आरक्षण की लड़ाई में नया मोड़, ST वर्ग ने भी किया OBC के 27% कोटे का विरोध
समझें क्या है पूरा मामला
- ST याचिकाकर्ता ने 27 प्रतिशत OBC आरक्षण का विरोध किया।
- कोर्ट ने खाली ST सीटों पर भेदभाव का आधार पूछा।
- याचिकाकर्ता ने सामान्य मेरिट सीटें घटने की आशंका जताई।
- EWS आरक्षण और 50 प्रतिशत सीमा पर भी बहस हुई।
- अगली सुनवाई 23 जुलाई को दोपहर 12 बजे होगी।
आरक्षित वर्ग के याचिकाकर्ता ने किया विरोध
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की मुख्य पीठ जबलपुर में जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस विनय सराफ की डिविजनल बेंच में सुनवाई चल रही है। आज बुधवार 22 जुलाई को पहले आरक्षण के विरोध में सामान्य वर्ग की ओर से पक्ष रखा गया।
उसके बाद ST वर्ग की याचिकाकर्ता रितु बडोले की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शोभा मुक्ता ने ओबीसी को दिए जाने वाले 27 प्रतिशत आरक्षण का विरोध किया। उन्होंने बताया कि ओबीसी को बढ़ाकर आरक्षण देना अन्य आरक्षित वर्ग के साथ भी भेदभाव है।
कोर्ट ने पूछा ST की 30 से 40% सीट खाली
इस मामले पर जस्टिस सराफ ने मौखिक टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि आंकड़े बताते हैं कि ST वर्ग को दिए जाने वाले आरक्षण के बाद भी 30 से 40 प्रतिशत सीट खाली ही रह जाती हैं। तो फिर ओबीसी आरक्षण को भेदभाव कैसे कहा जा सकता है।
वरिष्ठ अधिवक्ता शोभा मुक्ता ने कोर्ट को बताया कि ST वर्ग को दिए जाने वाले 16% आरक्षण के अलावा भी 50% जनरल कैटेगरी में कैंडिडेट मेरिट के आधार पर जगह बनाते हैं।
इस तरह ओबीसी को 13% अधिक आरक्षण देने से यह केवल जनरल नहीं बल्कि अन्य आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के साथ भी भेदभाव है। उन्होंने कोर्ट को बताया कि ओबीसी को जो 13% आरक्षण बढ़ा कर दिया जा रहा है वह उसी 50% सामान्य सीटों में से काटा जाएगा और इसका नुकसान एसटी वर्ग के MERITORIOUS अभ्यर्थियों को होगा।
आरक्षण की सीमा पर स्पष्टीकरण
इस मामले में एक बात लगातार उठ रही है कि जब Ews को 10% आरक्षण दिया गया था तब ही आरक्षण की सीमा 50% से पर हो चुकी थी। आज जस्टिस विनय सराफ के कोर्ट में किए गए सवाल से यह साफ हो गया की Ews आरक्षण होरिजेंटल आरक्षण है।
इसका मतलब यह है कि EWS आरक्षण अन्य होरिजेंटल आरक्षण जैसे महिला आरक्षण, दिव्यांग आरक्षणों जैसा ही है। इसलिए इस आरक्षण को लागू होने से 50% की सीमा नहीं टूटती। यानी कि अभी की स्थिति देखी जाए तो SC -16%, ST-20% और OBC - 13% को मिलाकर कुल 50% आरक्षण लागू है।
आरक्षित वर्ग ने कहा अभी 60% है आरक्षण
ओबीसी वर्ग की ओर से अधिवक्ता वरुण ठाकुर ने कोर्ट को बताया कि बार-बार 50% आरक्षण की बात हो रही है जबकि मध्य प्रदेश में अभी 60% आरक्षण लागू है। हालांकि कोर्ट ने उन्हें कहा कि जब अपना पक्ष रखेंगे तब इस पर तथ्य रखिएगा।
विकास के साथ ही टैक्स तक की हुई बात
ST वर्ग की याचिकाकर्ता की ओर से को पर कैपिटल इनकम की 2004 से 2011 की टैक्स रिपोर्ट का भी हवाला दिया गया। जिसमें बताया गया कि आरक्षित वर्ग की इनकम लगभग 50% तक बढ़ चुकी है।
इसके साथ ही प्रदेश में किए गए विकास का भी हवाला दिया गया। बताया गया कि, मुख्यमंत्री नगरीय विकास योजनाओं के तहत 3000 प्रोजेक्ट पूरे किए गए हैं।
भोपाल मेट्रो से लेकर किए जा रहे विकास यह बताते हैं कि कोई भी जाति ट्रांसपोर्ट से लेकर अन्य सुविधाओं में पिछड़ी हुई नहीं है। फिर कहा गया कि केवल आबादी अनुपात पर्याप्त नहीं है। ठोस आंकड़ों के बिना आरक्षण प्रतिशत बढ़ाना गलत है।
कल 23 जुलाई को होगी दोपहर 12:00 सुनवाई
इस मामले में सामान्य वर्ग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य सांघी के बाद अधिवक्ता अपराजिता ने तथ्य रखें। इसके बाद एसटी वर्ग की ओर से अधिवक्ता शोभा मुक्ता ने पक्ष रखा। अब इस मामले की सुनवाई कल दोपहर 12:00 बजे से होगी। जस्टिस विनय सराफ की व्यस्तता के चलते दोपहर 2:30 बजे की सुनवाई 12:00 से रखी गई है।
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