मेघालय पुलिस ने सोनम रघुवंशी की गिरफ्तारी चेकलिस्ट में राजा की हत्या का जिक्र ही नहीं, हाईकोर्ट ने बताया हास्यास्पद

Sanjay Gupta | Jun 30, 2026, 12:00 IST
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पूरे देश को हिला देने वाले शिलांग हनीमून मर्डर केस में इंदौर की सोनम रघुवंशी की जमानत जारी रहेगी। हाईकोर्ट शिलांग द्वारा जारी आदेश में साफ लिखा है कि मेघालय पुलिस अधिकारियों ने विवेक का उपयोग नहीं किया है। द सूत्र के पास हाईकोर्ट का आदेश है।

मेघालय पुलिस ने इंदौर के ट्रांसपोर्ट कारोबारी राजा रघुवंशी की हत्या का खुलासा 9 जून 2025 को किया था। इस मामले में पुलिस ने राजा की पत्नी सोनम रघुवंशी को उत्तर प्रदेश के गाजीपुर से गिरफ्तार किया था। बाद में 27 अप्रैल 2026 को जिला कोर्ट ने सोनम को जमानत दे दी।



कोर्ट ने माना कि गिरफ्तारी के दौरान मेघालय पुलिस ने जरूरी कानूनी प्रक्रिया पूरी नहीं की। पुलिस ने सोनम को यह भी साफ तौर पर नहीं बताया कि उसे किस वजह से गिरफ्तार किया जा रहा है। इसे संविधान के अनुच्छेद 22 के तहत मिले मौलिक अधिकारों का उल्लंघन माना गया। इसके अलावा दस्तावेजों में बीएनएस की धारा 103(1) की जगह गलती से 403(1) लिख दी गई थी।



सोनम की जमानत के खिलाफ मेघालय पुलिस हाईकोर्ट पहुंची। शिलांग हाईकोर्ट ने 20 पेज का आदेश जारी करते हुए पुलिस की कई गंभीर लापरवाहियों का जिक्र किया।



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चेकलिस्ट में राजा की हत्या लिखी ही नहीं

सोनम रघुवंशी को 9 जून 2025 को गाजीपुर से गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के समय उससे एक चेकलिस्ट पर हस्ताक्षर कराए गए थे। इस चेकलिस्ट में सोनम से 17 सवाल पूछे गए थे।



शिलांग हाईकोर्ट ने इस चेकलिस्ट को हास्यास्पद (Ridiculous) बताया है। वजह यह थी कि उसमें राजा रघुवंशी की हत्या या सोनम पर लगे हत्या के आरोप का कहीं जिक्र ही नहीं था। इसके बजाय ऐसे पुराने और सामान्य सवाल पूछे गए, जिनका इस हत्याकांड से कोई सीधा संबंध नहीं था।



मसलन, सोनम से पूछा गया कि क्या उस पर किसी सशस्त्र बल से भगोड़ा होने का शक है। यह भी पूछा गया कि क्या वह भारत के बाहर हुए किसी अपराध में शामिल रही है। एक सवाल यह था कि क्या वह रिहा कैदी है और उसने अपना पता बदलने की जानकारी नहीं दी। उससे चोरी की संदिग्ध संपत्ति बरामद होने से जुड़ा सवाल भी पूछा गया।



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मेघालय पुलिस ने विवेक का उपयोग नहीं किया

हाईकोर्ट ने साफ लिखा कि यदि किसी गिरफ्तार आरोपी को गिरफ्तारी के कारणों की ऐसी जानकारी दी जाती है तो यह गिरफ्तार करने वाली एजेंसी द्वारा विवेक का उपयोग नहीं करने को दिखाता है। यह गिरफ्तारी प्रक्रिया पर ही वार है। साफ है कि उसे गिरफ्तार करते हुए प्रारंभिक प्रक्रिया के दौरान ही प्रभावी सूचना नहीं दी गई और यह संविधान के मौलिक अधिकार 22(1) और बीएनएस की धारा 47(1) के प्रावधानों का साफ उल्लंघन है।



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एक बार नहीं, बार-बार दस्तावेज में की गलती

मेघालय पुलिस की ओर से एडवोकेट जनरल अमित कुमार ने कहा कि दस्तावेज में धारा 103 की जगह 403 लिखा जाना सिर्फ टाइपिंग की गलती थी। इस पर सोनम के वकील एस. थापा ने कहा कि यह गलती केवल एक जगह नहीं हुई।



उनके मुताबिक, गिरफ्तारी से जुड़े लगभग हर दस्तावेज में यही गलती दोहराई गई। गिरफ्तारी पत्र, चेकलिस्ट, निरीक्षण दस्तावेज और दूसरे कागजों में भी गलत धारा लिखी गई थी। हाईकोर्ट ने भी इस दलील को माना और कहा कि गिरफ्तारी की जरूरी कानूनी प्रक्रिया का सही तरीके से पालन नहीं किया गया।



गाजीपुर में भी नहीं दी पूरी जानकारी

एजी अमित कुमार ने कोर्ट में कहा कि सोनम रघुवंशी को गिरफ्तारी के समय अपने ऊपर लगे सभी आरोपों की जानकारी थी। उनके मुताबिक, 9 जून 2025 को गाजीपुर में गिरफ्तारी के बाद उसे यूपी कोर्ट में पेश किया गया था। वहीं से कोर्ट ने 72 घंटे की ट्रांजिशन रिमांड मंजूर की थी।



उन्होंने यह भी कहा कि शिलांग जिला कोर्ट में पेशी के दौरान सोनम से पूछा गया था कि क्या उसे गिरफ्तारी और आरोपों की जानकारी है। इस पर उसने सहमति जताई थी। इसलिए सिर्फ दस्तावेज में गलत धारा लिखे जाने को जमानत का आधार नहीं बनाया जा सकता।



दूसरी ओर, सोनम के वकील ने कहा कि गाजीपुर कोर्ट के आदेश में भी गिरफ्तारी के कारण साफ और प्रभावी तरीके से नहीं बताए गए थे।



मिहिर राजेश शाह केस बना बड़ा कारण

इस केस में सुप्रीम कोर्ट द्वारा मिहिर राजेश शाह केस में दिया गया आदेश भी अहम बना। इसके तहत सुप्रीम कोर्ट में स्थापित हुआ है कि आरोपी को गिरफ्तारी के समय उसे उसकी जानने वाली भाषा में लिखित में गिरफ्तारी का कारण बताना जरूरी है, ताकि उसे बचाव के लिए मौका मिले। केवल मौखिक आधार पर बताना पर्याप्त नहीं है। रिमांड के दो घंटे पहले लिखित में बताना जरूरी है।



मेघालय पुलिस सुप्रीम कोर्ट जाएगी

वहीं जानकारी के अनुसार इस मामले में अब मेघालय पुलिस सुप्रीम कोर्ट जाने का विचार कर रही है। हालांकि कानूनी जानकारों का कहना है कि हाईकोर्ट का इतना विस्तृत आदेश है। इसमें सुप्रीम कोर्ट के ही विविध फैसलों का जिक्र किया गया है, ऐसे में अब मेघालय पुलिस को आगे राहत मिलना मुश्किल है।



लेकिन अभी इंदौर नहीं आएगी सोनम

हालांकि जमानत जारी रहने के आदेश के बाद भी सोनम इंदौर नहीं आ सकेगी। कारण है कि हाईकोर्ट ने भी शिलांग जिला कोर्ट द्वारा जारी जमानत की शर्तों को ही बनाए रखा है। इसके तहत वह शिलांग कोर्ट का क्षेत्राधिकार छोड़कर नहीं जा सकती है।



राजा का परिवार फिर बोला, सीबीआई जांच हो

वहीं इस आदेश के बाद राजा का परिवार फिर विचलित है। वह लगातार सीबीआई जांच की मांग दोहरा रहा है। राजा के भाई विपिन ने लगातार आरोप लगाए हैं कि इस मामले में मेघालय पुलिस ने गंभीरता नहीं बरती है और इसी के चलते सोनम को जमानत मिली। उन्हें अब इस फैसले के बाद आशंका है कि सोनम को कहीं बरी नहीं कर दिया जाए।



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