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INDORE. सिंहस्थ महापर्व को देखते हुए मध्यप्रदेश सरकार लगातार कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर दे रही है। इसमें इंदौर-उज्जैन के बीच ग्रीन फील्ड कॉरिडोर भी अहम है।
इस प्रोजेक्ट की एक बड़ी बाधा दूर हो गई है। जमीन अधिग्रहण को लेकर 20 गांवों के 662 किसानों को 626 करोड़ 49 लाख का अवॉर्ड पारित किया गया है।
किसानों की सुनवाई के बाद अवॉर्ड
यह फोरलेन कॉरिडोर इंदौर के पितृ पर्वत से उज्जैन के चिंतामन गणेश मंदिर तक 48 किमी लंबा है। लागत दो हजार करोड़ रुपए है। सिंहस्थ 2028 के लिए यह कॉरिडोर अहम है।
इंदौर जिला प्रशासन ने 20 गांवों के 662 किसानों की सुनवाई कर यह अवॉर्ड पारित किया है। इसके साथ ही अब जमीन लेने का काम शुरू हो जाएगा। कलेक्टर शिवम वर्मा ने एसडीओ के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
प्रोजेक्ट में 175 हेक्टेयर जमीन इंदौर की
प्रोजेक्ट में इंदौर जिले में इसके लिए 175 हेक्टेयर से अधिक जमीन ली जानी है। इसमें हातोद तहसील के 255 किसानों की 75 हेक्टेयर, सांवेर में 395 किसानों की करीब 100 हेक्टेयर जमीन है।
किसानों की संख्या और मुआवजे को देखा जाए तो औसतन 95 लाख रुपए प्रति किसान को मुआवजा मिलेगा।
यह है नया ग्रीन कॉरिडोर
- यह नया कॉरिडोर एक्सेस कंट्रोल्ड फोरलेन होगा। यानी इसमें कोई भी बीच में नहीं घुस सकेगा। तय जगह से ही इंट्री और एक्जिट होगा।
- प्रोजेक्ट इंदौर में पितृ पर्वत से उज्जैन के चिंतामन गणेश मंदिर तक है।
- यह कुल 48.10 किमी लंबा होगा।
- हाईवे की चौड़ाई कुछ जगह 45 मीटर तो कुछ जगह 60 मीटर है।
- प्रोजेक्ट की लागत 2000 करोड़ रुपए है। इसमें 1089 करोड़ निर्माण पर और बाकी जमीन अधिग्रहण पर खर्च हो रहे हैं।
- प्रोजेक्ट एमपीआरडीसी द्वारा बनाया जा रहा है, इसका टेंडर लुधियाना की कंपनी सीगल इन्फ्रा प्रोजेक्ट्स प्रा.लि. को मिला है।
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