जनजातीय कार्य विभाग के स्कूलों में एलईडी-कम्प्यूटर खरीद के 242 करोड़ के टेंडर में मनमानी
News in Short
- 4 लाख रुपए कीमत की LED को 10.89 लाख में खरीदने की तैयारी।
- 242 करोड़ के टेंडर में 94 एलईडी खरीदने पर होगा 98 करोड़ का नुकसान।
- मनमानी शर्तों के कारण प्रतिस्पर्धा से बाहर हुई फर्मों ने की है शिकायत।
- 1.08 लाख का ऑल इन वन कंप्यूटर 59 हजार रुपए मंहगा खरीद रहा विभाग।
- टेंडर में AMD Pro 665 चिपसेट की शर्त ने कंपनियों को किया बाहर।
News in Detail
मध्य प्रदेश के ट्राइबल विभाग यानी जनजातीय कार्य विभाग पर बड़ा घोटाले का आरोप लगा है। विभाग स्कूलों के नाम पर 2 अरब 42 करोड़ का टेंडर कर रहा है। पर इसमें बाजार से दोगुने-तिगुने रेट पर सामान खरीदा जा रहा है। शिकायत मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव तक पहुंच गई है। कंपनियों की शिकायत है कि अधिकारियों ने पहले ही चहेती कंपनी को काम देने की तैयारी कर ली थी। इसी वजह से शर्तों को बदला गया। अधिकारियों के इस रवैए से जनजातीय कार्य विभाग को 98.02 करोड़ का अतिरिक्त भुगतान करना पड़ेगा।
कहां हो रही गड़बड़ी
विभाग ने इंटरएक्टिव पैनल, कंप्यूटर, LED टीवी समेत कई सामान की खरीदी का टेंडर जारी किया है। टेंडर बिड नंबर 2026-टीएडी-481200-1 में शामिल उपकरणों की दर बाजार में उपलब्ध मूल्य से अधिक रखी गई है। यानी जो उपकरण 1 लाख रुपए में उपलब्ध है उसी के समान गुणवत्ता का कम्प्यूटर ट्राइबल विभाग 59 हजार रुपए मंहगा खरीदने तैयार है। वहीं चार लाख में मिलने वाली एलईडी को करीब 11 लाख में खरीदने का करार कर लिया गया है। बाजार मूल्य से ज्यादा कीमत पर कम्प्यूटर और एलईडी की खरीदने की जल्दबाजी घोटाले की ओर इशारा कर रही है।
मनमाने टेंडर में रेट का खेल
1.95 इंच LED टीवी: विभाग 10.89 लाख में खरीदेगा जबकि बाजार में प्रचलित कीमत 4 लाख रुपए है। यानी पौने तीन गुना कीमत पर ट्राइबल विभाग 94 टीवी खरीदने जा रहा है। इसके लिए प्रति एलईडी 6.89 लाख रुपए का अधिक भुगतान करना होगा और विभाग को 6.47 करोड़ का चूना लगेगा।
2. ऑल इन वन कंप्यूटर नेटवर्किंग के साथ: विभाग का रेट 1 लाख 67 हजार 900 रुपए। वहीं प्रतिस्पर्धी कंपनी को रेट 1.08 लाख रुपए। विभाग ने 1.68 लाख रुपए में खरीदने की तैयारी की है। यानी प्रत्येक कम्प्यूटर पर 3,760 रुपए ज्यादा चुकाने होंगे और पूरे सौदे पर 22.18 करोड़ का अतिरक्त भार आएगा।
3. सामान्य ऑल इन वन कंप्यूटर: विभाग का रेट 1,56,900 रुपए जबकि बाजार में समान गुणवत्ता का सिस्टम 98,000 रुपए में मिल रहा। विभाग ने जो करार किया है उससे प्रति कम्प्यूटर 58 हजार का नुकसान होगा।
4. इंटरैक्टिव पैनल: विभाग का रेट 4 लाख 22 हजार 300 रुपए जबकि टेंडर में शामिल दूसरी कंपनी 2.20 लाख में देने को तैयार थी। इस सौदे से विभाग को प्रति पैनल 2.02 लाख रुपए अधिक चुकाने होंगे।
5. मल्टीफंक्शन प्रिंटर: विभाग 44,900 में खरीद रहा है। जबकि बाजार में यह 40,900 में उपलब्ध है। इस लिहाज से विभाग को हर प्रिंटर पर 4000 रुपए का नुकसान।
शर्तों की बाजीगरी से तोड़ी प्रतिस्पर्धा
टेंडर में ऐसी शर्तें रखी गईं कि ज्यादातर कंपनियां बाहर हो गईं। उबंटू सर्टिफाइड कंप्यूटर और AMD Pro 665 चिपसेट अनिवार्य किया गया था। प्रतिस्पर्धा में शामिल हुई एक कंपनी ने इसकी शिकायत की है। कंपनी का कहना है AMD Pro 665 नाम से कोई चिपसेट बनता ही नहीं है। इसके साथ ही 50% जिलों में एक साल पुराना सर्विस सेंटर होने की शर्त भी जोड़ी गई। वहीं मप्र भंडार क्रय नियम 2015 के उल्लंघन की बात भी सामने आई है।
विभाग करता रहा अनसुनी
एक कंपनी ने मार्च 2026 में ई-मेल से गड़बड़ी की आशंका जताई थी। इसमें भी एक फर्म को फायदा पहुंचाने के लिए शर्तों में बदलाव और विभाग को करोड़ों की क्षति पहुंचाने के तथ्यों की जानकारी का उल्लेख किया गया था। अधिकारियों ने इस पर ध्यान नहीं दिया और टेंडर खोल दिया गया। अब मनमाने रेट पर खरीदी हो रही है।
बिड की सहभागी कंपनियों की शिकायत
टेंडर में पक्षपात को लेकर दो कंपनियों ने CM और मुख्य सचिव से शिकायत की है। जिसके अनुसार जो उपकरण और सामग्री तय मानकों के आधार पर वे 98.02 करोड़ कम में देने को तैयार थे। विभाग ने शर्तों की मनमानी के सहारे उन्हें बोली से ही बाहर कर दिया है।
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