जबलपुर में बिना जांच के जारी नहीं होंगे टेंपरेरी परमिट
राज्यों में बसों के संचालन के लिए परमिटों को जारी किया जाता है। ऐसे में नियमित संचालित होने वाली बसों के लिए रेगुलर या स्थाई परमिट को जारी किया जाता है। लेकिन विशेष अवसरों पर अस्थाई परमिट को जारी करने का नियम होता है। आरटीओ जबलपुर के द्वारा बिना जांच किए अस्थाई परमिट जारी कर दिया गया था। जिसके खिलाफ बस ऑपरेटर के द्वारा हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई।
अस्थाई परमिट को चुनौती
पूर्व में जारी आदेशों का दिया गया हवाला
याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट में बताया कि मोटर वाहन अधिनियम की धारा 87(1)(c) में निर्धारित आवश्यकता को ध्यान में रखे बिना किसी व्यक्ति को निरंतरता में अस्थाई परमिट जारी नहीं किया जा सकता है। उन्होंने हाईकोर्ट के द्वारा पूर्व में किए गए निर्देशों का हवाला देते हुए बताया है कि परमिट जारी करने वाले संस्थान को इस बात को सुनिश्चित करना चाहिए कि उस मार्ग में पहले से कितनी बसों का संचालन है और नया अस्थाई परमिट जारी करने से नियमित संचालित बसों के समय चक्र में एवं आर्थिक रूप से किसी भी प्रकार का नुकसान ना हो। साथ ही विशिष्ट और विशेष आवश्यकता और अवसरों पर ही अस्थाई परमिट को जारी किया जाना चाहिए।
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HC ने परिवहन सचिव को जारी किए निर्देश
हाईकोर्ट में इस याचिका पर सुनवाई जस्टिस एम.एस.भट्टी की एकल पीठ में हुई। जिसमें उन्होंने मध्य प्रदेश राज्य के परिवहन सचिव को निर्देश जारी करते हुए, पूर्व में दाखिल याचिका WP 20305/2024 में जारी किए गए। आदेश को मध्य प्रदेश राज्य के सभी क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरणों के सचिवों को जारी करने के आदेश दिए हैं। जिससे भविष्य में अस्थाई परमिटों के लिए आवेदन पर विचार करते समय मोटर वाहन अधिनियम 87 (1) (सी) के संदर्भ में आवश्यकता पर विचार किया जा सके। इस आदेश के बाद याचिका का निपटारा किया गया।
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