सिरोंज विवाह घोटाला: लॉकडाउन में बंद थीं शादियां, कागजों में बंट गए 30 करोड़
समझें क्या है पूरा मामला
- सिरोंज में विवाह सहायता योजना में 30.18 करोड़ रुपए का घोटाला सामने आया है।
- कोरोनाकाल में फर्जी शादियां दिखाकर सरकारी राशि मंजूर की गई।
- ईडी जांच में फर्जी दस्तावेज और संदिग्ध बैंक खातों की जानकारी मिली।
- 51 हजार रुपए की सहायता राशि कई अपात्र लोगों तक पहुंची।
- मुख्य आरोपी शोभित त्रिपाठी को पीएमएलए में गिरफ्तार किया गया है।
विदिशा जिले के सिरोंज जनपद पंचायत में हुए विवाह सहायता घोटाले की जांच में नए खुलासे हुए हैं। प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी (Enforcement Directorate) इस मामले की जांच कर रही है।
जांच में सामने आया कि साल 2020 और 2021 के दौरान कई शादियां कागजों में दिखाई गईं। यह वह समय था, जब कोरोना संक्रमण के कारण लॉकडाउन लागू था।
इस दौरान कई तरह के सामाजिक आयोजनों पर प्रतिबंध लगाए गए थे। इसके बावजूद सिरोंज में विवाह सहायता योजना के तहत बड़ी संख्या में राशि मंजूर की गई।
कई मामलों में फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया। आरोप है कि अपात्र लोगों को भी पात्र बताकर सरकारी सहायता दी गई।
इस योजना के तहत प्रत्येक विवाह के लिए 51 हजार रुपए की सहायता राशि दी जाती थी। जांच एजेंसी अब यह पता लगा रही है कि यह रकम किन लोगों तक पहुंची।
लॉकडाउन में दिखाई गईं शादियां
ईडी की जांच में सबसे बड़ा सवाल कोरोना काल में हुए आयोजनों को लेकर उठा है। जांच एजेंसी को विवाह से जुड़े दस्तावेज मिले हैं।
हालांकि, इन आयोजनों के लिए प्रशासन से अनुमति लेने के प्रमाण नहीं मिले हैं। ईडी अब इन दस्तावेजों की सत्यता की जांच कर रही है।
जांच में यह भी सामने आया है कि कई ऐसे नामों पर राशि जारी हुई, जो योजना के लिए योग्य नहीं थे।
एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी लाभार्थियों की पहचान कैसे तैयार की गई। इसके पीछे कौन लोग शामिल थे, इसकी भी जांच जारी है।
शोभित त्रिपाठी पर कार्रवाई
इस मामले में ईडी ने तत्कालीन सिरोंज जनपद पंचायत सीईओ शोभित त्रिपाठी को गिरफ्तार किया है।
उन्हें 2 सितंबर को Money Laundering Act के तहत गिरफ्तार किया गया है।
शोभित त्रिपाठी को ईडी की विशेष अदालत में पेश किया गया था। अदालत ने उन्हें 9 सितंबर तक ईडी की कस्टडी में भेजा है।
शोभित त्रिपाठी पूर्व मंत्री और भाजपा विधायक गोपाल भार्गव के रिश्तेदार बताए जाते हैं।
ईडी अब उनकी भूमिका और अन्य जुड़े लोगों की जानकारी जुटा रही है।
डिजिटल सबूतों की जांच
ईडी ने इस मामले में 3 अक्टूबर 2025 को कई ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया था।
इस कार्रवाई के दौरान कई दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस जब्त किए गए थे।
जांच एजेंसी ने इन डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक जांच कराई है। इसके साथ ही डिलीट किए गए डेटा को भी रिकवर करने की कोशिश की गई।
ईडी को मिले डिजिटल सबूतों के आधार पर आगे की कार्रवाई की गई।
जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि योजना की राशि निकालने और बांटने में किन लोगों की भूमिका थी।
खातों से निकाली गई रकम
जांच में बैंक खातों से जुड़ी कई जानकारी सामने आई है। जानकारी के अनुसार, कुछ खातों में फर्जी पहचान पत्रों के इस्तेमाल की आशंका है।
जांच एजेंसी को पता चला कि सहायता राशि खाते में आने के बाद छोटे-छोटे हिस्सों में नकद निकासी की गई।
ऐसा इसलिए किया गया, ताकि पैसों के लेनदेन का पूरा रिकॉर्ड सामने न आ सके।
ईडी अब बैंक खातों और नकद निकासी के बीच संबंध तलाश रही है।
एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि 30.18 करोड़ रुपए आखिर कहां गए।
आगे किस दिशा में जांच
ईडी अब इस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है। इसमें फर्जी लाभार्थी, बैंक खाते और दस्तावेज तैयार करने वाले लोगों की जानकारी जुटाई जा रही है।
जांच एजेंसी यह भी पता लगा रही है कि घोटाले की रकम से कोई संपत्ति खरीदी गई या नहीं।
मामले में आगे और लोगों पर कार्रवाई हो सकती है। हालांकि, जांच पूरी होने के बाद ही पूरी तस्वीर साफ होगी।
फिलहाल ईडी डिजिटल और वित्तीय रिकॉर्ड के आधार पर मामले की कड़ियां जोड़ रही है।
FAQ
- प्रश्न 1: सिरोंज विवाह सहायता घोटाला क्या है?
उत्तर: सिरोंज जनपद पंचायत में विवाह सहायता योजना के तहत 30.18 करोड़ रुपए की कथित गड़बड़ी की जांच चल रही है। आरोप है कि फर्जी दस्तावेजों से अपात्र लोगों के नाम पर सहायता राशि मंजूर की गई।
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