परिवहन विभाग की प्राथमिकता पर सवाल! वसूली में रफ्तार, जनता के कार्ड पर दो साल की चुप्पी

Ramanand Tiwari | Jul 19, 2026, 20:27 IST
परिवहन विभाग की प्राथमिकता पर सवाल
मध्यप्रदेश परिवहन विभाग में आरसी और ड्राइविंग लाइसेंस हार्डकॉपी वितरण में दो साल की देरी पर सवाल उठे हैं। 44 करोड़ राजस्व के बावजूद सुविधा अटकी रही।

समझें क्या है पूरा मामला

  • MP में RC और DL हार्डकॉपी वितरण अटका रहा।
  • करीब दो साल तक कार्ड व्यवस्था प्रभावित रही।
  • विभाग हर साल 44 करोड़ शुल्क प्राप्त करता है।
  • टेंडर प्रक्रिया में देरी से परेशानी बढ़ी।
  • मंत्री ने जल्द कार्ड उपलब्ध कराने की बात कही।

परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे

मध्यप्रदेश परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। विभाग लगातार राजस्व वसूली, जांच और दूसरे मामलों को लेकर सुर्खियों में रहा, लेकिन आम नागरिकों से जुड़ा सबसे बुनियादी काम-आरसी और ड्राइविंग लाइसेंस की हार्डकॉपी उपलब्ध कराना-करीब दो साल तक अटका रहा। सवाल यह है कि जब जनता से शुल्क लगातार लिया जा रहा था, तब व्यवस्था सुधारने की पहल समय पर क्यों नहीं हुई?



विभाग की सक्रियता सिर्फ वसूली तक सीमित?

पिछले दो वर्षों में परिवहन विभाग कई कारणों से चर्चा में रहा। विभाग पर गंभीर आरोप लगे, चर्चित प्रकरण सामने आए और राजस्व वसूली के आंकड़े भी बढ़ते रहे। लेकिन जब बात लाखों वाहन मालिकों को उनके वैध दस्तावेज उपलब्ध कराने की आई, तो विभाग की कार्यशैली सुस्त नजर आई। टेंडर निरस्त होने के बाद भी नई व्यवस्था समय पर तैयार नहीं हो सकी।



जनता का काम दो साल तक क्यों अटका रहा?

ड्राइविंग लाइसेंस और आरसी की हार्डकॉपी के लिए निर्धारित शुल्क लगातार लिया जाता रहा। इसके बावजूद लाखों लोगों को उनके कार्ड नहीं मिले। विभाग यह भी स्पष्ट नहीं कर पाया कि नया टेंडर जारी करने और व्यवस्था बहाल करने में आखिर दो साल क्यों लग गए।



परिवहन मंत्री की कार्यप्रणाली पर भी उठ रहे सवाल

परिवहन मंत्री राव उदय प्रताप सिंह के विभाग में आखिर ऐसी कौन-सी प्रशासनिक बाधा थी, जिसने जनता से जुड़े इस काम को वर्षों तक लंबित रखा? अगर विभाग दूसरे मामलों में लगातार सक्रिय था, तो लाखों नागरिकों के कार्ड का मुद्दा प्राथमिकता क्यों नहीं बन पाया?



44 करोड़ का राजस्व, लेकिन सुविधा अधूरी

प्रदेश में हर साल करीब 16 लाख नए वाहनों का पंजीयन होता है। आरसी कार्ड शुल्क से लगभग 32 करोड़ रुपए और ड्राइविंग लाइसेंस कार्ड से करीब 12 करोड़ रुपए की आय होती है। यानी सरकार को हर साल लगभग 44 करोड़ रुपए मिलते हैं। इसके बावजूद कार्ड वितरण की व्यवस्था दो साल तक ठप रही।



मामला सिर्फ कार्ड का नहीं, प्रशासनिक जवाबदेही का है यह विवाद केवल आरसी और लाइसेंस की हार्डकॉपी का नहीं है। असल सवाल यह है कि यदि कोई व्यवस्था बाधित होती है, तो उसे बहाल करने में विभाग को दो साल क्यों लगते हैं? क्या इसकी जिम्मेदारी तय होगी या मामला सिर्फ नई घोषणा तक सीमित रहेगा?



हर साल लगभग 44 करोड़ कार्ड शुल्क से

परिवहन मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने इस मुद्दे पर कहा कि नई एजेंसी के चयन की प्रक्रिया पूरी होने और टेंडर जारी होने के बाद संबंधित कार्य शुरू कर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि जिन हितग्राहियों की फीस जमा है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर उनके कार्ड उपलब्ध कराए जाएंगे।



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