मंदिरों के दान का रिकॉर्ड रोज सार्वजनिक करे सरकार : उमंग सिंघार
समझें क्या है पूरा मामला...
- उमंग सिंघार ने भोपाल में सरकार पर हमला बोला।
- बगलामुखी मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में कार्रवाई मांगी।
- मंदिरों के दान रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग की।
- मंदिरों के दान का रिकॉर्ड रोज पोर्टल जारी हो।
मंदिर में चढ़ावा चोरी पर कार्रवाई की मांग
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भोपाल में बुधवार को सरकार पर कई मुद्दों पर हमला बोला। उन्होंने नलखेड़ा बगलामुखी मंदिर में चढ़ावा चोरी पर कलेक्टर के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उन्होंने मंदिरों के दान का रिकॉर्ड रोज पोर्टल पर सार्वजनिक करने को कहा।
मंदिरों में चोरी पर सरकार को घेरा
सिंघार ने कहा कि नलखेड़ा स्थित बगलामुखी मंदिर देशभर के श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। इसके बावजूद वहां चढ़ावा चोरी की घटना सामने आई है। उन्होंने कहा कि अयोध्या के बाद अब मध्य प्रदेश के मंदिरों में भी इस तरह की घटनाएं हो रही हैं। उन्होंने रामराजा मंदिर, ओरछा का भी जिक्र किया। सिंघार के मुताबिक वहां नौ साल पहले चोरी हुई थी, लेकिन आज तक दोषियों का पता नहीं चल सका। उन्होंने इसे सरकार की नाकामी बताया।
दान का रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग
उमंग सिंघार ने कहा कि धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग के पोर्टल पर प्रदेश के मंदिरों में आने वाले दान की जानकारी हर दिन सार्वजनिक होनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार श्रद्धालुओं के दान का हिसाब सार्वजनिक करने से क्यों बच रही है।
उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की कि मंदिरों में आने वाले नकद दान, सोना चांदी और अन्य चढ़ावे का दैनिक रिकॉर्ड पोर्टल पर उपलब्ध कराया जाए। सिंघार का कहना था कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी।
सरकार पर लगाया बड़ा आरोप
सिंघार ने कहा कि सीएम मोहन यादव मध्य प्रदेश के हितों की रक्षा करने में नाकाम रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने राज्य के संसाधनों को गुजरात के पक्ष में झुका दिया है। सिंघार ने इसे सीधे शब्दों में एमपी को गुजरात के हाथों गिरवी रखना बताया।
चढ़ावा चोरी के आरोप
आगर-मालवा जिले के नलखेड़ा स्थित मां बगलामुखी मंदिर ( baglamukhi mandir agar malwa) में दान की भारी अनियमितता उजागर हुई है। आरोप है कि यहां श्रद्धालुओं से मिलने वाला नकद चढ़ावा, सोना और चांदी एक ऐसी समिति वसूल रही थी, जिसका मंदिर के शासकीय प्रबंधन से कोई नाता नहीं है।
गैर-शासकीय समिति खोल बैठी समानांतर वसूली तंत्र!
शिकायत के मुताबिक, मंदिर में शासकीय प्रबंधन समिति अलग से काम करती है। लेकिन उसी परिसर में एक और समिति चुपचाप सक्रिय थी, जिसका कोई सरकारी अधिकार ही नहीं था। यह समिति श्रद्धालुओं से नकद, सोना और चांदी के रूप में दान जमा कर रही थी।
सवाल यह है कि आखिर बिना अनुमति के यह समानांतर वसूली इतने लंबे समय तक कैसे चलती रही। सबसे गंभीर आरोप यह है कि महाभारतकालीन बगलामुखी मंदिर के चढ़ावे की रकम को निजी बैंक खातों में डाला जा रहा था। यानी मंदिर की पवित्र आस्था का पैसा सरकारी खजाने की जगह किसी और की जेब में जाने का शक गहरा गया है।
कलेक्टर ने बनाई जांच टीम
मामला सामने आते ही कलेक्टर आईएएस प्रीति यादव ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने तीन सदस्यीय संयुक्त जांच दल गठित कर दिया है। जांच दल की अगुवाई जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी बी.एस. सोलंकी करेंगे।
जिला कोषालय अधिकारी मनीष सोलंकी और नगर परिषद नलखेड़ा की मुख्य नगरपालिका अधिकारी मिनी अग्रवाल को भी टीम में शामिल किया गया है।
देशभर में मंदिरों के चढ़ावे पर उठ रहे सवाल
गौरतलब है कि सिर्फ बगलामुखी मंदिर ही नहीं, बल्कि इन दिनों देश के सबसे बड़े धार्मिक स्थलों में शुमार अयोध्या राम मंदिर ( ram temple donation) में भी चढ़ावा चोरी का बड़ा मामला सुर्खियों में बना हुआ है। वहां (राम मंदिर चढ़ावा चोरी) भी करोड़ों रुपए के दान में गड़बड़ी की शिकायतों के बाद एसआईटी जांच कर रही है।
जांच एजेंसी बैंक अधिकारियों, नकदी गणना में शामिल कर्मियों और ट्रस्ट के पदाधिकारियों से पूछताछ कर चुकी है। मामला अब जमीन खरीद में हुई गड़बड़ियों तक भी पहुंच गया है।
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