सरकारी चूहों ने डकारा डेढ़ करोड़ का गेहूं, जिम्मेदार अफसरों ने साधी चुप्पी

Amresh Kushwaha | Jul 10, 2026, 13:41 IST
सरकारी चूहों ने डकारा डेढ़ करोड़ का गेहूं
विदिशा गेहूं घोटाला ने एमपी प्रशासन को हिला दिया है। यहां डेढ़ करोड़ का 6000 क्विंटल सरकारी गेहूं गायब और 8000 क्विंटल अमानक मिला है। जानिए क्या है पूरा मामला...

समझें क्या है पूरा मामला...

  • विदिशा जिले में समर्थन मूल्य पर खरीदा गेहूं गायब हुआ है।
  • करीब छह हजार क्विंटल गेहूं भंडारण केंद्र तक नहीं पहुंचा।
  • इसकी कीमत डेढ़ करोड़ रुपए से ज्यादा आंकी जा रही है।
  • आठ हजार क्विंटल गेहूं अमानक भी पाया गया है।
  • पांच दिन बाद भी किसी अफसर पर कार्रवाई नहीं हुई।

विदिशा जिले में समर्थन मूल्य पर खरीदा गया गेहूं भंडारण केंद्र तक पहुंचने से पहले ही गायब हो गया। यह मामला छह हजार क्विंटल से ज्यादा गेहूं का है। इसकी कीमत डेढ़ करोड़ रुपए से ज्यादा आंकी जा रही है।



कैसे हुआ खुलासा

जिले में डेढ़ महीने से ज्यादा समय तक 174 केंद्रों पर गेहूं की खरीदी हुई थी। इसके बाद यह गेहूं भंडारण के लिए गोदामों में भेजा गया। वहीं, वहां छह हजार क्विंटल गेहूं कम निकला। विभाग की एक रिपोर्ट के अनुसार जिले में 65 लाख 99 हजार 266 क्विंटल गेहूं खरीदा गया था।



इसमें से 65 लाख 99 हजार 256 क्विंटल गेहूं ही भंडारण के लिए गोदामों को भेजा गया। इसमें से भी 65 लाख 84 हजार 871 क्विंटल गेहूं ही गोदामों में स्वीकृत हो पाया। बाकी 8,377 क्विंटल गेहूं को अपग्रेडेशन की श्रेणी में डाला गया। वहीं 6007 क्विंटल गेहूं को सीधे कमी की श्रेणी में दर्ज किया गया।



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अफसरों के पास कोई जवाब नहीं

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गुरुवार, 09 जुलाई को अफसरों से दोबारा जानकारी मांगी गई, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला है। जिला खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के जिला अधिकारी अनिल तंतुवाल को भी फोन किया गया। वहीं, उन्होंने भी फोन रिसीव नहीं किया।



नागरिक आपूर्ति निगम की जिला प्रबंधक आशा अग्रवाल से भी तीन दिनों तक संपर्क करने की कोशिश हुई। उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। बाद में उन्हें दो बार व्हाट्सएप पर संदेश भी भेजे गए। मंगलवार को उन्होंने जवाब दिया कि अभी डेटा फाइनल नहीं हुआ है।



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सिरोंज और त्योंदा में सबसे ज्यादा गड़बड़ी

विभागीय सूत्रों के मुताबिक जिले की सिरोंज और त्योंदा तहसील से खरीदी केंद्रों से परिवहन के दौरान सबसे ज्यादा गेहूं गायब हुआ। सूत्रों के अनुसार यहां जानकी वेयरहाउस पर बने केंद्र का 493.38 क्विंटल और श्री हरिसिंह वेयरहाउस पर बने केंद्र का 325.52 क्विंटल गेहूं कम पाया गया। इसके अलावा त्योंदा की श्रीजी वेयरहाउसिंग पर बने केंद्र का 452.06 क्विंटल गेहूं भी परिवहन के दौरान कम निकला।



नटेरन तहसील के ग्राम एचदरा स्थित श्रीराम वेयरहाउस में 288.39 क्विंटल गेहूं की कमी मिली। कुरवाई तहसील की बरवाई स्थित एसएमएफ (Self Managed Fund) वेयरहाउस केंद्र में 268.51 क्विंटल और शमशाबाद में पार्वती स्व-सहायता समूह के केंद्र पर 253.64 क्विंटल गेहूं कम पाया गया।



आठ हजार क्विंटल गेहूं मिला अमानक

जिले में हुई खरीदी में करीब आठ हजार क्विंटल गेहूं अमानक भी निकला। इनमें कुछ केंद्र ऐसे हैं जहां खरीदा गया करीब 10 प्रतिशत गेहूं अमानक पाया गया। ग्यारसपुर के सिहोद केंद्र में 42 हजार 819.50 क्विंटल गेहूं खरीदा गया था। यहां से गोदाम पहुंचते ही चार हजार 11.94 क्विंटल गेहूं अमानक पाया गया। इसे साफ करने के लिए अपग्रेडेशन की श्रेणी में डाल दिया गया। वहीं विदिशा के तरह केंद्र पर भी एक हजार 395.50 क्विंटल गेहूं अमानक पाया गया।



समिति प्रबंधकों की सफाई

समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदने वाली सहकारी समितियों के प्रबंधकों का कहना अलग है। उनके मुताबिक इस साल परिवहन में देरी के कारण गेहूं सूखा भी है। लेकिन परिवहन के बाद जो कमी आई है, वह इससे कहीं ज्यादा है।



बरवाई सहकारी समिति के प्रबंधक चंद्रहास शर्मा ने बताया कि उनके केंद्र पर 268 क्विंटल की कमी बताई गई है। इसमें से 147 क्विंटल गेहूं सूखने के कारण कम हुआ। बाकी 121 क्विंटल गेहूं परिवहन के दौरान कहां गायब हुआ, इसकी उन्हें जानकारी नहीं है। उन्होंने सूखत की जानकारी नागरिक आपूर्ति निगम को दे दी है।



दीपनाखेड़ा सहकारी समिति के प्रबंधक सौभाग्य सिंह रघुवंशी ने बताया कि उनके केंद्रों पर कुल 818 क्विंटल गेहूं की कमी है। इसमें से सूखत के कारण करीब ढाई सौ क्विंटल की कमी आई। इसके दस्तावेज उनके पास मौजूद हैं। बाकी 568 क्विंटल गेहूं परिवहन के दौरान ही गायब हुआ है।



निगम अफसर सवालों के घेरे में

इतने बड़े पैमाने पर समर्थन मूल्य का गेहूं गायब होने का यह पहला बड़ा मामला है। इससे नागरिक आपूर्ति निगम के अधिकारी सवालों के घेरे में आ गए हैं। सहकारी समितियों के प्रबंधकों का कहना है कि इस बार परिवहन में जितनी देरी हुई, उतनी पहले कभी नहीं हुई।



नियम के मुताबिक परिवहनकर्ता को खरीदी के 72 घंटे के भीतर गेहूं ले जाना होता है। वहीं, इस बार परिवहन में आठ से पंद्रह दिन तक का समय लग गया। इस दौरान समिति प्रबंधक नागरिक आपूर्ति निगम की जिला प्रबंधक को बार-बार पत्र लिखते रहे। लेकिन उनकी शिकायत पर कोई ध्यान नहीं दिया गया।



सूत्रों के अनुसार इस बार जिले में समर्थन मूल्य की खरीदी का ठेका विदिशा और सागर के दो ठेकेदारों को दिया गया था। लेकिन निगम ने उन पर अब तक कोई बड़ी कार्रवाई नहीं की है। अब जब यह मामला सामने आया है, तब भी विभाग परिवहनकर्ताओं की जिम्मेदारी तय नहीं कर पाया है।



कर्मचारी संघ ने भी उठाई आवाज

सहकारी समिति कर्मचारी संघ के जिला अध्यक्ष राजेंद्र कटारे का कहना है कि गेहूं की कमी परिवहन के दौरान आई है। इसलिए इसके लिए समितियों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। उनका कहना है कि विभाग को निष्पक्ष जांच करानी चाहिए। जो भी इस गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार हैं, उन पर कार्रवाई होनी चाहिए।



फिलहाल पांच दिन से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी किसी अधिकारी की जवाबदेही तय नहीं हो सकी है। न ही किसी पर कार्रवाई हुई है। निगम के जिम्मेदार अधिकारी पूरे मामले पर चुप्पी साधे हुए हैं। मीडिया के सवालों का जवाब देने से भी वे बचते नजर आए हैं।



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