मंत्री विजय शाह के खिलाफ मुकदमे को लेकर दिल्ली में मंथन, SIT की रिपोर्ट बनी मुसीबत

Ravi Awasthi | Feb 05, 2026, 23:10 IST
vijay shah case
मध्यप्रदेश के मंत्री विजय शाह के खिलाफ मुकदमा चलाने के सवाल पर दिल्ली में गहन मंथन हुआ। एसआईटी की रिपोर्ट में मुकदमा चलाने की सिफारिश की गई है, लेकिन सरकार कोई निर्णय नहीं ले पाई।

BHOPAL. मध्यप्रदेश सरकार में मंत्री विजय शाह के खिलाफ मुकदमा चलाया जाया या नहीं, इसको लेकर प्रदेश सरकार बुरी तरह फंस गई है। इस मसले पर गुरुवार को दिल्ली में गहन मंथन हुआ। लेकिन सरकार किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। गौरतलब है की शाह ने ऑपरेशन सिंदूर में शामिल कर्नल सोफिया कुरैशी पर कुछ महीने पहले आपत्तिजनक बयान दिया था। दरअसल, शाह प्रकरण में मप्र पुलिस एसआईटी की रिपोर्ट ही बड़ा पेंच है,इसमें मुकदमा चलाने की सिफारिश की गई। यह रिपोर्ट भी सीधे सुप्रीम कोर्ट में पेश हुई।



सूत्रों के मुताबिक,मंत्री शाह के प्रकरण को लेकर गुरुवार शाम सीएम मोहन यादव की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय बैठक हुई। इसमें मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन,गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव शिवशेखर शुक्ला व सचिव कृष्णवेणी देशावतु भी शामिल हुए।



मुख्यमंत्री डॉ यादव गुरुवार को हरिद्वार के दौरे पर रहे। वह दोपहर में महामंडलेश्वर स्वामी परमानंद गिरि के आश्रम पहुँचे एवं उनका आशीर्वाद लिया। डॉ यादव देर शाम दिल्ली पहुंचे। इसके बाद शाह केस को लेकर मंथन हुआ,लेकिन कोई अंतिम निर्णय नहीं हो सका।



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सोमवार को होना है सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को शाह प्रकरण में अगली सुनवाई होगी। इससे पहले सरकार को मंत्री के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति को लेकर फैसला लेना है। ऐसे में सरकार के पास अब भी तीन दिन की मोहलत है।



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दो दिन से दिल्ली में डाला ढेरा

सूत्रों के अनुसार,मप्र गृह विभाग के अधिकारी बीते दो दिन से दिल्ली में डेरा डाले हुए है। इस दौरान, उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधिकारियों व विधि विशेषज्ञों से बातचीत कर बचाव के तरीकों पर बात की। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने गत 19 जनवरी को एक आदेश जारी किया। इसमें कहा गया कि राज्य सरकार मंत्री शाह से जुड़े केस में अभियोजन स्वीकृति को लेकर फैसला ले। इसके लिए दो सप्ताह की मोहलत दी गई। यह मियाद दो फरवरी को पूरी हो चुकी और बीते तीन दिन से सिर्फ मंथन का दौर जारी है।



एसआईटी रिपोर्ट बनी मुसीबत,गंवाया मौका

शाह केस में ना सिर्फ आरोपी मंत्री बल्कि जिम्मेदार अधिकारी भी समय रहते हालात को संभाल नहीं सके। दरअसल,सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गठित एसआईटी ने अगस्त में अपनी रिपोर्ट तैयार कर ली ​थी। इसके आधार पर उसने शाह के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति भी सरकार से मांगी। लेकिन तब एसआईटी की रिपोर्ट को गंभीरता से नहीं लिया गया। सूत्रों का दावा है कि प्रकरण में समय रहते सक्रियता दिखाई गई होती तो स्थिति को बिगड़ने से रोका जा सकता था।



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रिपोर्ट के सार्वजनिक होते ही उड़े होश

मप्र गृह विभाग के अधिकारी 19 जनवरी को चौकन्ने हुए। एसआईटी ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी रिपोर्ट का खुलासा किया। एसआईटी ने कोर्ट को बताया कि उसने सरकार से अभियोजन की अनुमति मांगी, जो नहीं मिली।



एसआईटी के इस खुलासे के बाद,सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए सरकार को दो सप्ताह की मुकदमे का फैसला लेने का आदेश दिया। रिपोर्ट से साफ है कि एसआईटी ने मंत्री पर लगे आरोपों को पृथम दृष्टया सही पाया। इसी आधार पर उनके खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति मांगी।



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वि​वादित बयान को लेकर फंसे शाह

बता दें कि गत 11 मई को मंत्री विजय शाह ने ऑपरेशन सिंदूर में शामिल एक महिला सैन्य अधिकारी को लेकर महू में विवादित बयान दिया था। बाद में हाईकोर्ट जबलपुर के आदेश पर उनके खिलाफ इंदौर पुलिस ने आपराधिक मामला दर्ज किया गया। शाह हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे,लेकिन वहां भी उन्हें राहत नहीं मिली।





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