मार्गशीर्ष नवमी पर बाबा महाकाल का मनमोहक श्रृंगार, शेषनाग रजत मुकुट से सजे बाबा
Mahakaal Darshan:विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में आज (13 नवंबर) मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि पर गुरुवार को तड़के चार बजे मंदिर के कपाट खुल गए।
यह एक बहुत ही शुभ और पावन समय था। कपाट खुलते ही सबसे पहले जलाभिषेक की प्रक्रिया शुरू की गई। भगवान महाकाल को जल अर्पित करके पवित्र किया गया।
बाबा महाकाल को अर्पित हुआ वैष्णव तिलक
इसके बाद, महाकाल का पंचामृत से अभिषेक किया गया। यह पंचामृत दूध, दही, घी, शकर और फलों के रस से बनाया जाता है। यह पूजन बाबा महाकाल को बहुत प्रिय है। पूजन के बाद, महाकाल का अनुपम और दिव्य श्रृंगार हुआ।
जटाधारी भगवान महाकाल को चंदन का वैष्णव तिलक लगाया गया। इसके साथ ही, बाबा को रजत यानी चांदी का चंद्र मुकुट पहनाया गया। मुकुट और कई कीमती आभूषण भी महाकाल को अर्पित किए गए।
प्रथम घंटाल बजाकर हरि ओम का जल उन्हें समर्पित किया गया। कपूर आरती के बाद, भगवान के मस्तक पर रजत चंद्र शोभित हुआ। भांग, चंदन, और गुलाब के सुंदर फूलों की माला भी चढ़ाई गई।
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फूलों और मुकुट से सजे महाकाल
श्रृंगार के तुरंत (बाबा महाकालभस्म आरती)बाद भस्म आरती की गई। भस्म अर्पित होने के बाद ही महाकाल निराकार से साकार रूप में दर्शन देते हैं। यह क्षण भक्तों के लिए भक्ति का चरम होता है। भस्म रमाए जाने के बाद, बाबा महाकाल को फिर से सजाया गया।
उन्हें शेषनाग (उज्जैन के महाकाल मंदिर) का रजत मुकुट धारण कराया गया। गले में रजत की मुण्डमाल और रुद्राक्ष की माला पहनाई गई। सुगंधित फूलों से बनी माला भी अर्पित की गई।आखिर में, फल और स्वादिष्ट मिष्ठान का भोग लगाया गया। भस्म आरती में दूर-दूर से आए श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल का आशीर्वाद पाया।
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