महाकाल नगरी उज्जैन से जुड़ेगा दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे, सिंहस्थ से पहले होगा तैयार

Aman Vaishnav | Mar 11, 2026, 09:43 IST
ujjain delhi mumbai expressway connectivity highway project approved
उज्जैन को दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से जोड़ने वाले प्रोजेक्ट को मंगलवार 10 मार्च मंजूरी मिल गई। प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट ने इस 4-लेन हाईवे को हरी झंडी दिखा दी है। खास बात ये है कि प्रोजेक्ट का काम मार्च 2028 तक पूरा हो जाएगा।

महाकाल नगरी उज्जैन को दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से जोड़ने के लिए एक 4-लेन हाईवे प्रोजेक्ट को मंजूरी मिल गई। ये मंजूरी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने दी है। इस प्रोजेक्ट पर तीन हजार 839 करोड़ रुपए खर्च होंगे।



मार्च 2028 तक पूरा होगा प्रोजेक्ट

मुख्य सचिव अनुराग जैन की पहल पर इसे मई 2025 में नेशनल हाईवे घोषित किया गया था। छह महीने में डीपीआर तैयार की गई और जमीन अधिग्रहण का काम तीन महीने में पूरा हो गया था। मुआवजे की प्रक्रिया बुधवार 11 मार्च से शुरू हो जाएगी। इस प्रोजेक्ट के टेंडर 17 मार्च को लगेंगे। साथ ही अप्रैल 2026 से काम शुरू होकर मार्च 2028 तक पूरा हो जाएगा।



सफर में होगी दो घंटे की बचत

इस हाईवे का सबसे बड़ा फायदा यह है कि, यह एनएच-752डी के बदनावर-पेटलावद-थांदला-टिमरवानी सेक्शन को 4-लेन में अपग्रेड करेगा। वर्तमान में इस हिस्से में सड़क की चौड़ाई सिर्फ 5.5 मीटर है। इससे वाहनों की गति 20-50 किमी प्रति घंटा रहती है। इस सड़क को 4-लेन बनाने के बाद वाहनों की गति 80-100 किमी प्रति घंटा तक हो जाएगी। इससे सफर में करीब डेढ़ से दो घंटे की बचत होगी।



श्रद्धालुओं और पर्यटकों को मिलेगी राहत

यह हाईवे गुजरात और महाराष्ट्र से उज्जैन आने का सबसे छोटा मार्ग होगा। इससे श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बड़ी राहत मिलेगी। इसके साथ ही उद्योगों को भी फायदा होगा। इससे माल ढुलाई की लागत कम होगी और औद्योगिक क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा।



केंद्र सरकार ने एफडीआई नियमों में दी ढील

केंद्र सरकार ने मंगलवार को चीन, पाकिस्तान, बांग्लादेश भूटान सहित कई देशों के लिए एफडीआई (प्रत्यक्ष विदेशी निवेश) नियमों में ढील देने का फैसला किया है।



अब यदि इन देशों के निवेशकों की किसी विदेशी कंपनी में हिस्सेदारी 10% तक है, तो उन्हें भारत में निवेश करने के लिए सरकार से मंजूरी नहीं लेनी पड़ेगी। पहले इन देशों के निवेशकों का किसी कंपनी में एक भी शेयर होता था, तो भारत में निवेश करने के लिए सरकारी मंजूरी जरूरी होती थी।



अब कुछ पुराने नियम जैसे सेक्टोरल कैप और एंट्री रूट पहले की तरह लागू रहेंगे। यह बदलाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में किया गया है। कोविड-19 के दौरान सरकार ने भारतीय कंपनियों का अधिग्रहण रोकने के लिए एफडीआई नीति में बदलाव किया था।



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