1479 सवालों के लापता जवाब; एमपी विधानसभा में कांग्रेस मांगेगी पाई-पाई का हिसाब!
समझें क्या है पूरा मामला...
- मध्य प्रदेश विधानसभा में 1479 प्रश्नों के जवाब अब तक नहीं मिले हैं।
- 14वीं विधानसभा के 535 और 15वीं के 865 प्रश्न लंबित हैं।
- सरकारी जवाब में लिखा जाता है जानकारी एकत्रित की जा रही है।
- कांग्रेस विधायक अब इन प्रश्नों को फिर से उठाने की तैयारी में हैं।
- नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार सभी विधायकों से मिलकर सूची बनाएंगे।
1479 सवाल, एक ही जवाब
मध्य प्रदेश की विधानसभा में विधायक जब सरकार से सवाल पूछते हैं, तो जवाब में अक्सर एक ही लाइन लिखी होती है। जानकारी एकत्रित की जा रही है। यह जवाब किसी एक विभाग का नहीं है। करीब 14 विभागों में यही स्थिति है। महिला एवं बाल विकास, स्कूल शिक्षा, स्वास्थ्य, माइनिंग और लोक निर्माण जैसे अहम विभाग भी इसमें शामिल हैं।
जानकारी के अनुसार विधानसभा के 1479 प्रश्नों के जवाब अब तक नहीं मिले हैं। इनमें 14वीं विधानसभा के करीब 535 और 15वीं विधानसभा के करीब 865 प्रश्न शामिल हैं।
बजट सत्र में भी यही हाल
हाल ही में 11 दिवसीय बजट सत्र हुआ था। इस दौरान भी 79 प्रश्नों के उत्तर में जानकारी एकत्रित की जा रही है लिखा गया था। यह कोई नई बात नहीं है। पुराने सत्रों में भी यही तस्वीर सामने आती रही है। कई अपूर्ण प्रश्नों के उत्तर अलग से उपलब्ध कराए गए थे, लेकिन बड़ी संख्या में जवाब अब भी लंबित हैं।
राघौगढ़ विधायक जयवर्धन सिंह ने इस बारे में अपनी बात रखी है। उनका कहना है कि कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर बार-बार जानकारी एकत्रित की जा रही है जैसे जवाब आते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कई बार दो सत्रों में एक ही मुद्दे पर जवाब भी बदल जाते हैं। इसलिए ऐसे मामलों में लगातार फॉलोअप प्रश्न लगाए जाएंगे।
अध्यक्ष की व्यवस्था के बाद भी लंबित
विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने फरवरी 2024 में एक व्यवस्था दी थी। उन्होंने कहा था कि लंबित प्रश्नों के जवाब संबंधित सदस्य को उपलब्ध कराए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा था कि विधानसभा का कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी अपूर्ण प्रश्नों के उत्तर अलग से दिए जाएंगे। इसके बावजूद बड़ी संख्या में जवाब अभी भी लंबित हैं।
CS की समीक्षा बैठक भी काफी नहीं
हर सत्र से पहले मुख्य सचिव अनुराग जैन की अध्यक्षता में एक समीक्षा बैठक होती है। इसमें संसदीय कार्य विभाग और अन्य विभागों के अधिकारी शामिल होते हैं। इस बैठक में अपूर्ण और लंबित प्रश्नों पर चर्चा होती है। इसके बावजूद कई मामलों में जवाब नहीं मिल पाते।
इन विभागों में जब जवाब नहीं आता, तो जानकारी एकत्रित की जा रही है लिखा जाता है। ई-विधानसभा (e-Vidhansabha) व्यवस्था लागू होने के बाद भी यही हाल है। यह डिजिटल प्रणाली के बाद भी जवाबदेही न होने का बड़ा सवाल खड़ा करता है।
कांग्रेस की तैयारी
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि वे सभी विधायकों से चर्चा करेंगे। अपूर्ण प्रश्नों की सूची तैयार की जाएगी। पुराने सत्रों के लंबित प्रश्नों का हवाला देकर इस सत्र में भी जानकारी मांगी जाएगी।
सिंघार ने कहा कि सरकार जनता से वोट चाहती है, लेकिन उनके मुद्दों पर जवाबदेही से बचती है। उनका यह भी कहना है कि ई-विधानसभा व्यवस्था लागू होने के बाद भी प्रश्नों के उत्तर समय पर न मिलना, पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है।
स्थायी समाधान की जरूरत
मध्य प्रदेश विधानसभा के पूर्व प्रमुख सचिव भगवानदेव इसरानी ने इस मुद्दे पर अपना पक्ष रखा है। उनका मानना है कि प्रश्न पूछना विधायकों का संवैधानिक विशेषाधिकार है। उन्होंने कहा कि इस स्थिति को सुधारने के लिए स्थायी समाधान और जवाबदेही तय करना जरूरी है।
उनके अनुसार अध्यक्ष ने पुराने अपूर्ण उत्तरों को अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराने की घोषणा की थी। वहीं, आज भी बड़ी संख्या में प्रश्नों के जवाब लंबित हैं। यह स्थिति संसदीय लोकतंत्र की भावना के खिलाफ है।
एमपी विधानसभा का 5 दिवसीय मानसून सत्र
मध्यप्रदेश विधानसभा सचिवालय ने जुलाई 2026 के सत्र का पूरा शेड्यूल जारी कर दिया है। यह सत्र 20 जुलाई से शुरू होकर 24 जुलाई तक चलेगा और कुल पांच दिन तक चलेगा।
इस दौरान सरकार के लगभग सभी बड़े विभागों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी। हर विभाग से जुड़े सवालों का रोस्टर पहले से तय कर दिया गया है। साथ ही, किन मंत्रियों को जवाब देना है, इसकी जिम्मेदारी भी साफ कर दी गई है।
ये खबरें भी पढ़िए...
इंदौर में मंत्री तुलसी सिलावट की विधानसभा में पोस्टर से गायब मंत्री कैलाश विजयवर्गीय
एमपी विधानसभा का 5 दिवसीय मानसून सत्र: कृषि से लेकर गृह और ऊर्जा विभाग तक रहेंगे सदन के केंद्र में
एमपी विधानसभा का मानसून सत्र 20 जुलाई से, बजट से लेकर UCC तक कई बड़े फैसलों की तैयारी
मप्र विधानसभा का मानसून सत्र 20 जुलाई से, UCC विधेयक पर टिकीं निगाहें