उज्जैन के पवित्र कुंडों में मिला खतरनाक बैक्टीरिया, नहाने लायक भी नहीं बचा पानी

Aman Vaishnav | Aug 10, 2026, 09:27 IST
Share
उज्जैन के पवित्र कुंड
उज्जैन के पवित्र कुंड

उज्जैन के सात में से छह पवित्र कुंडों का पानी नहाने योग्य भी नहीं पाया गया है। इन कुंडों के पानी में फिकल कोलीफॉर्म यानी मल संबंधी खतरनाक जीवाणु तय मानक से बहुत ज्यादा मिले हैं।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • उज्जैन के छह पवित्र कुंडों का पानी बुरी तरह प्रदूषित मिला है।
  • MPPCB की जांच में पानी में मल संबंधी जीवाणु पाए गए हैं।
  • NGT ने कहा कि यह पानी नहाने लायक भी नहीं है।
  • ट्रिब्यूनल ने प्रशासन को 30 दिन में सुधार का आदेश दिया है।
  • अगली सुनवाई 4 सितंबर 2026 को होगी।
उज्जैन में एक ओर सिंहस्थ 2028 की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं, तो दूसरी ओर इसी धार्मिक नगरी से बेहद हैरान कर देने वाली खबर सामने आई है।

जिन पवित्र कुंडों में सिंहस्थ (उज्जैन सिंहस्थ कुंभ) के दौरान देश-दुनिया से आने वाले करोड़ों श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाते हैं, उनका पानी ही प्रदूषित मिला है।

मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड यानी MPPCB की जांच में उज्जैन के सात में से छह पवित्र कुंडों के पानी में फिकल कोलीफॉर्म यानी मल संबंधी जीवाणु तय मानक से कई गुना ज्यादा पाए गए हैं। हालात इतने गंभीर हैं कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल यानी NGT ने इन कुंडों के पानी को नहाने लायक तक नहीं माना है।

उज्जैन में हर 12 साल में होने वाले सिंहस्थ में करोड़ों श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन के लिए पहुंचते हैं और पवित्र कुंडों में स्नान कर आस्था की डुबकी लगाते हैं। ऐसे में इन कुंडों के पानी में सीवेज और मल संबंधी जीवाणुओं की मौजूदगी ने श्रद्धालुओं की आस्था के साथ-साथ उनकी सेहत पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

NGT ने मामले को गंभीरता से लेते हुए उज्जैन प्रशासन को 30 दिन के भीतर सुधारात्मक कदम उठाने का आदेश दिया है। अब देखना होगा कि सिंहस्थ की तैयारियों के बीच प्रशासन इन पवित्र कुंडों को प्रदूषण से कब तक मुक्त कर पाता है।

भोपाल स्थित सेंट्रल बेंच ने की टिप्पणी

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT – National Green Tribunal) की भोपाल स्थित सेंट्रल बेंच ने उज्जैन के पवित्र कुंडों पर गंभीर टिप्पणी की है।

4 अगस्त को दो अलग याचिकाओं पर सुनवाई हुई। इनमें उज्जैन के सप्त सागर यानी सात कुंडों के पुनरुद्धार की मांग की गई थी। सुनवाई के बाद ट्रिब्यूनल ने साफ कर दिया कि हालात बेहद गंभीर हैं।

ujjain-sapt-sagar-water-pollution-ngt-notice
ujjain-sapt-sagar-water-pollution-ngt-notice


कोलीफॉर्म क्या होता है

फिकल कोलीफॉर्म एक तरह का जीवाणु है। यह इंसान या जानवर के मल से पानी में पहुंचता है। इसकी मौजूदगी बताती है कि पानी में सीवेज मिल रहा है।

ऐसा पानी पीने या स्नान करने से पेट और त्वचा से जुड़ी बीमारियां हो सकती हैं। इसलिए स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसे गंभीर संकेतक मानते हैं।

ujjain-sapt-sagar-water-pollution-ngt-notice
ujjain-sapt-sagar-water-pollution-ngt-notice


छह कुंडों का गंदा पानी

मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPPCB – Madhya Pradesh Pollution Control Board) ने सातों कुंडों के पानी की जांच रिपोर्ट ट्रिब्यूनल को सौंपी थी। इस रिपोर्ट में रत्नाकर सागर को छोड़कर बाकी छह कुंडों की हालत बेहद खराब बताई गई।

रुद्र सागर, क्षीर सागर, पुरुषोत्तम सागर, विष्णु सागर, पुष्कर सागर और गोवर्धन सागर का पानी नहाने लायक भी नहीं मिला। रिपोर्ट के मुताबिक इन कुंडों में फिकल कोलीफॉर्म यानी मल संबंधी जीवाणु की मात्रा तय सीमा से कहीं ज्यादा पाई गई।

कुल कोलीफॉर्म का स्तर भी केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मानकों से अधिक निकला।

सीवेज मिलने का संकेत

NGT ने कहा कि पानी में कोलीफॉर्म का ऊंचा स्तर सीवेज यानी गंदे पानी की मौजूदगी का सीधा संकेत देता है। ट्रिब्यूनल ने यह भी नोट किया कि बोर्ड ने इसके पीछे की वजह साफ तौर पर नहीं बताई।

साथ ही अब तक कोई ठोस कार्रवाई भी सामने नहीं आई है। इससे ट्रिब्यूनल की नाराजगी और बढ़ गई।

अतिक्रमण भी बड़ी वजह

ट्रिब्यूनल ने कुंडों के आसपास अतिक्रमण को भी बड़ा कारण बताया है। कई जगह कुंडों के किनारे अवैध निर्माण हो चुका है। इससे गंदा पानी सीधे कुंडों में जा रहा है।

नगर निगम को अब यह अतिक्रमण हटाना होगा। साथ ही कुंडों के किनारे सीवेज लाइन की भी जांच करनी होगी। बिना इन कदमों के पानी की गुणवत्ता सुधरना मुश्किल है।

आस्था और सेहत पर सवाल

सुनवाई के दौरान बेंच में जस्टिस शेव कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी शामिल थे। दोनों ने कहा कि श्रद्धालुओं को इस प्रदूषित पानी से पूजा करने देना ठीक नहीं है।

यह सीधे तौर पर तीर्थयात्रियों की सेहत से खिलवाड़ है। साथ ही यह उनकी धार्मिक आस्था के साथ भी अन्याय है। ट्रिब्यूनल ने इसे गंभीर मुद्दा बताया।

30 दिन में सुधार का आदेश

NGT ने उज्जैन नगर निगम आयुक्त को सीधा निर्देश दिया है। उन्हें 30 दिनों के भीतर सुधारात्मक कदम उठाने होंगे। इसमें कुंडों के आसपास से अतिक्रमण हटाना भी शामिल है।

इसके अलावा पानी की गुणवत्ता सुधारने के ठोस उपाय भी करने होंगे। अगली सुनवाई से पहले प्रशासन को अनुपालन रिपोर्ट भी पेश करनी होगी।

ये खबरें भी पढ़िए...

शिशुकुंज स्कूल के पानी में भागीरथपुरा कांड वाला कोलीफार्म बैक्टीरिया, फूड सैंपल फेल

एमपी का पानी पीने लायक नहीं, 52 में से 50 के सैंपल फेल, NGT सख्त

एमपी में बढ़ेगा जल संकट? ज्यादा बारिश होने के बाद भी घट जाएगा नदियों का पानी!

भोपाल के कई इलाकों का पानी जहरीला, महापौर मालती राय बोली-लोगों को RO की जरूरत नहीं

Tags:
  • National Green Tribunal
  • नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल
  • Madhya Pradesh Pollution Control Board
  • सिंहस्थ 2028
  • सिंहस्थ कुंभ
  • उज्जैन नगर निगम
  • उज्जैन सिंहस्थ कुंभ
  • केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
  • मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
गूगल पर द सूत्र चुनें ! Add as a preferredsource on Google
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग

By Atul Dwivedi

MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री

By Ramanand Tiwari

एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा

By Ramanand Tiwari

मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन

By Jitendra Shrivastava

मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें

By Sanjay Dhiman

mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे

By Sanjay Gupta

झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा

By Arun Tiwari

बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा