उज्जैन सिंहस्थ 2028 की तैयारी, सिस्टम की रफ्तार बनी परीक्षा

उज्जैन सिंहस्थ महाकुंभ 2028 की तैयारियां धीमी गति से चल रही हैं। 132 प्रोजेक्ट्स के लिए 12 हजार करोड़ के बजट तय है। इसमें सिर्फ 700 करोड़ के काम शुरू हुए हैं।

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Ramanand Tiwari
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Photograph: (THESOOTR)

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UJJAIN. मार्च–अप्रैल 2028 में होने वाले सिंहस्थ महाकुंभ को लेकर उज्जैन में तैयारियां कागजों से जमीन पर उतर चुकी हैं। लेकिन दो साल से भी कम समय में 10 विभागों के 132 बड़े प्रोजेक्ट पूरे करना सरकार और प्रशासन दोनों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।

12 हजार करोड़ का प्लान, शुरुआत सिर्फ 700 करोड़ से

बजट है, लेकिन काम की रफ्तार सवालों में सिंहस्थ से जुड़े कार्यों के लिए लगभग 12 हजार करोड़ रुपए की योजना बनाई गई है। हैरानी की बात यह है कि अब तक केवल 700 करोड़ रुपए के काम ही शुरू हो पाए हैं। कई अहम प्रोजेक्ट अभी टेंडर स्तर पर ही अटके हुए हैं।

गृह विभाग सबसे आगे, बाकी विभाग पीछे

अब तक सिर्फ गृह विभाग ही अपने तय लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ता नजर आ रहा है। वहीं जल संसाधन, लोक निर्माण और नगरीय विकास जैसे अहम विभागों में प्रगति धीमी है, जो आयोजन की समयसीमा को लेकर चिंता बढ़ा रही है।

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पीडब्ल्यूडी पर सबसे बड़ा दारोमदार

उज्जैन सिंहस्थ 2028 के लिए 4,695 करोड़ के सड़क प्रोजेक्ट पूरे किए जाने हैं। इसमें लोक निर्माण विभाग (PWD) के जिम्मे करीब 4,695 करोड़ रुपए के छोटे-बड़े निर्माण कार्य हैं। विभाग को आठ प्रमुख सड़कों का निर्माण और उन्नयन करना है, लेकिन फिलहाल सिर्फ इंदौर–उज्जैन रोड पर ही काम शुरू हो सका है।

इन सड़कों के टेंडर फाइनल नहीं

जमीन और प्रक्रिया बनी बाधा जावरा रोड, उज्जैन–मक्सी मार्ग, उज्जैन बायपास, हरिफाटक–उज्जैन, इंगोलिया–देपालपुर और इंगोलिया–उनिहाल सड़कों पर न तो टेंडर फाइनल हो पाए हैं और न ही काम शुरू हुआ है। बड़वाह–धामनोद मार्ग अभी निर्णय के इंतजार में है। हालांकि, निविदा प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। शहर की 10 सड़कों का चौड़ीकरण सबसे संवेदनशील टास्क है।

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चैलेंज बना घर–दुकान हटाना 

नगरीय विकास एवं आवास विभाग के हिस्से सिंहस्थ का दूसरा सबसे बड़ा बजट है। करीब 300 करोड़ रुपए की लागत से शहर की 10 प्रमुख सड़कों का चौड़ीकरण किया जाना है, लेकिन सड़कों के किनारे बसे हजारों घर, दुकानें और दफ्तर इस प्रोजेक्ट को सबसे जटिल बना रहे हैं।

शिप्रा की शुद्धता पर फोकस

कान्ह नदी का गंदा पानी रोकने 18 किमी लंबी टनल सिंहस्थ के दौरान शिप्रा नदी की पवित्रता बनाए रखने के लिए जल संसाधन विभाग 18 किलोमीटर लंबी टनल का निर्माण कर रहा है। इसका उद्देश्य कान्ह नदी का प्रदूषित पानी शिप्रा में जाने से रोकना है।

टनल प्रोजेक्ट की मौजूदा स्थिति 7 किमी काम पूरा, 2027 तक लक्ष्य अब तक 18 किमी में से 7 किमी टनल का निर्माण पूरा हो चुका है। यह काम करीब एक साल पहले शुरू हुआ था और 2027 तक पूरे प्रोजेक्ट के पूरा होने का लक्ष्य रखा गया है। इस पूरे कार्य की नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है।

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इन सड़कों का होगा चौड़ीकरण...

  • कंठाल चौराहा से इंदौर गेट रोड
  • गाड़ी अड्डा चौराहा से ढांचा भवन
  • ढांचा भवन से एमआर-5 तक
  • टैगोर चौराहे से दो तालाब तक
  • राजस्थ कॉलोनी का मुख्य मार्ग
  • हनुमानखेड़ी मंदिर से देवास रोड शांति नगर (गेल इंडिया) से नीलगंगा तक 
  • हनुमान नाका से हरिफाटक तक 
  • महाकालेश्वर सवारी मार्ग देवास रोड से मयूर पार्क और प्रशासनिक संकुल तक 

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दो साल का अल्टीमेटम एजेंसियों पर बढ़ा दबाव 

निर्माण एजेंसियों को सभी बड़े कार्य पूरे करने के लिए दो साल का समय दिया गया है। सरकार और प्रशासन दोनों स्तर पर मॉनिटरिंग तेज कर दी गई है, ताकि समय रहते सिंहस्थ की तैयारियां पूरी की जा सकें। सार यही है आस्था तैयार है, अब सिस्टम को तेज होना होगा। 

उज्जैन सिंहस्थ 2028 वैश्विक पहचान को मौका

जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने कहा कि योजनाएं बन चुकी हैं, बजट भी है अब जरूरत है जमीन पर तेज और समन्वित क्रियान्वयन की। अगर रफ्तार नहीं बढ़ी, तो समय सबसे बड़ी चुनौती बन सकता है। विकास कार्यों को लेकर मॉनिटरिंग बराबर की जा रही है। टनल भी दो साल में बनकर तैयार हो जाएगी। 

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