युवा धर्म संसद-2026: उज्जैन में 24 राज्यों से आएंगे युवा, धर्म पर करेंगे मंथन
Aman Vaishnav | Aug 20, 2026, 13:00 IST
युवा धर्म संसद-2026
उज्जैन की पावन भूमि पर 17 से 19 सितंबर तक युवा धर्म संसद 2026 का आयोजन होने जा रहा है। इसमें 24 राज्यों के 1700 से ज्यादा युवा धर्म, राष्ट्र और विज्ञान पर मंथन करेंगे।
समझें क्या है पूरा मामला...
- उज्जैन में सितंबरमें युवा धर्म संसद-2026 का आयोजन होगा।
- यह इसका छठा संस्करण है। 24 राज्यों के1700 से ज्यादा युवा गीता भवन मेंजुटेंगे।
- तीन दिनतक धर्म, संस्कृति और आधुनिक चुनौतियोंपर मंथन चलेगा।
- इससे पहले यह आयोजन काशी,अयोध्या, मथुरा, हरिद्वार और कांचीपुरम्में हो चुका है।
साथ ही आज की जिंदगीकी चुनौतियों पर भी मंथन होगा। यह मौकाहोगा युवा धर्म संसद-2026 के छठे संस्करणका।
बता दें कि सेवाज्ञसंस्थानम् इस राष्ट्रीय आयोजन को कराएगा।यह कार्यक्रम 17 से 19सितंबर तक गीता भवन में होगा। इसमेंविद्यार्थी, शिक्षक, शिक्षाविद्,संत और सामाजिक चिंतक शामिल होंगे। सभीमिलकर देश के भविष्य पर चर्चा करेंगे।
आचार्यमिथिलेशनन्दिनीशरण महाराज इस आयोजन केसंरक्षक हैं। उनके मार्गदर्शन मेंसेवाज्ञ संस्थानम् इसेआयोजित कर रहा है। शुरुआत 17 सितंबर कोएक प्रदर्शनी से होगी। इसी दिन युवापंचायत भी होगी।
प्रदर्शनी में भारतीय ज्ञान परंपरा
इतने बड़ेस्तर पर युवाओं का जुटान अपने आप में खासहै। अलग-अलगराज्यों से आए युवा अपनी संस्कृति और सोचभी साथ लाएंगे। इससे विचारों का दायरा औरबड़ा होगा।आयोजन सिर्फ भाषणों तक सीमित नहीं रहेगा,बल्कि यह एक जीवंत मंच बनेगा।
भाषण नहीं, सवाल होंगे अहम
ये सवाल सीधे विद्वानों औरसंतों के सामने रखे जाएंगे। इस तरह यहमंचयुवा पीढ़ी और भारतीय विचारकों के बीचसीधा संवाद बनाएगा।
काशी से उज्जैन तक की यात्रा
उज्जैन को चुनने की वजह साफ है। यहशहर सिर्फ आस्थाका केंद्र नहीं है। यह भारत की पुरानीज्ञान परंपरा की अहम भूमि भी रहा है।ज्योतिष, गणित, साहित्य, दर्शन औरसंस्कृत से इसका गहरा नाता रहाहै।
उज्जैन विक्रमादित्य की नगरी रहीहै। यहसिंहस्थ (उज्जैन सिंहस्थ 2028) की भूमि भी है। इस वजह से इसकीसांस्कृतिक पहचान बहुत व्यापक है। यहां24 राज्यों के युवाजुटेंगे। सनातन सोच और आधुनिक सवालों केबीच संवाद होगा। यही इस आयोजन कोखास बनाता है।
मध्यप्रदेश के लिए खास मौका
इस तीन दिन केआयोजन से उज्जैन एक बार फिरराष्ट्रीय मंच पर आएगा। शहर के लोग इसबड़े आयोजन का हिस्सा बन सकेंगे। छात्रोंऔर शिक्षकों के लिए भी यह एकबड़ा मौका होगा।
युवाओं से जुड़ाव क्यों जरूरी
विद्वानों औरसंतों के साथ सीधा संवाद युवाओं की सोचको साफ करेगा। इससे उनके मन मेंउठने वाले भ्रम और शंकाएं भी दूर हो सकतीहैं।
साथ ही यह आयोजन नई पीढ़ी को जड़ोंसेभी जोड़ेगा। परंपरा और आधुनिकता के बीचसंतुलन बनाना आज सबसे बड़ी जरूरत है।
तीनदिनतक चलने वाला यह आयोजन उज्जैन के लिए भीयादगार रहेगा। शहर की गलियों में देशभरसे आएयुवाओं की रौनक दिखेगी। गीता भवन परिसरइन दिनों विचार-विमर्श का केंद्र बनारहेगा। आयोजन खत्म होने के बाद भी इसकाअसर लंबे समय तक रहेगा।
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