MP में ग्राफ्टिंग का कमाल, एक पेड़ पर 35 तरह के आम, मियाजाकी से ब्रूनाई किंग

Jitendra Shrivastava | Jun 07, 2026, 20:47 IST
Photograph: (thesootr)
VIDISHA. विदिशा के शिक्षक बालकृष्ण विश्वकर्मा ने ग्राफ्टिंग तकनीक से एक ही पेड़ पर 35 किस्म के आम उगाए। इसमें जापानी मियाजाकी और 6 किलो का ब्रूनाई किंग भी शामिल है।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • एक पेड़ पर 35 आम, विदिशा के मास्टरजी का कमाल।
  • जापानी मियाजाकी अब मध्यप्रदेश के खेत में लहराया।
  • 6 किलो का ब्रूनाई किंग उगाया गांव के बगीचे में।
  • शिक्षक ने ग्राफ्टिंग से बदल दी खेती की तस्वीर।
  • एक पेड़, 35 किस्में, एक शिक्षक की अनोखी कहानी।

मध्यप्रदेश के विदिशा जिले के एक शिक्षक ने खेती में अनोखा प्रयोग करके पूरे देश का ध्यान खींचा है। उन्होंने ग्राफ्टिंग तकनीक से एक ही आम के पेड़ पर 35 अलग-अलग किस्में उगा दी हैं। इस बगीचे में दुनिया का सबसे महंगा जापानी आम मियाजाकी और 6 किलो वजनी ब्रूनाई किंग भी मौजूद हैं। जिला प्रशासन और एमपी शासन भी इस उपलब्धि की तारीफ कर रहे हैं। यह कहानी बताती है कि शिक्षा और खेती मिलकर क्या नतीजे दे सकती हैं।



मिट्टी से सोना उगाने वाला शिक्षक

विदिशा जिले के पमारिया गांव में रहने वाले बालकृष्ण विश्वकर्मा पेशे से शिक्षक हैं। लेकिन उनकी असली पहचान अब एक प्रगतिशील किसान के रूप में बन रही है।



विश्वकर्मा के बगीचे में जाने पर यकीन नहीं होता कि एक ही पेड़ की अलग-अलग टहनियों पर अलग-अलग स्वाद के आम लटक सकते हैं। यही उनकी वैज्ञानिक सोच का कमाल है।



बालकृष्ण ने यह साबित किया है कि किसान के पास अगर ज्ञान और जिज्ञासा हो तो परंपरागत खेती को भी नई ऊंचाई दी जा सकती है। पूरे इलाके के किसान अब उन्हें अपना रोल मॉडल मानते हैं।



ग्राफ्टिंग तकनीक ने बदला सब

बालकृष्ण ने ग्राफ्टिंग (Grafting) यानी कलमकारी तकनीक का बेहतरीन इस्तेमाल किया है। इस तकनीक में एक पेड़ की टहनी को काटकर उस पर दूसरी किस्म की कलम लगाई जाती है। धीरे-धीरे वह टहनी उसी किस्म के फल देने लगती है।



बालकृष्ण ने एक ही पेड़ की अलग-अलग टहनियों पर 35 किस्मों की कलम चढ़ाई। अब उस एक पेड़ पर 35 तरह के आम फलते हैं। यह प्रयोग कृषि विशेषज्ञों के लिए भी अचरज की बात है।



जापान का मियाजाकी अब MP में

बालकृष्ण के बगीचे में जापानी मियाजाकी (Miyazaki Mango) आम मौजूद है। यह दुनिया की सबसे महंगी आम की किस्मों में गिना जाता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में यह लाखों रुपये किलो तक बिकता है।



मध्यप्रदेश के एक छोटे से गांव में इस आम की सफल पैदावार होना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। बालकृष्ण के इस प्रयोग से साबित होता है कि सही तकनीक और मेहनत से दुनिया की किसी भी किस्म को भारतीय मिट्टी में उगाया जा सकता है।



6 किलो का ब्रूनाई किंग भी यहीं है

उनके बगीचे में ब्रूनाई किंग (Brunei King) आम भी है। यह दुनिया का सबसे भारी आम माना जाता है। एक फल का वजन 6 किलोग्राम तक पहुंच जाता है।



इसके अलावा उनके यहां दुनिया का सबसे छोटे आकार का अंगूर दाना आम भी है। एक ही बगीचे में दुनिया के सबसे बड़े और सबसे छोटे आम का होना इस जगह को और खास बना देता है।



आंवले से शुरू हुई कामयाबी की कहानी

यह पहली बार नहीं है जब बालकृष्ण ने चौंकाया हो। इससे पहले वे इलाके में आंवले की उन्नत खेती सफलतापूर्वक कर चुके हैं। उनके उस प्रयोग से प्रेरणा लेकर क्षेत्र के कई किसानों ने अपनी आमदनी बढ़ाई।



बालकृष्ण की यह लगातार सफलता दिखाती है कि नवाचार किसी एक फसल तक सीमित नहीं होता। वे हर बार कुछ नया करते हैं और हर बार नतीजे हैरान करते हैं।



प्रशासन ने भी थपथपाई पीठ

बालकृष्ण की इस उपलब्धि को एमपी शासन और विदिशा जिला प्रशासन ने भी सराहा है। जेडी जनसंपर्क के सोशल मीडिया पर उनके बगीचे की तस्वीरें साझा की गई हैं। दूर-दूर से लोग इस अनोखे बगीचे को देखने आ रहे हैं।



यह खेती की दुनिया में नवाचार (Innovation) की एक जीवंत मिसाल है। बालकृष्ण विश्वकर्मा यह दिखा रहे हैं कि खेती सिर्फ आजीविका नहीं, बल्कि एक प्रयोगशाला भी बन सकती है।



किसानों के लिए क्या सीख है

बालकृष्ण की यह कहानी उन हर किसान के लिए प्रेरणा है जो परंपरागत खेती से आगे नहीं बढ़ पा रहे। ग्राफ्टिंग जैसी तकनीकें आज सरकारी कृषि केंद्रों पर सीखी जा सकती हैं। थोड़ी जिज्ञासा और थोड़ा साहस हो तो एक पेड़ से 35 किस्में उगाना भी मुमकिन है।



लोकल कनेक्शन

यह खबर सीधे मध्यप्रदेश से जुड़ी है। विदिशा जिले के पमारिया गांव के शिक्षक बालकृष्ण विश्वकर्मा की यह उपलब्धि एमपी के कृषि नवाचार का जीवंत उदाहरण है।



मध्यप्रदेश सरकार और जिला प्रशासन पहले ही इस पर ध्यान दे चुका है। राजस्थान और छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए भी यह प्रेरणादायक मॉडल है क्योंकि इन राज्यों की जलवायु और मिट्टी भी आम की खेती के अनुकूल है।



FAQ

  1. एक पेड़ पर कई किस्म के आम कैसे उगाए जाते हैं?
    आम उगाने के लिए ग्राफ्टिंग यानी कलमकारी तकनीक का उपयोग होता है। इसमें एक पेड़ की टहनी पर दूसरी किस्म की कलम जोड़ी जाती है। धीरे-धीरे वह टहनी उस किस्म के फल देने लगती है।
  2. मियाजाकी आम इतना महंगा क्यों है?
    मियाजाकी जापान में उगाई जाने वाली दुर्लभ आम की किस्म है। इसका स्वाद, रंग और पोषण मूल्य अन्य किस्मों से अलग होता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी सीमित उपलब्धता के कारण यह लाखों रुपये किलो तक बिकता है।
  3. बालकृष्ण विश्वकर्मा से खेती की तकनीक कैसे सीख सकते हैं?
    बालकृष्ण विश्वकर्मा विदिशा जिले के पमारिया गांव में रहते हैं। स्थानीय किसान उनके बगीचे में जाकर ग्राफ्टिंग तकनीक देख और सीख सकते हैं। जिला कृषि विभाग से भी इस तरह के प्रशिक्षण की जानकारी ली जा सकती है।

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