वंदेमातरम विवाद पर बोले जीतू पटवारी, अनुशासन कमेटी के पास है मामला, सही समय पर होगा फैसला
News in Short
- वंदेमातरम विवाद पर पटवारी का पहला बयान।
- मामला अनुशासन समिति के पास भेजा गया।
- कार्रवाई पर सीधा जवाब देने से बचते नजर आए।
- बीजेपी पर मुद्दे भटकाने का आरोप।
- भ्रष्टाचार और सरकार पर भी साधा निशाना।
News in Detail
इंदौर में नगर निगम के बजट सत्र से उठे वंदेमातरम विवाद को लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इसमें मोटे तौर पर पटवारी ने यही कहा कि वंदेमातरम राष्ट्रगीत को लेकर कांग्रेस के मन में पूरा सम्मान है। इसे लेकर जो विवाद हुआ, वह पार्टी के संज्ञान में है और मामला अनुशासन कमेटी के पास गया है। इसमें सही समय पर फैसला लिया जाएगा और इसकी जानकारी दी जाएगी।
कांग्रेस पार्षद फौजिया शेख और रुबीना इकबाल खान पर कार्रवाई को लेकर सीधा जवाब नहीं दिया गया। उधर सुबह ही सीएम डॉ. मोहन यादव ने पूछा था कि पार्षदों पर कार्रवाई नहीं कर रहे तो इस्तीफा दें प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी।
हमें किसी के सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं
पटवारी ने कहा कि राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत हमेशा से ही कांग्रेस के रग-रग में हैं। इसके लिए हमें बीजेपी या किसी के सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं है। हम हमेशा इसका सम्मान करते हैं और संविधान में इसके लेकर साफ है। यह हमारा दायित्व है कि हम इसका सम्मान करें।
क्या शेख अलीम और महापौर की डील थी
द सूत्र द्वारा किए गए खुलासे कि इस मामले में पार्षद राजू भदौरिया ने फौजिया शेख अलीम के पति शेख अलीम और महापौर के बीच डील के आरोप लगाए हैं, पर भी सवाल हुए। इस पर पटवारी ने कहा कि यह मामला भी पार्टी के संज्ञान में है। समय आने पर फैसला लिया जाएगा।
एक मंत्री बोल दे कि वह भ्रष्टाचार मुक्त है
वहीं पटवारी ने कहा कि पूरा प्रदेश करप्शन के कैंसर में है। एक मंत्री कह दे कि वह ईमानदार है, हाथ ऊंचा करके। मैं उन मंत्री के भ्रष्टाचार सड़क पर ले आऊंगा। पूरा वल्लभ भवन, खासकर पांचवीं मंजिल, भ्रष्टाचार का अड्डा बन गया है। यहां दलाल बैठे हैं और प्रशासनिक माफिया भी ट्रांसफर को लेकर पैसा खाता है।
मामलों को दबाने के लिए यह राजनीति हुई
पटवारी के साथ ही पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा, शहराध्यक्ष चिंटू चौकसे और प्रवक्ता अमित चौरसिया मौजूद थे। पटवारी ने कहा कि तीन बार लगातार बजट सत्र में विवाद किए गए और मुद्दों से भटकाकर बजट को पास कराया गया। एक बार नमाज का विवाद किया, तो दूसरी बार औरंगजेब को लेकर आए और अब वंदेमातरम का विवाद ले आए। ताकि भागीरथपुरा की 35 हत्याओं, भ्रष्टाचार, क्यों साफ पानी नहीं दे रहे, इनका जवाब नहीं देना पड़े। पूरे मामले को दबाने के लिए यह राजनीति की गई है और मामले को सांप्रदायिक बनाया गया।
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