उज्जैन की शाही मस्जिद रिमूवल पर हाईकोर्ट बोला- सिंहस्थ 2028 में करोड़ों श्रद्धालुओं का ख्याल जरूरी
उज्जैन शाही मस्जिद के रिमूवल नोटिस पर मचे बवाल के बीच हाईकोर्ट इंदौर का आदेश हो चुका है। दोनों याचिकाएं खारिज हो गई हैं और 27 पेज का लंबा स्पीकिंग ऑर्डर जारी किया गया है। इसमें याचिकाकर्ताओं को फटकार भी लगाई गई है।
यह है मामला
कंथाल चौराहे से गोपाल मंदिर तक करीब 1.50 किमी लंबी सड़क को चौड़ा करने के लिए उज्जैन नगर निगम ने मस्जिद प्रबंधन को नोटिस दिया था। निगम का कहना है कि यह रास्ता सिंहस्थ 2028 और शाही मार्ग के लिहाज से काफी अहम है। यह सड़क आगे जाकर गोपाल मंदिर को महाकाल मंदिर से जोड़ती है।
नोटिस के खिलाफ मस्जिद प्रबंधन की ओर से हाईकोर्ट में दो याचिकाएं दायर की गईं। इसमें आरोप लगाया गया कि कार्रवाई भेदभावपूर्ण है। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि आसपास कई दूसरी संपत्तियां भी हैं, लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई और सिर्फ मस्जिद को हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
मस्जिद का यह हिस्सा रिमूवल में जाने की बात
याचिकाकर्ताओं ने कहा कि इस 15 मीटर चौड़ी सड़क बनाने के लिए मस्जिद का एक हिस्सा हटा दिया जा रहा है। इस तोड़-फोड़ की कार्रवाई में मस्जिद के प्रार्थना कक्ष (जमात खाना) का एक हिस्सा, 120 फुट ऊंची मीनार और मजहर चौक शाही को गिरा दिया जाएगा। प्रार्थना हमारे धर्म का एक अहम हिस्सा है।
इस पर हाईकोर्ट ने यह की टिप्पणी
जस्टिस संदीप एन भट्ट ने इस मामले में दोनों याचिकाएं खारिज कर दीं। कोर्ट ने शासन और उज्जैन नगर निगम की ओर से दी गई जानकारी के आधार पर कहा कि शहर में करीब 80 धार्मिक संरचनाओं को हटाने या दूसरी जगह शिफ्ट करने की प्रक्रिया चल रही है। इसके अलावा, इसी सड़क पर पहले ही 11 धार्मिक संरचनाएं हटाई जा चुकी हैं, जिनमें 10 मंदिर और 1 मस्जिद शामिल हैं।
फैसले में कोर्ट ने कहा कि ऐसा लगता है कि याचिकाकर्ता सड़क चौड़ीकरण की प्रक्रिया में सहयोग नहीं कर रहे हैं। सिर्फ धार्मिक स्थल होने के आधार पर विशेष छूट की मांग करना या कार्रवाई को भेदभाव बताना उचित नहीं है। कोर्ट ने ऐसे तर्कों को स्वीकार नहीं किया।
सिंहस्थ के लिए यह जरूरी है
सिंहस्थ 2028 को देखते हुए कोर्ट ने कहा कि करोड़ों श्रद्धालुओं की सुविधाओं का ध्यान रखना जरूरी है। इतने बड़े आयोजन के दौरान बेहतर व्यवस्थाएं और ट्रैफिक प्रबंधन के लिए शहर में विकास कार्य जरूरी हैं। समय के साथ उज्जैन की आबादी भी बढ़ी है। उज्जैन विकास योजना 2035 के प्रावधानों के तहत नगर निगम को जरूरी कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए कार्रवाई करने का अधिकार है।
इनके द्वारा लगाई गई थीं याचिकाएं
इस मामले में पहली याचिका शाही मस्जिद वक्फ पंचायत मोचियान के प्रतिनिधि अशफाक अहमद और शाही मस्जिद इंतजामिया कमेटी वक्फ पंच मोचियान के वाइस चेयरमैन अशफाक अहमद की ओर से दायर की गई थी। इसमें मप्र शासन, ज्वाइंट डायरेक्टर टीएंडसीपी, उज्जैन नगर निगम, बिल्डिंग ऑफिसर और कलेक्टर उज्जैन को पक्षकार बनाया गया था।
वहीं, दूसरी याचिका शाही मस्जिद वक्फ पंच मोचियान के प्रेसिडेंट अरशान हुसैन की ओर से लगाई गई थी। इसमें मप्र शासन, उज्जैन नगर निगम और मप्र वक्फ बोर्ड को पक्षकार बनाया गया था।
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