SIT रिपोर्ट के एक साल पूरे, लेकिन विजय शाह के विवादित बयान पर फैसला अब भी शून्य

Amresh Kushwaha | Jul 27, 2026, 08:32 IST
कर्नल सोफिया कुरैशी विवाद
मध्य प्रदेश के मंत्री विजय शाह ने कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित बयान दिया था। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट अब 7 अगस्त को सुनवाई करेगा। SIT जांच को एक साल होने वाला है, फिर भी सरकार ने अभियोजन पर फैसला नहीं लिया है।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • मंत्री विजय शाह ने कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित बयान दिया था।
  • यह बयान 11 मई 2025 को इंदौर में दिया गया था।
  • हाईकोर्ट के आदेश पर उनके खिलाफ FIR दर्ज हुई थी।
  • सुप्रीम कोर्ट ने SIT जांच के आदेश दिए थे।
  • अब मामले की अगली सुनवाई 7 अगस्त को होगी।

क्या था विवादित बयान

यह विवाद 11 मई 2025 को शुरू हुआ। उस दिन विजय शाह इंदौर के महू में थे। वे रायकुंडा गांव में हलमा कार्यक्रम में पहुंचे थे। यहां उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर पर बयान दिया था। शाह ने पहलगाम हमले का जिक्र करते हुए आतंकियों की बात की।



इसके बाद उन्होंने कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर टिप्पणी की। यह टिप्पणी बेहद आपत्तिजनक मानी गई। बयान सामने आते ही यह वीडियो तेजी से वायरल हुआ। देशभर में इस पर तीखी प्रतिक्रिया आई। विपक्ष के साथ-साथ आम जनता ने भी नाराजगी जताई। सेना की महिला अधिकारी पर ऐसी टिप्पणी को अपमानजनक बताया गया।



कैसे बढ़ा पूरा विवाद

बयान के बाद विजय शाह पर दबाव बढ़ने लगा। इसके बाद, 13 मई को उन्होंने सार्वजनिक रूप से माफी मांगी। इसके बावजूद भाजपा संगठन ने उन्हें फटकार लगाई। मामला इतना बड़ा हो गया कि हाईकोर्ट को दखल देना पड़ा।



14 मई को हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया। कोर्ट ने मंत्री के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दिया। उसी रात इंदौर के मानपुर थाने में FIR दर्ज हुई। इसके बावजूद विवाद यहीं नहीं थमा।



15 मई को हाईकोर्ट ने FIR की भाषा पर भी नाराजगी जताई। कोर्ट को लगा कि FIR में मामले की गंभीरता नहीं दिखाई गई। इसके बाद 16 मई को हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई।



SIT जांच और कार्रवाई

17 मई को सुप्रीम कोर्ट में पहली सुनवाई हुई। कोर्ट ने अगली तारीख 19 मई तय की। सुप्रीम कोर्ट ने 19 मई को विजय शाह को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए SIT बनाने का आदेश दिया था। उसी दिन तीन सदस्यों वाली SIT का गठन हुआ था। इसमें सागर रेंज के तत्कालीन IG (Inspector General) प्रमोद वर्मा शामिल थे। साथ ही तत्कालीन SAF DIG (Deputy Inspector General) कल्याण चक्रवर्ती को भी टीम में रखा गया। डिंडोरी की SP (Superintendent of Police) वाहिनी सिंह तीसरी सदस्य बनाई गईं।



20 मई को SIT ने अपनी जांच शुरू कर दी। टीम ने इंदौर के बाणगंगा थाना क्षेत्र में बेस कैम्प बनाया। SIT की टीम 21 मई को रायकुंडा गांव पहुंची। यहीं विजय शाह ने विवादित बयान दिया था। टीम ने मौके पर जाकर सबूत जुटाए।



अब तक क्या हुआ

जांच के दौरान SIT ने कई लोगों के बयान दर्ज किए थे। सभी दस्तावेज तैयार कर 28 मई को कोर्ट में पेश किए गए। इसके बाद जांच लंबे समय तक चलती रही। SIT ने 19 जुलाई को विजय शाह को खुद जबलपुर बुलाया। यहां उनसे करीब 25 मिनट तक सवाल-जवाब हुए।



28 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने फिर सुनवाई की। कोर्ट ने इस दौरान विजय शाह को दोबारा फटकार लगाई। बताया जाता है कि SIT ने अगस्त 2025 में ही अपनी पूरी जांच रिपोर्ट सौंप दी थी। इसके बावजूद मध्य प्रदेश सरकार अभियोजन की मंजूरी पर फैसला नहीं ले पाई। इसी वजह से यह मामला अब भी अटका हुआ है।



19 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने इस देरी पर सख्त टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि इतनी देर हो जाना उचित नहीं है। कोर्ट ने राज्य सरकार को दो हफ्ते में फैसला लेने का निर्देश दिया। इसके बाद भी सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।



कौन हैं सोफिया कुरैशी

इस पूरे विवाद के केंद्र में कर्नल सोफिया कुरैशी हैं। वे भारतीय सेना की एक बेहद अनुभवी अधिकारी हैं। सोफिया मूल रूप से गुजरात के वडोदरा की रहने वाली हैं। उन्होंने बायोकेमिस्ट्री में मास्टर डिग्री हासिल की है। इसके बाद 1999 में उन्होंने भारतीय सेना जॉइन की थी। फिलहाल वे सिग्नल कोर में तैनात हैं।



सोफिया को UN (United Nations) के शांति मिशनों में काम करने का भी अनुभव है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उन्होंने मीडिया को अहम जानकारी दी थी। उनके इस अंदाज ने उन्हें देशभर में पहचान दिलाई। आज वे कई युवा लड़कियों के लिए बड़ी प्रेरणा बन चुकी हैं। वे दिखाती हैं कि महिलाएं सेना में भी बड़ी जिम्मेदारी निभा सकती हैं।



आगे क्या होगा

मामले में 8 मई को सुप्रीम कोर्ट ने फिर सख्ती दिखाई थी। कोर्ट ने साफ कहा था कि आदेश का पालन जरूरी है। इसके बावजूद राज्य सरकार की तरफ से कोई ठोस जवाब नहीं आया। 24 जुलाई को होने वाली सुनवाई किसी वजह से टल गई।



कोर्ट को बताया गया कि नोटिस की तामील हो चुकी है। साथ ही अतिरिक्त हलफनामा भी दाखिल किया जा चुका है। लेकिन आदेश का पालन अभी तक पूरी तरह नहीं हुआ है।



अब मामले की अगली सुनवाई 7 अगस्त को तय हुई है। इससे पहले राज्य सरकार को कोर्ट में अनुपालन रिपोर्ट पेश करनी होगी। अगस्त में इस जांच को शुरू हुए लगभग एक साल पूरा हो जाएगा। ऐसे में सबकी निगाहें अब 7 अगस्त की सुनवाई पर टिकी हैं। देखना होगा कि सरकार इस बार क्या फैसला लेती है।



यह खबर क्यों जरूरी है

यह मामला सिर्फ एक नेता के बयान का नहीं है। यह सेना की एक महिला अधिकारी के सम्मान से जुड़ा है। सोफिया कुरैशी जैसी अफसर देश की बेटियों के लिए मिसाल हैं। सार्वजनिक जीवन में जिम्मेदार भाषा का इस्तेमाल जरूरी है। यह खबर बताती है कि कानून के सामने सब बराबर होते हैं।



कोर्ट की सख्ती दिखाती है कि न्याय प्रक्रिया कितनी सतर्क है। साथ ही यह भी सामने आता है कि सरकारी फैसलों में देरी जनता के भरोसे को कमजोर करती है। संविधान सबको अभिव्यक्ति की आजादी देता है, लेकिन यह जिम्मेदारी के साथ आनी चाहिए। इसलिए यह खबर आम लोगों के लिए जानना जरूरी है।



FAQ

  1. विजय शाह पर क्या आरोप है?
    विजय शाह पर आरोप है कि उन्होंने कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर आपत्तिजनक बयान दिया। यह बयान उन्होंने 11 मई 2025 को इंदौर के महू में दिया था। इस पर हाईकोर्ट के आदेश पर उनके खिलाफ FIR दर्ज की गई थी। मामले की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने SIT बनाई थी।
  2. कर्नल सोफिया कुरैशी कौन हैं?
    कर्नल सोफिया कुरैशी भारतीय सेना की सीनियर अधिकारी हैं। वे गुजरात के वडोदरा की रहने वाली हैं। उन्होंने 1999 में सेना जॉइन की थी और फिलहाल सिग्नल कोर में तैनात हैं। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान मीडिया ब्रीफिंग से वे चर्चा में आईं।

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