ट्विशा केस: पूर्व जज गिरिबाला अब इस आधार पर मांगेंगी बेल, सुनवाई 10 अगस्त को
Neel Tiwari | Aug 08, 2026, 08:30 IST
गिरिबाला की जमानत
ट्विशा शर्मा मौत मामले में पूर्व जज गिरिबाला सिंह ने हाई कोर्ट में नियमित जमानत मांगी है। भोपाल कोर्ट से बेल खारिज होने के बाद यह नया आवेदन हाईकोर्ट में दाखिल हुआ है। 10 अगस्त को सुनवाई संभव है। गिरिबाला ने आरोपों को गलत बताया है।
समझें क्या है पूरा मामला
- ट्विशा शर्मा की 12 मई को भोपाल में मौत हुई थी।
- इस मामले में सास गिरिबाला सिंह और बेटे समर्थ पर केस है।
- गिरिबाला की पहले मिली अग्रिम जमानत हाईकोर्ट ने रद्द की थी।
- भोपाल कोर्ट ने 25 जुलाई को नियमित जमानत खारिज की।
- अब गिरिबाला ने हाई कोर्ट में फिर नियमित जमानत मांगी है।
इन आधारों पर बेल मांग रही हैं गिरिबाला
ट्विशा के होने वाले बच्चे के पिता पर सवाल उठाने से भी इनकार किया। गिरीबाला ने गर्भपात के लिए दबाव बनाने का आरोप भी नकारा है। उनके अनुसार आरोप ट्विशा के रिश्तेदारों ने लगाए हैं। गिरीबाला की ओर से इसे पारिवारिक रंजिश से जुड़ा मामला जाएगा।
गिरिबाला की सुनवाई
डॉक्टरों के बयानों को बनाया अहम आधार
आवेदन में दवाओं के सेवन का भी दावा किया गया है। गिरिबाला ने गर्भपात को लेकर अलग दावा किया है। उनका कहना है कि ट्विशा खुद गर्भपात चाहती थीं। इस आधार पर उन्होंने अभियोजन की कहानी पर सवाल उठाया है।
पितृत्व और गर्भपात के आरोपों को भी चुनौती
7.50 लाख के लेनदेन का भी हवाला
उनके अनुसार ट्विशा के खाते में 7.50 लाख रु. भेजे गए। इसे दहेज मांग के आरोप के खिलाफ बताया जाएगा।
गिरिबाला के पक्ष के अनुसार दहेज मांगने का कोई सीधा प्रमाण नहीं है। इसके साथ ही ट्विशा के खाते के इस्तेमाल का भी उल्लेख किया जाना तय है। गिरिबाला के अनुसार मायके से पैसे भेजने का प्रमाण नहीं है। इस आधार पर दहेज आरोपों पर सवाल उठाया जाएगा।
मौत से ठीक पहले क्रूरता का प्रमाण नहीं होने का दावा
वॉयस सैंपल को लेकर भी रखा जाएगा पक्ष
सीबीआई के जमानत के विरोध पर तैयारी
तर्क यही रहेगा की मुख्य गवाह दिल्ली में रहते हैं। इसलिए वह गवाहों को प्रभावित नहीं कर सकतीं। इसके साथ ही भोपाल में स्थायी संपत्ति और अदालत की सभी शर्तें मानने के हवाले से जमानत की मांग की जाएगी।
64 साल की उम्र और न्यायिक सेवा का भी आधार
पूरी घटना क्या थी
12 मई 2026 को ट्विशा की मौत हो गई। उनका शव ससुराल के घर में मिला था। इसके बाद कटारा हिल्स थाने में केस दर्ज हुआ। मामले की जांच बाद में सीबीआई को सौंप दी गई। गिरिबाला और उनके बेटे समर्थ सिंह आरोपी बनाए गए। गिरिबाला ने इन सभी आरोपों से इनकार किया है।
पहले की जमानत और हाई कोर्ट का फैसला
इसके बाद गिरिबाला जांच एजेंसी की हिरासत में गईं। बाद में उन्होंने भोपाल कोर्ट में नियमित जमानत मांगी। प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश ने 25 जुलाई को इसे खारिज किया। कोर्ट ने गंभीर आरोप और जांच को अहम माना। गवाह प्रभावित होने की आशंका भी कोर्ट ने मानी थी। अब इसी के बाद हाई कोर्ट में नया आवेदन आया है।
भोपाल कोर्ट के फैसले के बाद बदला पूरा समीकरण
अब हाई कोर्ट में इन्हीं परिस्थितियों पर बहस होगी। गिरिबाला अपने नए आवेदन में अलग आधार रख रही हैं। वह अब हिरासत जारी रखने की जरूरत पर सवाल उठा रही हैं।
अब 10 अगस्त की सुनवाई पर नजर
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