अंधविश्वास या मां की ममता? विदिशा में लाश पर बाइबिल रख 5 दिन चमत्कार का इंतजार करती रही एक मां!
Sanjay Dhiman | May 26, 2026, 15:26 IST
Photograph: (the sootr)
विदिशा में शीनू वर्गिस की मौत के बाद उनकी मां पांच दिन तक शव के पास बैठकर बाइबिल पढ़ती रहीं। घर से बदबू और खून आने पर पड़ोसियों को शक हुआ। सूचना मिलने पर पुलिस पहुंची और शव पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा।
मध्य प्रदेश के विदिशा जिले से बेहद भावुक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक मां अपने बेटे को दोबारा जिंदा करने की उम्मीद में पांच दिनों तक लगातार प्रार्थना करती रही। घर के अंदर बेटे का शव पड़ा रहा। उसके सीने पर बाइबिल रखी हुई थी। बाहर लोगों को तेज बदबू आने लगी। इसके बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ। इंसान उम्मीद पर टिके रहते हैं। कभी-कभी उम्मीद तर्क से भी बड़ी हो जाती है।
विदिशा में सामने आया
यह पूरा मामला विदिशा के सिविल लाइन थाना क्षेत्र का बताया जा रहा है। मृत युवक की पहचान शीनू वर्गिस के रूप में हुई है। उसकी उम्र करीब 42 साल बताई गई है। पुलिस के अनुसार शीनू मूल रूप से ईसाई परिवार से था। वह पहले मुंबई में फैशन डिजाइनिंग का काम करता था। पिता की मौत के बाद वह पिछले एक साल से अपनी मां मरियमा वर्गिस के साथ विदिशा में रह रहा था।
मरियमा वर्गिस एक निजी स्कूल से रिटायर शिक्षिका बताई जा रही हैं। पड़ोसियों के मुताबिक, मां-बेटे ज्यादा लोगों से बातचीत नहीं करते थे। परिवार काफी शांत स्वभाव का माना जाता था।
सोमवार सुबह दूध विक्रेता सचिन लोधी रोज की तरह दूध देने पहुंचे थे। घर के बाहर पहुंचते ही उन्हें तेज बदबू महसूस हुई। दरवाजे के नीचे से खून जैसा तरल पदार्थ बहता दिखाई दिया। इसके बाद उन्हें किसी अनहोनी का शक हुआ।
उन्होंने घर के अंदर मौजूद महिला से बात करने की कोशिश की। इस दौरान मरियमा वर्गिस ने कहा कि लोगों ने मिलकर उनके बेटे को मार डाला। महिला की बात सुनकर दूध विक्रेता घबरा गया। इसके बाद आसपास के लोगों और पुलिस को सूचना दी गई।
पड़ोसी दिनेश साहू ने बताया कि दो-तीन दिनों से इलाके में दुर्गंध फैल रही थी। लोगों को लगा कि किसी जानवर की मौत हुई होगी। महिला रोज सामान्य तरीके से दिखाई देती थीं। इसलिए किसी को अंदर शव होने की जानकारी नहीं हुई।
पुलिस जांच में सबसे चौंकाने वाली बात सामने आई। अधिकारियों के मुताबिक, बेटे की मौत के बाद मां ने किसी रिश्तेदार या पड़ोसी को सूचना नहीं दी। उन्हें भरोसा था कि लगातार प्रार्थना करने से बेटा फिर जीवित हो जाएगा।
शीनू के शव के ऊपर बाइबिल रखी हुई थी। कमरे में प्रार्थना से जुड़ी कई चीजें मौजूद थीं। मां लगातार धार्मिक प्रार्थना करती रहीं। इसी उम्मीद में अंतिम संस्कार भी नहीं किया गया।
यह मामला सिर्फ पुलिस जांच का विषय नहीं बना, बल्कि लोगों के बीच मानसिक और भावनात्मक स्थिति को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई। दुख और अकेलापन इंसान को कई बार वास्तविकता से दूर ले जाते हैं। समाज अक्सर ऐसी घटनाओं को समझने के बजाय तमाशा बना देता है। मानवता कभी-कभी न्यूज चैनलों की ब्रेकिंग लाइन में खो जाती है।
सूचना मिलने के बाद सिविल लाइन थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस जब घर के अंदर जाने लगी, तब मरियमा वर्गिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की। उन्होंने दो बार दरवाजा बंद करने का प्रयास भी किया।
काफी समझाने के बाद पुलिस टीम घर के अंदर पहुंच सकी। कमरे के अंदर शीनू वर्गिस का शव पड़ा मिला। पुलिस के मुताबिक, शव करीब पांच दिन पुराना था। शव से तेज दुर्गंध आ रही थी और उसमें कीड़े पड़ चुके थे। पुलिस ने तुरंत शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। इलाके में घटना के बाद लोगों की भीड़ जमा हो गई।
पड़ोसियों के अनुसार, शीनू पिछले कुछ समय से बीमार चल रहा था। हालांकि बीमारी को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। उसके दो भाई विदेश में रहते हैं। पिता की मौत के बाद वह मां की देखभाल के लिए विदिशा में ही रह रहा था।
स्थानीय लोगों का कहना है कि परिवार काफी सीमित दायरे में रहता था। घर पर बहुत कम लोगों का आना-जाना था। यही वजह रही कि घटना कई दिनों तक किसी की नजर में नहीं आई।
सिविल लाइन थाना प्रभारी राजपाल सिंह जादौन ने बताया कि शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया है। मौत की असली वजह मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद साफ होगी।
पुलिस ने बताया कि महिला को निगरानी में रखा गया है। रिश्तेदारों को सूचना दे दी गई है। फिलहाल मामले की जांच जारी है।
इस घटना के बाद लोग मानसिक स्वास्थ्य और अकेलेपन पर भी चर्चा कर रहे हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि किसी करीबी की अचानक मौत इंसान को गहरे सदमे में डाल देती है। कई बार व्यक्ति वास्तविक स्थिति को स्वीकार नहीं कर पाता।
पुलिस फिलहाल मामले को संवेदनशील तरीके से संभाल रही है। अधिकारियों का कहना है कि सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले मेडिकल रिपोर्ट का इंतजार किया जाएगा।
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विदिशा में सामने आया हैरान करने वाला मामला
मरियमा वर्गिस एक निजी स्कूल से रिटायर शिक्षिका बताई जा रही हैं। पड़ोसियों के मुताबिक, मां-बेटे ज्यादा लोगों से बातचीत नहीं करते थे। परिवार काफी शांत स्वभाव का माना जाता था।
दूध वाले को बदबू और खून देखकर हुआ शक
उन्होंने घर के अंदर मौजूद महिला से बात करने की कोशिश की। इस दौरान मरियमा वर्गिस ने कहा कि लोगों ने मिलकर उनके बेटे को मार डाला। महिला की बात सुनकर दूध विक्रेता घबरा गया। इसके बाद आसपास के लोगों और पुलिस को सूचना दी गई।
पड़ोसी दिनेश साहू ने बताया कि दो-तीन दिनों से इलाके में दुर्गंध फैल रही थी। लोगों को लगा कि किसी जानवर की मौत हुई होगी। महिला रोज सामान्य तरीके से दिखाई देती थीं। इसलिए किसी को अंदर शव होने की जानकारी नहीं हुई।
बेटे को जिंदा करने की उम्मीद में पढ़ती रहीं बाइबिल
शीनू के शव के ऊपर बाइबिल रखी हुई थी। कमरे में प्रार्थना से जुड़ी कई चीजें मौजूद थीं। मां लगातार धार्मिक प्रार्थना करती रहीं। इसी उम्मीद में अंतिम संस्कार भी नहीं किया गया।
यह मामला सिर्फ पुलिस जांच का विषय नहीं बना, बल्कि लोगों के बीच मानसिक और भावनात्मक स्थिति को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई। दुख और अकेलापन इंसान को कई बार वास्तविकता से दूर ले जाते हैं। समाज अक्सर ऐसी घटनाओं को समझने के बजाय तमाशा बना देता है। मानवता कभी-कभी न्यूज चैनलों की ब्रेकिंग लाइन में खो जाती है।
पुलिस को घर के अंदर जाने से रोकती रही महिला
काफी समझाने के बाद पुलिस टीम घर के अंदर पहुंच सकी। कमरे के अंदर शीनू वर्गिस का शव पड़ा मिला। पुलिस के मुताबिक, शव करीब पांच दिन पुराना था। शव से तेज दुर्गंध आ रही थी और उसमें कीड़े पड़ चुके थे। पुलिस ने तुरंत शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। इलाके में घटना के बाद लोगों की भीड़ जमा हो गई।
कुछ समय से बीमार चल रहा था शीनू
स्थानीय लोगों का कहना है कि परिवार काफी सीमित दायरे में रहता था। घर पर बहुत कम लोगों का आना-जाना था। यही वजह रही कि घटना कई दिनों तक किसी की नजर में नहीं आई।
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार
पुलिस ने बताया कि महिला को निगरानी में रखा गया है। रिश्तेदारों को सूचना दे दी गई है। फिलहाल मामले की जांच जारी है।
अकेलापन और मानसिक स्थिति चर्चा का विषय
पुलिस फिलहाल मामले को संवेदनशील तरीके से संभाल रही है। अधिकारियों का कहना है कि सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले मेडिकल रिपोर्ट का इंतजार किया जाएगा।
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