अदालत ने स्पष्ट किया है कि निर्णय कानून के अनुसार ही दिया जाएगा।