शिक्षकों की ई-अटेंडेंस विवाद का जल्द निकलेगा हल, हाईकोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित

Neel Tiwari | Aug 09, 2026, 08:30 IST
Share
ई-अटेंडेंस विवाद में हाईकोर्ट का फैसला सुरक्षित
Photograph: (THESOOTR)

JABALPUR. मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने शिक्षकों की ई-अटेंडेंस से जुड़ी याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा है। याचिका में निजी मोबाइल, डेटा सुरक्षा और वेतन रोकने पर सवाल उठाए गए हैं। अब अदालत के अंतिम आदेश का इंतजार है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • मध्य प्रदेश में शिक्षकों की डिजिटल हाजिरी को लेकर विवाद चल रहा है।
  • शिक्षकों ने निजी मोबाइल से हाजिरी लगाने पर सवाल उठाए हैं।
  • याचिका में चेहरे और लोकेशन के डेटा पर भी चिंता जताई गई है।
  • ऐप से हाजिरी नहीं होने पर वेतन रोकने का मुद्दा भी उठा है।
  • हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनकर फैसला सुरक्षित रखा है।
जबलपुर हाईकोर्ट ने शिक्षकों की ई-अटेंडेंस से जुड़ी याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा है। मामले की सुनवाई जस्टिस विशाल धगट की एकल पीठ में हुई। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अंशुमान सिंह ने पक्ष रखा।

अदालत के सामने शिक्षकों की डिजिटल हाजिरी से जुड़े कई सवाल रखे गए। इनमें निजी मोबाइल के इस्तेमाल से लेकर डेटा सुरक्षा तक के मुद्दे शामिल हैं।

वेतन रोकने और विभागीय कार्रवाई का सवाल भी सुनवाई में अहम रहा। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रखा। यह मामला रिट याचिका क्रमांक 91852/2025 से जुड़ा है।

शिक्षकों ने ई-अटेंडेंस व्यवस्था को क्यों चुनौती दी

याचिका में 20 जून 2025 के विभागीय आदेश को चुनौती दी गई है। लोक शिक्षण संचालनालय ने यह आदेश जारी किया था। इसके बाद शिक्षकों के लिए हमरे शिक्षक ऐप से हाजिरी जरूरी हुई।

व्यवस्था के तहत तय समय में मोबाइल से हाजिरी लगानी थी। समय पर हाजिरी नहीं होने पर आधे दिन का नियम था। शिक्षकों ने इस व्यवस्था को कई आधारों पर चुनौती दी है।

शिक्षकों का कहना है कि सभी स्कूलों में तकनीकी सुविधाएं समान नहीं हैं। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क की समस्या बड़ी चुनौती है। कई शिक्षकों के पास जरूरी स्मार्टफोन या तकनीकी सुविधा भी नहीं है।

निजी मोबाइल के इस्तेमाल पर भी उठे सवाल

याचिका में शिक्षकों के निजी मोबाइल के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाए गए हैं। शिक्षकों का कहना है कि सरकारी काम के लिए निजी संसाधन जरूरी किए गए। इसके लिए मोबाइल, इंटरनेट और डेटा का खर्च भी जुड़ता है।

ग्रामीण स्कूलों में इंटरनेट की कमजोर सुविधा समस्या बढ़ा सकती है। तकनीकी जानकारी की कमी भी कई शिक्षकों के सामने चुनौती है। याचिका में कहा गया है कि हाजिरी की व्यवस्था विभाग को करनी चाहिए। शिक्षकों पर निजी संसाधनों का बोझ नहीं डाला जाना चाहिए। इसी आधार पर ऐप की अनिवार्यता को अनुपातहीन बताया गया है।

चेहरे और लोकेशन डेटा पर क्या आपत्ति है

याचिका में ऐप से जुटाए जाने वाले डेटा पर भी गंभीर सवाल उठे हैं। इसमें चेहरे की पहचान और लोकेशन जैसी जानकारी शामिल बताई गई है। याचिका में जन्मतिथि और आधार नंबर का भी जिक्र है। फोन नंबर और पता जैसी जानकारी भी इसमें शामिल बताई गई है।

शिक्षकों ने इस डेटा की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि ऐसी जानकारी का इस्तेमाल संवेदनशील मामला है। याचिका में निजता के अधिकार का भी हवाला दिया गया है। इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का उल्लेख किया गया है।

साइबर ठगी और फिशिंग के दावों ने बढ़ाई चिंता

याचिका में कुछ शिक्षकों को संदिग्ध फोन आने का दावा किया गया है। ऐसे फोन में पैसे और ओटीपी मांगने की बात कही गई है। कुछ शिक्षकों ने पुलिस और बैंक में शिकायत की है।

याचिका में 90 हजार रुपए से अधिक नुकसान का भी दावा है। यह नुकसान फिशिंग हमलों से जुड़ा बताया गया है। याचिका में विभागीय स्तर पर साइबर सुरक्षा से जुड़ी एडवाइजरी का भी जिक्र है।

हालांकि, इन दावों पर अंतिम फैसला अभी अदालत को करना है। अदालत के अंतिम आदेश से इन सवालों पर स्थिति साफ होगी।

ई-अटेंडेंस नहीं होने पर वेतन का मुद्दा क्यों अहम है

शिक्षकों की ई-अटेंडेंस का मामला वेतन रोकने का मुद्दा भी अहम बन गया है। याचिका में ऐसे नोटिस और आदेशों का जिक्र किया गया है। इनमें ऐप पर हाजिरी नहीं होने पर कार्रवाई की बात बताई गई है। शिक्षकों ने तकनीकी दिक्कतों के कारण हाजिरी नहीं होने की बात कही है।

नेटवर्क की समस्या भी इसका एक कारण बताई गई है। ऐसे हालात में वेतन रुकने की चिंता शिक्षकों ने जताई है। वहीं एक दूसरे मामले में तकनीकी दिक्कत वाले शिक्षकों को राहत मिली। हाईकोर्ट के आदेश के बाद उनके वेतन भुगतान की प्रक्रिया शुरू हुई।

ऐप की अनिवार्यता धीरे-धीरे कैसे बढ़ी

20 जून 2025 के आदेश के बाद यह व्यवस्था लागू हुई थी। एक जुलाई 2025 से ऐप पर हाजिरी जरूरी की गई। शिक्षकों को तय समय के भीतर मोबाइल से हाजिरी लगानी थी। स्कूल खुलने और बंद होने के समय से जुड़ी शर्तें भी रखी गईं। समय पर हाजिरी नहीं होने पर आधे दिन का नियम था।

बाद में विभाग ने अनुपालन बढ़ाने के लिए कई पत्र जारी किए। इन पत्रों में शत प्रतिशत डिजिटल हाजिरी पर जोर दिया गया। पीएम श्री स्कूलों के शिक्षकों को भी व्यवस्था में जोड़ा गया। आईसीटी, संगीत और खेल शिक्षकों पर भी यह व्यवस्था लागू हुई। अतिथि शिक्षकों की हाजिरी को भी इसी सिस्टम से जोड़ा गया।

शिक्षकों ने हाईकोर्ट से क्या राहत मांगी

याचिकाकर्ताओं ने 20 जून 2025 के आदेश को रद्द करने की मांग की। उन्होंने पुराने तरीके से हाजिरी दर्ज करने की अनुमति मांगी। ऐप से हाजिरी नहीं होने पर वेतन रोकने पर रोक मांगी गई। विभागीय कार्रवाई नहीं करने की मांग भी याचिका में की गई।

शिक्षकों के लिए जरूरी सरकारी उपकरण देने की मांग रखी गई। उन्हें ऐप चलाने के लिए उचित प्रशिक्षण देने की मांग भी हुई। डेटा सुरक्षा के लिए मजबूत व्यवस्था बनाने की मांग की गई। चेहरे और लोकेशन डेटा के सुरक्षित इस्तेमाल पर भी जोर दिया गया।

अब हाईकोर्ट के अंतिम आदेश का इंतजार

इस मामले में हाईकोर्ट ने फिलहाल अपना फैसला सुरक्षित रखा है। इसका मतलब है कि अंतिम निर्णय अभी जारी नहीं हुआ है। अदालत का अगला आदेश पूरे विवाद की दिशा तय करेगा। फैसले का असर प्रदेश की डिजिटल हाजिरी व्यवस्था पर पड़ सकता है।

शिक्षकों के वेतन और विभागीय कार्रवाई से जुड़े सवाल भी अहम हैं। निजी मोबाइल के इस्तेमाल का मुद्दा भी फैसले में महत्वपूर्ण रहेगा। डेटा सुरक्षा और निजता से जुड़े सवाल भी सामने हैं। ग्रामीण स्कूलों की तकनीकी समस्याओं पर भी अदालत का रुख अहम होगा। अब शिक्षकों और विभाग दोनों को अंतिम आदेश का इंतजार है।

ये खबरें भी पढ़ें...

90% ई-अटेंडेंस में अटके हजारों अतिथि शिक्षकों को राहत, DEO कमेटी लेगी फैसला

ई-अटेंडेंस का नया नियम: स्कूल से नहीं किया लॉगआउट तो अटक सकती है शिक्षकों की सैलरी

जनकल्याण में फर्जी आंकड़ों का खेल: जन विश्वास से पहले सरकारी शिविरों पर उठे सवाल

ट्विशा केस: पूर्व जज गिरिबाला अब इस आधार पर मांगेंगी बेल, सुनवाई 10 अगस्त को

Tags:
  • मध्य प्रदेश
  • हाईकोर्ट
  • शिक्षक
  • ई-अटेंडेंस
  • शिक्षकों की ई-अटेंडेंस का मामला
गूगल पर द सूत्र चुनें ! Add as a preferredsource on Google
20 हजार करोड़ रुपए के बकाया चालान: सुप्रीम कोर्ट ने दिए अनोखे सुझाव: बिजली बिल में जुड़ सकती है चालान की राशि

By Neel Tiwari

20 हजार करोड़ रुपए के बकाया चालान: सुप्रीम कोर्ट ने दिए अनोखे सुझाव: बिजली बिल में जुड़ सकती है चालान की राशि
छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें

By Arun Tiwari

छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें
मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी

By Sandeep Kumar

मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी
IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी

By VINAY VERMA

IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी
राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं

By Ashish Bhardwaj

राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं
पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई

By Arun Tiwari

पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई
भोपाल की सेज यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा: हॉस्टल मेस के खाने में कीड़े मिलने का आरोप, अब खाद्य विभाग करेगा जांच

By Jitendra Shrivastava

भोपाल की सेज यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा: हॉस्टल मेस के खाने में कीड़े मिलने का आरोप, अब खाद्य विभाग करेगा जांच