डिप्टी कमिश्नर सरवटे के घर से मिली बाघ की खाल, वन विभाग ने की पुष्टि

Neel Tiwari | Jul 23, 2025, 15:04 IST
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आदिम जाति कल्याण विभाग के डिप्टी कमिश्नर सरवटे के घर से बाघ की खाल की बरामदगी ने पूरे विभाग को सकते में डाल दिया। वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत जांच जारी है।

आदिम जाति कल्याण विभाग के डिप्टी कमिश्नर जगदीश प्रसाद सरवटे के खिलाफ EOW के जरिए चल रही छापेमारी में अब वन्यजीव अधिनियम से जुड़ा गंभीर मामला भी सामने आया है। EOW की टीम को शंकर शाह नगर स्थित उनके सरकारी निवास की तलाशी के दौरान एक बाघ की खाल मिली। वहीं इसे तुरंत जब्त कर इसकी सूचना वन विभाग को दी गई। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और प्रारंभिक परीक्षण के बाद पुष्टि की कि बरामद वस्तु असली बाघ की खाल है।



मौके पर पहुंची वन विभाग की टीम

जबलपुर के DFO ऋषि मिश्रा ने पुष्टि करते हुए कहा कि यह खाल कितनी पुरानी है, किस स्थान से लाई गई है और किस घटना के बाद आरोपी के घर तक पहुंची है, इन सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। उन्होंने बताया कि जांच पूरी होने के बाद वन विभाग इस संबंध में भी अलग से आपराधिक प्रकरण दर्ज कर सकता है।



जगदीश सरवटे के घर से मिली बाघ की खाल मामले पर एक नजर...



  • आदिम जाति कल्याण विभाग के डिप्टी कमिश्नर जगदीश प्रसाद सरवटे के घर से बाघ की खाल मिली, जिसे वन विभाग ने असली बताया।
  • वन विभाग के अधिकारियों ने खाल की पुष्टि की और इसे वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत गंभीर अपराध माना।
  • सरवटे के घर से 56 शराब की बोतलें, लग्जरी वाहन, ज्वेलरी, और करीब 6 करोड़ रुपये की संपत्ति भी बरामद हो चुकी है।
  • EOW और वन विभाग मिलकर जांच कर रहे हैं, ताकि घटना की कड़ियां जोड़ सकें।
  • यदि खाल संरक्षित वन्यजीव से संबंधित साबित होती है, तो सरवटे के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत सात साल तक की सजा और जुर्माना हो सकता है।

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महंगी शराब के साथ अब बाघ की खाल

इससे पहले EOW की कार्रवाई में डिप्टी कमिश्नर सरवटे के सरकारी और निजी निवासों से 56 महंगी शराब की बोतलें, 17 से अधिक अचल संपत्तियों के दस्तावेज, सोने-चांदी के जेवरात, लग्जरी वाहन, और करीब 6 करोड़ रुपए की आय से अधिक संपत्ति उजागर हो चुकी है। लेकिन अब बाघ की खाल मिलने के बाद यह मामला सिर्फ आर्थिक अनियमितताओं का नहीं, बल्कि विलासिता और वन्यजीव अपराध से जुड़ी एक बड़ी घटना में तब्दील हो गया है।



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कई विभागों की निगाहें अब इस मामले पर

सरवटे के खिलाफ अब आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) के साथ-साथ वन विभाग भी स्वतंत्र जांच शुरू कर चुका है। दोनों विभागों के बीच समन्वय से दस्तावेज, साक्ष्य और घटनाक्रमों की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं।



कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि यह साबित हो जाता है कि खाल संरक्षित वन्यजीव से संबंधित है, तो सरवटे के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की धारा 9, 39, 50 और 51 के तहत मामला दर्ज हो सकता है, जिसमें सात साल तक की सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान है।



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