सिंहस्थ बायपास में गजब की इंजीनियरिंग, रोड छोड़ खेत में उतरा करोड़ों का पुल!

Amresh Kushwaha | Aug 25, 2026, 09:25 IST
सिंहस्थ बायपास में गड़बड़ी
उज्जैन में सिंहस्थ-2028 के लिए बन रहे बायपास में बड़ी चूक सामने आई है। सड़क और ब्रिज के अलाइनमेंट में करीब 30 डिग्री का अंतर है। इस वजह से ब्रिज सड़क की जगह खेत में उतर रहा है। अब सुधार के लिए अतिरिक्त जमीन ली जाएगी।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • उज्जैन में सिंहस्थ-2028 के लिए बायपास बन रहा है।
  • इसमें सड़क और ब्रिज का अलाइनमेंट नहीं मिल रहा है।
  • दोनों के बीच करीब 30 डिग्री का अंतर मिला है।
  • इस वजह से ब्रिज सड़क की जगह खेत में उतर रहा है।
  • अब सुधार के लिए अतिरिक्त जमीन ली जाएगी।

क्या है पूरा मामला

सिंहस्थ 2028 में इंदौर से आने वाले मेला वाहनों को सीधे मेला क्षेत्र तक पहुंचाने के लिए बायपास बनाया जा रहा है। इसी बायपास में बड़ी इंजीनियरिंग चूक सामने आई है। डीमार्ट के सामने से एमआर-21 (Master Road-21) तक सड़क बन रही है। इसी रास्ते पर शिप्रा नदी पर ब्रिज भी बनाया जा रहा है। वहीं, सड़क और ब्रिज का अलाइनमेंट आपस में नहीं मिल रहा है। दोनों के बीच करीब 30 डिग्री का अंतर पाया गया है। इसका नतीजा यह हुआ कि ब्रिज सड़क की जगह खेत में उतर रहा है। यह गड़बड़ी एक मीडिया रिपोर्ट्स में सामने आई है।



कैसे पकड़ी गई गड़बड़ी

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस चूक को पकड़ने के लिए ड्रोन फोटो और सैटेलाइट इमेज का सहारा लिया गया। दोनों तस्वीरों की मदद से सड़क और ब्रिज के बीच की दूरी मापी गई। मापने पर पता चला कि दोनों के बीच करीब 30 डिग्री का अंतर है। यह अंतर इतना बड़ा है कि ब्रिज तय जगह पर नहीं पहुंच रहा। असल में ब्रिज को सीधा सिकंदरी-दाऊदखेड़ी रोड पर मिलना था। यहीं पर सिंहस्थ और देवास-बदनावर हाईवे के बायपास भी मिलने वाले हैं। लेकिन अलाइनमेंट बिगड़ने से अब यह पूरा प्लान गड़बड़ा गया है।



अब सुधार के लिए क्या होगा

गलती सुधारने के लिए अब अतिरिक्त जमीन ली जाएगी। सड़क को मोड़कर ब्रिज से मिलाने की तैयारी है। इसके लिए जमीन अधिग्रहण करना जरूरी होगा। यानी सड़क अब सीधी नहीं बल्कि टर्न लेकर ब्रिज तक पहुंचेगी। इस बदलाव से प्रोजेक्ट की लागत भी बढ़ सकती है। समय पर काम पूरा होने में भी देरी हो सकती है। इस पूरी प्रक्रिया से किसान नाराज हैं।



किसान क्यों कर रहे विरोध

सड़क मोड़ने के लिए किसानों की जमीन ली जाएगी। यही वजह है कि किसान इस फैसले का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि इंजीनियरों की गलती की सजा उन्हें क्यों मिले। पहले से तय प्लान में बदलाव करना उन्हें नुकसानदेह लग रहा है। खेती की जमीन जाने से किसानों की आजीविका पर असर पड़ सकता है। स्थानीय लोग भी इस पूरे मामले पर सवाल उठा रहे हैं।



कौन बना रहा है सड़क और ब्रिज

इस प्रोजेक्ट में दो अलग-अलग विभाग काम कर रहे हैं। सड़क का निर्माण नगर निगम करा रहा है। इस पर करीब 23.26 करोड़ रुपए खर्च हो रहे हैं। वहीं ब्रिज बनाने का जिम्मा सेतु विभाग के पास है। ब्रिज पर करीब 13.38 करोड़ रुपए की लागत आ रही है। मौके पर सड़क का अर्थवर्क तैयार हो चुका है। ब्रिज के पिलर भी बनकर तैयार हो चुके हैं। दोनों काम अलग-अलग एजेंसी करा रही हैं। यही वजह मानी जा रही है कि तालमेल में कमी रही होगी।



अधिकारियों ने क्या कहा

सेतु विभाग के कार्यपालन यंत्री पीएस पंत ने अपना पक्ष रखा है। उनका कहना है कि ब्रिज वैसा ही बन रहा है जैसा बनना चाहिए था। उन्होंने कहा कि गड़बड़ी कहां हुई यह नगर निगम को बताना चाहिए। वहीं नगर निगम के कार्यपालन यंत्री आरके जैन ने भी जवाब दिया। उनका कहना है कि उन्होंने पहले भी पत्र लिखे थे। अब सड़क को टर्न देकर ब्रिज से मिलाया जाएगा। इसके लिए अतिरिक्त जमीन ली जाएगी।



यह रास्ता क्यों जरूरी है

यह बायपास सिंहस्थ मेले के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। इंदौर की ओर से आने वाले ट्रैफिक को इसी रास्ते से मेला क्षेत्र तक पहुंचाया जाना है। इसका मकसद है कि वाहन शहर के अंदर बिना घुसे मेला क्षेत्र तक पहुंच जाएं। चिंतामण गणेश मंदिर तक भी यही रास्ता सीधे जोड़ता है। इससे शहर में जाम की समस्या भी कम होगी। यही वजह है कि इस बायपास को समय पर पूरा करना जरूरी है।



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