एमपी सरकार फिर से ले रही 2800 करोड़ का कर्ज, चालू वित्त वर्ष में चौथी बार
Sandeep Kumar | May 26, 2026, 16:37 IST
mp government 2800 crore loan
मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार एक बार फिर 2800 करोड़ रुपए का कर्ज लेने जा रही है। बताया जा रहा है कि चालू वित्त वर्ष 2026-27 में यह चौथी बार है, जब सरकार ने बाजार से उधार लेने का फैसला किया है।
मध्यप्रदेश सरकार लगातार बाजार से कर्ज उठा रही है। अब सरकार 2800 करोड़ रुपए का नया ऋण लेने जा रही है। यह कर्ज RBI के ई-कुबेर प्लेटफॉर्म के जरिए लिया जाएगा। चालू वित्त वर्ष 2026-27 में यह चौथी बार है, जब सरकार ने बाजार से उधार लेने का फैसला किया है। यह राशि दो अलग-अलग हिस्सों में बाजार से उठाई जाएगी। पहली किस्त 1600 करोड़ रुपए की रहेगी। दूसरी किस्त 1200 करोड़ रुपए की तय हुई है।
वित्त विभाग (Finance Department) की अधिसूचना के अनुसार यह कर्ज राज्य विकास ऋण (State Development Loan) के तहत लिया जाएगा। इसके लिए आरबीआई का ई-कुबेर प्लेटफॉर्म इस्तेमाल होगा। दोनों ऋणों के लिए सिक्योरिटी की नीलामी कराई जाएगी। भुगतान प्रक्रिया 27 मई 2026 तक पूरी होगी।
पहले ऋण पर 7.64 प्रतिशत ब्याज तय किया गया है। दूसरे ऋण पर 7.83 प्रतिशत ब्याज देना होगा। सरकार दोनों कर्जों की अदायगी छह माही किस्तों में करेगी। भुगतान अप्रैल और अक्टूबर महीने में होगा।
ई-कुबेर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) का कोर बैंकिंग सॉल्यूशन (CBS) प्लेटफॉर्म है। इसे 2012 में लॉन्च किया गया था। यह केंद्रीयकृत, सुरक्षित और कागज रहित इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग प्रणाली है, जिसका उपयोग वाणिज्यिक बैंकों, वित्तीय संस्थानों और केंद्र व राज्य सरकारों द्वारा RBI के साथ लेनदेन करने के लिए किया जाता है।
सरकार का पहला कर्ज वर्ष 2034 तक रहेगा। दूसरा कर्ज वर्ष 2048 तक की अवधि के लिए रहेगा। यानी सरकार अगले 22 वर्षों तक यह ऋण चुकाएगी। इससे साफ है कि राज्य पर दीर्घकालिक वित्तीय बोझ बढ़ने वाला है।
आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय वाले कर्ज भविष्य के बजट पर दबाव डालते हैं। ब्याज भुगतान में बड़ी राशि खर्च होती है। इससे नई योजनाओं के लिए वित्तीय गुंजाइश कम हो सकती है।
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एमपी सरकार ने इस बार अप्रैल महीने से ही कर्ज लेना शुरू कर दिया था। पहले आमतौर पर मई महीने से ऋण प्रक्रिया शुरू होती थी। अप्रैल में सरकार ने दो चरणों में 4600 करोड़ रुपए उठाए थे।
इसके बाद मई महीने में 1800 करोड़ रुपए का कर्ज लिया गया। अब फिर 2800 करोड़ रुपए का नया ऋण लिया जा रहा है। इस तरह चालू वित्त वर्ष में कुल कर्ज 9200 करोड़ रुपए पहुंच गया है।
विपक्ष लगातार सरकार की आर्थिक स्थिति पर सवाल उठा रहा है। विपक्ष का कहना है कि राज्य की वित्तीय हालत कमजोर होती जा रही है। हालांकि सरकार इन आरोपों को खारिज कर रही है।
राज्य सरकार का दावा है कि यह राशि विकास योजनाओं में खर्च होगी। इसमें सिंचाई परियोजनाएं शामिल रहेंगी। ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े कामों में भी पैसा लगाया जाएगा। कृषि विकास और आधारभूत संरचना पर भी खर्च किया जाएगा।
सरकार का कहना है कि विकास कार्यों के लिए पूंजी जुटाना जरूरी है। बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए बाजार से संसाधन जुटाए जाते हैं। इसी कारण राज्य विकास ऋण जारी किया गया है।
राजपत्र में जारी संशोधित आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025-26 में राज्य की राजस्व प्राप्ति लगभग 2.79 लाख करोड़ रुपए आंकी गई है। वहीं राजस्व व्यय भी लगभग समान बताया गया है। इससे संकेत मिलता है कि सरकार पर खर्च का दबाव लगातार बढ़ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आय और व्यय का अंतर कम रहेगा, तो सरकार को बार-बार बाजार से कर्ज लेना पड़ सकता है। इससे आने वाले वर्षों में वित्तीय प्रबंधन चुनौतीपूर्ण बन सकता है।
प्रदेश में बढ़ते सरकारी कर्ज को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। विपक्ष सरकार को आर्थिक प्रबंधन में असफल बता रहा है। वहीं सरकार विकास योजनाओं को इसका कारण बता रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले समय में सरकारी ऋण बड़ा चुनावी मुद्दा बन सकता है। जनता भी जानना चाहती है कि आखिर इतना बड़ा कर्ज किन योजनाओं पर खर्च होगा।
मोहन यादव सरकार पर कुल कर्ज का आंकड़ा 5.20 लाख करोड़ के पार पहुंच गया है। बजट में तय अनुमान से भी करीब ₹80,000 करोड़ से ज्यादा का कर्ज राज्य पर हो चुका है, जिसे चुकाने और विकास कार्यों को जारी रखने के लिए सरकार लगातार नए ऋण ले रही है।
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आरबीआई से उठाया जाएगा ऋण
पहले ऋण पर 7.64 प्रतिशत ब्याज तय किया गया है। दूसरे ऋण पर 7.83 प्रतिशत ब्याज देना होगा। सरकार दोनों कर्जों की अदायगी छह माही किस्तों में करेगी। भुगतान अप्रैल और अक्टूबर महीने में होगा।
क्या है आरबीआई का ई-कुबेर प्लेटफॉर्म
2048 तक चुकाना होगा कर्ज
आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय वाले कर्ज भविष्य के बजट पर दबाव डालते हैं। ब्याज भुगतान में बड़ी राशि खर्च होती है। इससे नई योजनाओं के लिए वित्तीय गुंजाइश कम हो सकती है।
चालू वित्त वर्ष में कुल कर्ज 9200 करोड़
ChatGPT Image May 26, 2026, 04_32_44 PM
एमपी सरकार ने इस बार अप्रैल महीने से ही कर्ज लेना शुरू कर दिया था। पहले आमतौर पर मई महीने से ऋण प्रक्रिया शुरू होती थी। अप्रैल में सरकार ने दो चरणों में 4600 करोड़ रुपए उठाए थे।
इसके बाद मई महीने में 1800 करोड़ रुपए का कर्ज लिया गया। अब फिर 2800 करोड़ रुपए का नया ऋण लिया जा रहा है। इस तरह चालू वित्त वर्ष में कुल कर्ज 9200 करोड़ रुपए पहुंच गया है।
विपक्ष लगातार सरकार की आर्थिक स्थिति पर सवाल उठा रहा है। विपक्ष का कहना है कि राज्य की वित्तीय हालत कमजोर होती जा रही है। हालांकि सरकार इन आरोपों को खारिज कर रही है।
विकास योजनाओं पर रहेगा फोकस
सरकार का कहना है कि विकास कार्यों के लिए पूंजी जुटाना जरूरी है। बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए बाजार से संसाधन जुटाए जाते हैं। इसी कारण राज्य विकास ऋण जारी किया गया है।
बजट आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आय और व्यय का अंतर कम रहेगा, तो सरकार को बार-बार बाजार से कर्ज लेना पड़ सकता है। इससे आने वाले वर्षों में वित्तीय प्रबंधन चुनौतीपूर्ण बन सकता है।
बढ़ते कर्ज पर राजनीतिक बहस
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले समय में सरकारी ऋण बड़ा चुनावी मुद्दा बन सकता है। जनता भी जानना चाहती है कि आखिर इतना बड़ा कर्ज किन योजनाओं पर खर्च होगा।
अबतक कितना कर्ज ले चुकी है सरकार
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