SC कॉलेजियम की चार मुख्य न्यायाधीशों की सिफारिशें, MP सहित तीन हाईकोर्ट बाकी
ऐसे समझें क्या है पूरा मामला...
- सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने चार हाई कोर्ट के नाम सुझाए हैं।
- इन चारों हाई कोर्ट में स्थायी चीफ जस्टिस मिल सकते हैं।
- अब केंद्र सरकार इन सिफारिशों पर फैसला करेगी।
- मंजूरी के बाद तीन हाई कोर्ट में पद खाली रहेंगे।
- मध्यप्रदेश में अब अगली सिफारिश पर सबकी नजर रहेगी।
देश की न्यायपालिका में बदलाव की बड़ी खबर सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने चार नाम सुझाए हैं। इन नामों को चार हाई कोर्ट से जोड़ा गया है। इनमें पटना, कलकत्ता और बॉम्बे हाई कोर्ट शामिल हैं। पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट भी इसमें शामिल है। इन सिफारिशों से चार अदालतों को स्थायी नेतृत्व मिल सकता है।
कॉलेजियम ने दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस वी. कामेश्वर राव का नाम सुझाया है। उन्हें पटना हाई कोर्ट का चीफ जस्टिस बनाने की सिफारिश हुई है। जस्टिस राव लंबे समय से दिल्ली हाई कोर्ट में हैं। अब उनके सामने नई जिम्मेदारी का रास्ता खुला है।
जस्टिस घुगे को कलकत्ता की जिम्मेदारी
बॉम्बे हाई कोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस रविंद्र विठ्ठलराव घुगे का नाम भी शामिल है। कॉलेजियम ने उन्हें कलकत्ता हाईकोर्ट भेजने की सिफारिश की है। उन्हें वहां चीफ जस्टिस की जिम्मेदारी देने का प्रस्ताव है। इससे कलकत्ता हाई कोर्ट को नया नेतृत्व मिल सकता है।
जस्टिस घुगे फिलहाल बॉम्बे हाई कोर्ट की कमान संभाल रहे हैं। अब कॉलेजियम ने उनके लिए नई भूमिका तय की है। केंद्र की मंजूरी के बाद यह बदलाव लागू हो सकेगा। इसके बाद बॉम्बे हाई कोर्ट में भी नेतृत्व बदलेगा।
जस्टिस महेश चंद्र त्रिपाठी का भी नाम
इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस महेश चंद्र त्रिपाठी का नाम भी सुझाया गया है। उन्हें बॉम्बे हाई कोर्ट का चीफ जस्टिस बनाने की सिफारिश है। यह प्रस्ताव बॉम्बे हाई कोर्ट में नेतृत्व बदलाव से जुड़ा है। जस्टिस घुगे के स्थानांतरण से यह बदलाव अहम हो जाता है।
कॉलेजियम की सिफारिश के बाद अब केंद्र सरकार की प्रक्रिया शुरू होगी। मंजूरी मिलने पर संबंधित नियुक्तियों की अधिसूचना जारी होगी। इसके बाद नए चीफ जस्टिस पद संभाल सकेंगे।
पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट को भी नाम मिला
पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट को भी नया नेतृत्व मिल सकता है। वहां जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा एक्टिंग चीफ जस्टिस हैं। कॉलेजियम ने उन्हें स्थायी चीफ जस्टिस बनाने की सिफारिश की है। इससे मौजूदा व्यवस्था को स्थायी रूप मिल सकता है।
जस्टिस मिश्रा फिलहाल इसी हाई कोर्ट की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। कॉलेजियम ने उनका नाम आगे बढ़ाया है। अब केंद्र सरकार इस सिफारिश पर फैसला करेगी। मंजूरी के बाद उन्हें स्थायी चीफ जस्टिस की जिम्मेदारी मिलेगी।
अब केंद्र सरकार के फैसले पर नजर
कॉलेजियम की सिफारिश के बाद अगला कदम केंद्र सरकार का है। सरकार इन नामों पर विचार करेगी। मंजूरी मिलने पर नियुक्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इसके बाद चार हाई कोर्ट को नए चीफ जस्टिस मिलेंगे।
कॉलेजियम की सिफारिश अंतिम नियुक्ति नहीं होती है। लेकिन आमतौर पर सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम द्वारा की गई अनुशंसा को सरकार मंजूर कर ही लेती है।
चार नियुक्तियों के बाद तीन हाईकोर्ट बाकी
मौजूदा जानकारी के अनुसार सात हाईकोर्ट में स्थायी चीफ जस्टिस नहीं हैं। इनमें मध्यप्रदेश हाई कोर्ट भी शामिल है। इन 4 नई सिफारिश के अप्रूव हो जाने के बाद MP, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख सहित राजस्थान हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस के नाम की अनुशंसा होनी बाकी है।
मध्यप्रदेश हाई कोर्ट पर भी टिकी नजर
मध्यप्रदेश हाई कोर्ट में भी स्थायी चीफ जस्टिस को लेकर नजरें टिकी हैं। फिलहाल यहां एक्टिंग चीफ जस्टिस व्यवस्था में काम हो रहा है। चार नई सिफारिशों के बाद मध्यप्रदेश का नाम अहम हो गया है। अब अगली सिफारिशों में मध्यप्रदेश पर ध्यान रहेगा।
हालांकि, मध्यप्रदेश के लिए नाम अभी घोषित नहीं हुआ है। यह कहना जल्दबाजी होगी कि नाम कब सामने आएगा। कॉलेजियम की अगली बैठक में तस्वीर साफ हो सकती है। फिलहाल इसे संभावित अगला कदम ही माना जाना चाहिए।
सात से तीन तक कैसे बदलेगी तस्वीर
देश में कुल 25 हाई कोर्ट हैं। इनमें सात जगह स्थायी चीफ जस्टिस का पद खाली बताया गया है। कॉलेजियम ने चार हाई कोर्ट के लिए नाम सुझाए हैं। इसलिए चार मंजूरियों के बाद संख्या तीन रह जाएगी।
यह बदलाव हाई कोर्ट के प्रशासन के लिए अहम है। स्थायी नेतृत्व मिलने से कई फैसलों में तेजी आ सकती है। अब बाकी तीन हाई कोर्ट की ओर नजरें रहेंगी। इनमें मध्यप्रदेश का नाम भी प्रमुख है।
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की भूमिका क्यों अहम
चीफ जस्टिस की नियुक्ति में कॉलेजियम की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। कॉलेजियम हाई कोर्ट के लिए नाम सुझाता है। इसके बाद केंद्र सरकार प्रस्ताव पर विचार करती है। मंजूरी मिलने पर नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी होती है।
इस बार चार नामों की सिफारिश से चार हाई कोर्ट प्रभावित होंगे। इससे सात खाली पदों में से चार भर सकते हैं। इसके बाद तीन हाई कोर्ट बाकी रहेंगे। अब अगली सिफारिशों को लेकर भी नजर बनी रहेगी।
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