एमपी में NGO का खेल, कागजों में डेढ़ लाख, दर्पण पोर्टल पर वेरिफिकेशन कराने पहुंचें केवल 8148
Sanjay Dhiman | May 26, 2026, 16:44 IST
Photograph: (the sootr)
मध्य प्रदेश में डेढ़ लाख से ज्यादा एनजीओ में से 94% का ऑनलाइन रिकॉर्ड गायब है। नीति आयोग के दर्पण पोर्टल पर सिर्फ 8148 संस्थाएं ही रजिस्टर्ड हैं। जबकि पोर्टल पर पंजीयन अनिवार्य किया गया है।
मध्यप्रदेश में सामाजिक काम करने वाले गैर सरकारी संगठनों यानी NGO को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है। प्रदेश में करीब डेढ़ लाख पंजीकृत संस्थाएं मौजूद हैं। लेकिन इनमें से केवल 8148 संस्थाओं ने ही केंद्र सरकार के ‘NGO दर्पण पोर्टल’ पर अपना वेरिफिकेशन कराया है।
यानी 94 प्रतिशत से ज्यादा संस्थाएं अब भी सरकार की डिजिटल निगरानी व्यवस्था से बाहर हैं। यही वजह है कि अब इन संस्थाओं की फंडिंग, गतिविधियों और वित्तीय पारदर्शिता पर सवाल खड़े होने लगे हैं।
विशेषज्ञ मान रहे हैं कि आने वाले समय में ऐसे NGO(Non governmental organization) की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। क्योंकि अब केंद्र और एमपी सरकार दोनों ही डिजिटल वेरिफिकेशन को अनिवार्य बना रहे हैं।
NGO दर्पण पोर्टल (NGO Darpan Portal) नीति आयोग द्वारा संचालित राष्ट्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म है। इस पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करने के बाद हर संस्था को एक यूनिक दर्पण आईडी मिलती है। यही आईडी सरकारी योजनाओं, अनुदान, टेंडर और कई वित्तीय प्रक्रियाओं के लिए जरूरी मानी जाती है।
सरकार इसी पोर्टल के जरिए संस्था की वित्तीय और प्रशासनिक जानकारी का डिजिटल वेरिफिकेशन करती है।
![c9d17a2d-a23]()
हैरानी वाली बात यह है कि दर्पण पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन पूरी तरह मुफ्त और ऑनलाइन है। इसके लिए किसी सरकारी फीस की जरूरत नहीं पड़ती। इसके बावजूद हजारों संस्थाएं अब तक इस प्रक्रिया से दूर बनी हुई हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि कई संस्थाएं(NGO) अपनी वित्तीय जानकारी सार्वजनिक नहीं करना चाहतीं। कुछ संस्थाएं सिर्फ कागजों में सक्रिय हैं। जबकि कई संस्थाएं वर्षों से अपडेट ही नहीं हुईं। यही कारण है कि डिजिटल वेरिफिकेशन से दूरी बनाई जा रही है।
यदि सभी संस्थाएं दर्पण पोर्टल पर रजिस्टर हो जाएं, तो सरकार के पास कई महत्वपूर्ण जानकारियां उपलब्ध होंगी।
जैसे:
प्रदेश की कई संस्थाएं सांसद निधि, विधायक निधि, CSR फंड, NABARD, SIDBI और विदेशी संस्थाओं से आर्थिक सहायता लेती हैं। इसके अलावा महिला स्व-सहायता समूहों और ऑनलाइन क्राउड फंडिंग के जरिए भी कई संस्थाओं को फंड मिलता है।
अब सरकार ने साफ कर दिया है कि सरकारी अनुदान और परियोजनाओं के लिए दर्पण आईडी जरूरी होगी। यानी बिना डिजिटल वेरिफिकेशन के सरकारी सहायता मिलना लगभग मुश्किल हो जाएगा।
विशेषज्ञों के अनुसार अब दर्पण आईडी सिर्फ सरकारी फंड तक सीमित नहीं रह गई है। विदेशी फंडिंग यानी FCRA, आयकर अधिनियम की 12A और 80G जैसी प्रक्रियाओं में भी इसका महत्व बढ़ गया है।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जो संस्थाएं पोर्टल पर पंजीकृत नहीं हैं, उन्हें आखिर फंडिंग कहां से मिल रही है?
दर्पण पोर्टल पर सिर्फ एक बार जानकारी भर देने से काम खत्म नहीं होगा। यदि संस्था की कार्यकारिणी बदलती है, नए पदाधिकारी आते हैं या प्रशासनिक बदलाव होते हैं, तो उनकी जानकारी भी अपडेट करनी होगी।
सोसायटी एक्ट की धारा 27 और 28 के तहत यह प्रक्रिया अनिवार्य मानी गई है। अब सरकार फंड जारी करने से पहले डिजिटल वेरिफिकेशन करेगी।
सामाजिक क्षेत्र में काम करने वाली संस्थाएं सीधे जनता और सरकारी योजनाओं से जुड़ी होती हैं। यदि उनका रिकॉर्ड पारदर्शी नहीं होगा, तो फंडिंग के दुरुपयोग और फर्जी संस्थाओं का खतरा बढ़ सकता है। इसी वजह से अब सरकार NGO सेक्टर को पूरी तरह डिजिटल निगरानी में लाने की तैयारी कर रही है।
डिजिटल CR व्यवस्था में फंसे कर्मचारी, फाइल लेकर साहबों के पीछे घूम रहे अधिकारी
शिशु मृत्यू दर में एमपी नंबर दो पर, हर तीसरा बच्चा कुपोषण का शिकार, SRS रिपोर्ट में खुलासा
एमपी में चेकपोस्ट पर रोक, लेकिन सबसे बड़ी बालसमुद सेंधवा चौकी पर पत्थर रख रोक रहे ट्रक, हो रही वसूली
एमपी में MSP पर गेहूं खरीदी का रिकॉर्ड, देश में नंबर-1 बना मध्य प्रदेश
यानी 94 प्रतिशत से ज्यादा संस्थाएं अब भी सरकार की डिजिटल निगरानी व्यवस्था से बाहर हैं। यही वजह है कि अब इन संस्थाओं की फंडिंग, गतिविधियों और वित्तीय पारदर्शिता पर सवाल खड़े होने लगे हैं।
विशेषज्ञ मान रहे हैं कि आने वाले समय में ऐसे NGO(Non governmental organization) की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। क्योंकि अब केंद्र और एमपी सरकार दोनों ही डिजिटल वेरिफिकेशन को अनिवार्य बना रहे हैं।
क्या है NGO दर्पण पोर्टल?
सरकार इसी पोर्टल के जरिए संस्था की वित्तीय और प्रशासनिक जानकारी का डिजिटल वेरिफिकेशन करती है।
c9d17a2d-a23
सिर्फ 8148 संस्थाएं ही क्यों पहुंचीं पोर्टल तक?
विशेषज्ञों का कहना है कि कई संस्थाएं(NGO) अपनी वित्तीय जानकारी सार्वजनिक नहीं करना चाहतीं। कुछ संस्थाएं सिर्फ कागजों में सक्रिय हैं। जबकि कई संस्थाएं वर्षों से अपडेट ही नहीं हुईं। यही कारण है कि डिजिटल वेरिफिकेशन से दूरी बनाई जा रही है।
दर्पण पोर्टल से क्या-क्या खुलासा हो सकता है?
जैसे:
- कौन सी संस्था वास्तव में काम कर रही है
- कौन सिर्फ कागजों में मौजूद है
- किस संस्था को कहां से फंड मिल रहा है
- पैसा किन परियोजनाओं में खर्च हो रहा है
- कौन सी संस्था वर्षों से निष्क्रिय है
सरकारी फंड चाहिए तो दर्पण आईडी जरूरी
अब सरकार ने साफ कर दिया है कि सरकारी अनुदान और परियोजनाओं के लिए दर्पण आईडी जरूरी होगी। यानी बिना डिजिटल वेरिफिकेशन के सरकारी सहायता मिलना लगभग मुश्किल हो जाएगा।
FCRA और 80G में भी बढ़ी दर्पण आईडी की अहमियत
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जो संस्थाएं पोर्टल पर पंजीकृत नहीं हैं, उन्हें आखिर फंडिंग कहां से मिल रही है?
सिर्फ रजिस्ट्रेशन नहीं, अपडेट भी जरूरी
सोसायटी एक्ट की धारा 27 और 28 के तहत यह प्रक्रिया अनिवार्य मानी गई है। अब सरकार फंड जारी करने से पहले डिजिटल वेरिफिकेशन करेगी।
विशेषज्ञ क्यों मान रहे हैं इसे बड़ा मुद्दा?
FAQ
- NGO दर्पण पोर्टल क्या है?
NGO दर्पण पोर्टल नीति आयोग का डिजिटल प्लेटफॉर्म है। यहां NGO का ऑनलाइन वेरिफिकेशन किया जाता है। संस्था को यूनिक दर्पण आईडी मिलती है। - दर्पण आईडी क्यों जरूरी मानी जा रही है?
सरकारी अनुदान, CSR फंड, FCRA और कई योजनाओं में दर्पण आईडी जरूरी हो चुकी है। बिना इसके फंडिंग प्रभावित हो सकती है। - दर्पण पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन नहीं होने से क्या नुकसान होगा?
ऐसी संस्थाओं को भविष्य में बैंकिंग, KYC और सरकारी योजनाओं में दिक्कत आ सकती है। वित्तीय जांच भी बढ़ सकती है।
डिजिटल CR व्यवस्था में फंसे कर्मचारी, फाइल लेकर साहबों के पीछे घूम रहे अधिकारी
शिशु मृत्यू दर में एमपी नंबर दो पर, हर तीसरा बच्चा कुपोषण का शिकार, SRS रिपोर्ट में खुलासा
एमपी में चेकपोस्ट पर रोक, लेकिन सबसे बड़ी बालसमुद सेंधवा चौकी पर पत्थर रख रोक रहे ट्रक, हो रही वसूली
एमपी में MSP पर गेहूं खरीदी का रिकॉर्ड, देश में नंबर-1 बना मध्य प्रदेश
20 हजार करोड़ रुपए के बकाया चालान: सुप्रीम कोर्ट ने दिए अनोखे सुझाव: बिजली बिल में जुड़ सकती है चालान की राशि
By Neel Tiwari
छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें
By Arun Tiwari
मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी
By Sandeep Kumar
IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी
By VINAY VERMA
राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं
By Ashish Bhardwaj
पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई
By Arun Tiwari
भोपाल की सेज यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा: हॉस्टल मेस के खाने में कीड़े मिलने का आरोप, अब खाद्य विभाग करेगा जांच
By Jitendra Shrivastava