स्वच्छता सर्वेक्षण: नंबर-1 की दौड़ में भोपाल, लेकिन जनता का फीडबैक बना असली चैलेंज

Ramanand Tiwari | May 03, 2026, 23:12 IST
swachh survekshan 2025
स्वच्छ सर्वेक्षण में भोपाल नंबर-1 बनने की दौड़ में है, लेकिन कम फीडबैक से रैंकिंग प्रभावित हो सकती है। इंदौर की सफलता का राज जनता की भागीदारी और पॉजिटिव फीडबैक है।

BHOPAL: इस बार स्वच्छता सर्वेक्षण में सिर्फ सफाई नहीं, बल्कि जनता क्या सोचती है यही शहरों की रैंक तय करेगा। भोपाल नंबर-1 बनने की तैयारी में है, लेकिन असली परीक्षा सिटीजन फीडबैक की है। अभी फीडबैक कम है, जबकि इंदौर जैसे शहर इसी दम पर टॉप पर बने रहते हैं।



क्यों अहम है सिटीजन फीडबैक?

स्वच्छ सर्वेक्षण में कुल 12 हजार अंक हैं। इसमें 500 अंक सीधे जनता के फीडबैक से मिलेंगे। यानी शहर साफ है या नहीं अब इसका फैसला सिर्फ रिपोर्ट नहीं, बल्कि लोगों की राय भी करेगी।



इंदौर से सीख: फीडबैक ही नंबर-1 की कुंजी

पिछले सालों में इंदौर की सफलता के पीछे सबसे बड़ा कारण जनता की भागीदारी रही है। हर साल करीब 4.5 से 6.5 लाख लोगों ने फीडबैक दिया, जिसमें 95-96% पॉजिटिव रिस्पॉन्स रहा। इसी वजह से इंदौर लगातार देश में अव्वल बना हुआ है।



भोपाल की स्थिति: कोशिश तेज

भोपाल इस बार नंबर-1 की दौड़ में है, लेकिन अभी तक करीब 24,000 फीडबैक ही मिल पाए हैं। तुलना करें तो यह आंकड़ा लक्ष्य से काफी कम है, जिससे रैंकिंग पर असर पड़ सकता है।



अन्य शहरों की हालत भी चुनौतीपूर्ण

सिर्फ भोपाल ही नहीं, ग्वालियर, रीवा, जबलपुर जैसे शहर भी सिटीजन फीडबैक में पीछे चल रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि उज्जैन इस मामले में बेहतर प्रदर्शन कर रहा है और राष्ट्रीय स्तर पर आगे दिख रहा है।



न्यूनतम लक्ष्य: कितने फीडबैक जरूरी?

हर शहर को अपनी आबादी के कम से कम 10% लोगों का फीडबैक लेना अनिवार्य है। भोपाल के लिए यह आंकड़ा करीब 55 हजार सही फीडबैक का है। फीडबैक प्रक्रिया 27 अप्रैल से शुरू होकर 30 मई तक चलेगी। यानी आने वाले दिनों में नगर निगम के लिए सबसे बड़ी चुनौती लोगों को जोड़ना होगी।



पिछला प्रदर्शन: भोपाल ने किया है सुधार

  • भोपाल दूसरे स्थान पर रहा (10 लाख+ आबादी श्रेणी)।
  • इंदौर लगातार 8वीं बार नंबर-1 रहा।
  • उज्जैन भी टॉप शहरों में शामिल रहा।
  • मध्य प्रदेश के 8 शहरों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला।

सीधा सवाल: जनता साथ देगी तो ही बनेगा नंबर-1?

अब मुकाबला सिर्फ सफाई का नहीं, बल्कि जनभागीदारी का है। अगर लोग आगे बढ़कर फीडबैक देंगे, तो भोपाल के लिए नंबर-1 बनना आसान हो सकता है। वरना अच्छी व्यवस्था भी रैंकिंग में पीछे छूट सकती है। स्वच्छ सर्वेक्षण 2025 में जीत का फॉर्मूला साफ है सफाई + जनता की भागीदारी। भोपाल के पास मौका है, लेकिन असली ताकत अब लोगों के मोबाइल से दिए गए फीडबैक में छिपी है।



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